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न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री भारत के साथ हुए व्यापार समझौते का विरोध क्यों कर रहे?

न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने कहा कि उनकी पार्टी भारत के साथ व्यापार समझौते का विरोध करती है क्योंकि यह न तो स्वतंत्र है और न ही निष्पक्ष है

17 मार्च 2025 को हैदराबाद हाउस में PM मोदी से मुलाकात करते न्यूजीलैंड के PM क्रिस्टोफर लक्सन
17 मार्च 2025 को हैदराबाद हाउस में PM मोदी से मुलाकात करते न्यूजीलैंड के PM क्रिस्टोफर लक्सन
अपडेटेड 23 दिसंबर , 2025

न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने कुछ समय पहले हुए भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का कड़ा विरोध किया है. उन्होंने इस समझौते के बारे में कहा कि यह स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं है.

इसके साथ ही उन्होंने अपनी ही सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, "यह न्यूजीलैंड के लिए एक खराब डील है, जो हमसे लेती ज्यादा है और बदले में देती कम है. इसी कारण यह हमारे लिए एक बुरा सौदा है."

न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री ने इस समझौते को अपने लोगों के खिलाफ बताया

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में विंस्टन पीटर्स ने कहा,"अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि यह समझौता न्यूजीलैंड फर्स्ट की नीति के खिलाफ है.यह इमिग्रेशन और इन्वेस्टमेंट पर 'गंभीर रियायतें' देता है, जबकि न्यूजीलैंड के मुख्य एक्सपोर्ट सेक्टर खासकर डेयरी के लिए सार्थक फायदे देने में नाकाम है" उन्होंने आगे कहा कि यह न्यूजीलैंड के किसानों के लिए फायदेमंद डील नहीं है और हमारे ग्रामीण समुदायों के सामने इसका बचाव करना नामुमकिन है.

काफी कम समय में दोनों देशों के बीच हुआ ट्रेड समझौता

मुक्त व्यापार समझौता से भारत के 100 फीसद निर्यात को जीरो टैरिफ पर मार्केट एक्सेस मिलेगा. भारत ने न्यूजीलैंड के साथ द्विपक्षीय व्यापार के 95 फीसद हिस्से को कवर करने वाली 70 फीसद टैरिफ लाइनों में टैरिफ कम करने की पेशकश की है. 16 मार्च 2025 से इस समझौते पर बात शुरू हुई थी और महज 9 महीने में ही इसपर समझौता भी हो गया जो किसी भी विकसित देश के साथ सबसे तेज FTA है.

इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने भारत को अब तक की सबसे बेहतरीन मार्केट एक्सेस और सेवाओं की पेशकश की है, जिसमें कंप्यूटर संबंधी सेवाएं, पेशेवर सेवाएं, ऑडियो-विजुअल सेवाएं, दूरसंचार सेवाएं, निर्माण सेवाएं, पर्यटन और यात्रा से जुड़ी सेवाएं सहित कुल 118 सर्विस सेक्टर शामिल हैं. दोनों सरकारों का कहना है कि यह समझौता अगले पांच सालों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने में सहायक हो सकता है.

इस व्यापार समझौते में खास क्या है?

न्यूजीलैंड सरकार के मुताबिक, इस समझौते से भारत में न्यूजीलैंड से आने वाले 95 फीसद तक सामानों पर निर्यात शुल्क समाप्त या कम हो जाएगा. आधे से अधिक प्रोडक्ट समझौते के पहले ही दिन से शुल्क मुक्त हो जाएंगे. वहीं, बदले में सभी भारतीय वस्तुओं को न्यूजीलैंड के बाजार में शुल्क मुक्त प्रवेश मिलेगा.

इन्वेस्टमेंट पर भारी रियायतों के कारण न्यूजीलैंड ने अगले 15 सालों में भारत में लगभग 20 अरब डॉलर का निवेश करने की इच्छा जताई है.न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इस समझौते को दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण लाभ देने वाला बताया है. उन्होंने एक बयान में कहा, "इसके लाभ व्यापक और महत्वपूर्ण हैं."

उन्होंने आगे कहा कि भारत का आकार और तीव्र आर्थिक विकास न्यूजीलैंडवासियों के लिए रोजगार, निर्यात और विकास के अवसर पैदा करते हैं. यह समझौता लक्सन की नेशनल पार्टी के जरिए 2022 के चुनाव में किए गए उस वादे को भी पूरा करता है जिसमें उसने अपने पहले कार्यकाल में भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) को अंतिम रूप देने की बात कही थी.

संसद में समझौते पर सही से चर्चा नहीं होने से नाराज हैं विदेश मंत्री

न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने समझौते को जल्दबाजी में किए जाने और समझौते के अहम बिंदुओं पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा, "न्यूजीलैंड फर्स्ट पार्टी ने अपने गठबंधन सहयोगी से आग्रह किया था कि वह भारत के साथ "कम गुणवत्ता वाले समझौते को जल्दबाजी में अंतिम रूप न दें. इसके बजाय संसद के पूरे कार्यकाल में इस समझौते पर बेहतर परिणाम के लिए चर्चा करें."

पीटर्स ने कहा, "दुर्भाग्य से इन अपीलों पर ध्यान नहीं दिया गया." उन्होंने नेशनल पार्टी पर आरोप लगाया कि वह अपने हित में बेहतर समझौता हासिल करने के लिए आवश्यक कड़ी मेहनत करने के बजाय जल्दबाजी में कम गुणवत्ता वाले समझौते को प्राथमिकता दे रही है."

विंस्टन पीटर्स एक राष्ट्रवादी राजनीतिक दल न्यूजीलैंड फर्स्ट के नेता हैं और देश के सत्तारूढ़ गठबंधन में एक प्रमुख भागीदार हैं.

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