केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग के लिए एक परफॉरमेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड 'पैमाना' शुरू किया है. इसके जरिए भारत सरकार की विभिन्न इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की न सिर्फ प्रभावी मॉनिटरिंग होगी, बल्कि मंत्रालय का दावा है कि समय पर इन परियोजनाओं को पूरा करने में भी मदद मिलेगी.
देश के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी के लिए बने PAIMANA परफॉरमेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड का पूरा नाम 'प्रोजेक्ट असेस्मेंट, इन्फ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग ऐंड एनालिटिक्स फॉर नेशन-बिल्डिंग' है. पैमाना डैशबोर्ड ने पहले से चली आ रही ऑनलाइन कंप्यूटराइज्ड मॉनिटरिंग सिस्टम की जगह ली है. यह डैशबोर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में डेटा-ड्रिवन गवर्नेंस और एविडेंस-बेस्ड पॉलिसी मेकिंग को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. भारत जैसे विकासशील देश में, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को आर्थिक प्रगति का माध्यम माना जाता है, वहां इस तरह के डैशबोर्ड की जरूरत सरकार के स्तर पर लंबे समय से महसूस की जा रही थी.
पैमाना डैशबोर्ड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पारंपरिक उत्पादन-आधारित मॉनिटरिंग से आगे बढ़कर इंफ्रास्ट्रक्चर परफॉरमेंस को मल्टी-डाइमेंशनल तरीके से ट्रैक करेगा. इस डैशबोर्ड के आने से पहले मंत्रालय 11 प्रमुख इंडिकेटर्स और 28 सब-इंडिकेटर्स के आधार पर इंफ्रास्ट्रक्चर परफॉरमेंस पर नजर रखता था. इनमें ग्रोथ रेट्स (ईयर-ऑन-ईयर, मंथ-ऑन-एम मंथ और कमुलेटिव), टारगेट्स के मुकाबले अचीवमेंट और कुछ सेक्टर्स में कैपेसिटी यूटिलाइजेशन जैसे संकेतक शामिल थे.
अब नया पैमाना फ्रेमवर्क आउटपुट मेजरमेंट से हटकर पहुंच, गुणवत्ता, आर्थिक पक्ष, राजस्व, यूटिलाइजेशन और अफोर्डेबिलिटी जैसे पांच प्रमुख आयामों पर फोकस कर रहा है. एक्सेस आयाम यह देखता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर कितना व्यापक रूप से उपलब्ध है. वहीं गुणवत्ता के तहत प्रोजेक्ट की उपयोगिता और विश्वसनीयता को ट्रैक किया जा रहा है. फिस्कल कॉस्ट और रेवेन्यू के तहत वित्तीय संसाधनों के आवंटन और उपयोग को ट्रैक करने का काम हो रहा है. यूटिलाइजेशन यह मूल्यांकन करता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर अपने उद्देश्य के लिए कितनी कुशलता से इस्तेमाल हो रहा है. अफोर्डेबिलिटी यह तय करती है कि आम लोगों के लिए यह आर्थिक रूप से सुलभ है या नहीं.
मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस वर्गीकरण से बेहतर विश्लेषण होता है. क्योंकि अब नीति-निर्माताओं के सामने इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से संबंधित समग्र तस्वीर उपलब्ध हो पा रही है. इस वजह से जहां जरूरत पड़ रही है, वहां सरकार के लिए दखल देना आसान हो गया है.
पैमाना डैशबोर्ड के तहत विभिन्न इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए कुल 116 इंडिकेटर्स हैं. नागर विमानन से संबंधित परियोजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए 29 इंडिकेटर्स हैं. वहीं सड़क परियोजनाओं के लिए नौ इंडिकेटर्स, बिजली क्षेत्र के लिए 13 इंडिकेटर्स, पोर्ट्स, शिपिंग ऐंड वॉटरवेज के लिए 49 इंडिकेटर्स, दूरसंचार परियोजनाओं के लिए सात इंडिकेटर्स और रेलवे परियोजनाओं के लिए नौ इंडिकेटर्स पैमाना डैशबोर्ड के अंदर हैं. मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि डैशबोर्ड पर हर तिमाही डेटा अपडेट होता रहेगा.
मंत्रालय का दावा है कि पैमाना सिर्फ मॉनिटरिंग टूल नहीं है, बल्कि एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म भी है. यह विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय भी सुनिश्चित करेगा, क्योंकि सभी सेक्टर्स का डेटा एक जगह उपलब्ध होगा. हालांकि, डैशबोर्ड की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह कितना नियमित अपडेट होता है और कितना सही डेटा यहां उपलब्ध कराया जाता है. मंत्रालय को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी संबंधित विभाग डेटा समय पर अपलोड करें.

