देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 (NEET UG 2026) एक बार फिर विवादों में है. इस बार विवाद की जद वह गेस पेपर बना है जो परीक्षा से कई दिन पहले पूरे देश में घूमता रहा.
राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) की शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि परीक्षा से पहले छात्रों के बीच 410 सवालों वाला एक कथित गेस पेपर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें से 150 सवाल नीट परीक्षा में हूबहू पूछे गए हैं.
यह विवाद इसलिए भी बड़ा है क्योंकि 720 नंबर के नीट यूजी के पेपर में से 600 नंबर के सवाल इस गेस पेपर से मेल खा रहे हैं. बताया जा रहा है कि करीब ढाई हजार किलोमीटर दूर केरल से यह गेस पेपर सीकर आया था.
नीट यूजी में हर सवाल 4 नंबर का होता है. ऐसे में करीब 150 सवालों के मैच होने का मतलब लगभग 600 अंकों के सवाल परीक्षा से पहले उपलब्ध होना माना जा रहा है. यही वजह है कि अब यह मामला केवल ‘गेस पेपर’ तक सीमित नहीं रह गया बल्कि संगठित पेपर लीक की आशंका के तौर पर देखा जा रहा है.
SOG के एडीजी विशाल बंसल ने बताया है, "जांच के दौरान करीब 410 सवालों वाला 150 पेज का एक कथित क्वेश्चन बैंक सामने आया है. शुरुआती तौर पर यह पेपर लीक का कम और किसी संगठित गिरोह का काम ज्यादा लगता है. इस गेस पेपर के जरिए धोखाधड़ी और आपराधिक गतिविधियों की हम जांच कर रहे हैं."
गेस पेपर के 120 सवाल नीट यूजी 2026 की परीक्षा में कैमिस्ट्री सेक्शन में पूछे गए सवालों से मैच हो रहे हैं. इसके अलावा फिजिक्स और बायलॉजी के भी कई सवाल हूबहू मेल खा रहे हैं. हाथ से लिखे गए इस गेस पेपर को लेकर इसलिए भी संदेह गहराया है क्योंकि नीट यूजी परीक्षा में आए पेपर और इस गेस पेपर में सिर्फ सवाल ही मैच नहीं हो रहे हैं, बल्कि उन सवालों के कॉमा और फुल स्टॉप तक हूबहू हैं.
जांच एजेंसियों की शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क की शुरुआत केरल से हुई है. केरल के एक कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे राजस्थान के चूरू जिले के रहने वाले एक छात्र ने यह गेस पेपर 2 मई की रात को वॉट्सएप के जरिए सीकर में पीजी चलाने वाले अपने पिता राकेश कुमार को भेजा था. पीजी की सभी लड़कियों को यह पेपर उपलब्ध कराने की बात कहने वाले छात्र ने यह भी दावा किया था कि कल परीक्षा में यही पेपर आएगा. राकेश ने बताया कि रात को वह पेपर नहीं देख सका मगर सुबह उसने पीजी की कुछ लड़कियों को वह पेपर दे दिया था.
नीट यूजी 2026 का पेपर समाप्त होने के बाद राकेश वह गेस पेपर लेकर एक कोचिंग इंस्टीट्यूट के शिक्षक के पास पहुंचा जहां उन्होंने उसका नीट यूजी के पेपर से मिलान किया. इस दौरान जब यह सामने आया कि 410 सवालों में से 150 सवाल हूबहू मेल खा रहे हैं तो राकेश उद्योग नगर थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंचा मगर पुलिस ने अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए उसे डांटकर भगा दिया.
इसके बाद राकेश ने परीक्षा कराने वाली एजेंसी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को मेल के जरिए इस संबंध में सूचना दी. NTA ने राजस्थान पुलिस को सूचित किया. राजस्थान के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देशों के बाद SOG ने इसकी जांच शुरू की और राकेश सहित 13 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की. वॉट्सएप, मोबाइल और अन्य शुरुआती जांच में SOG को जानकारी मिली है कि यह पेपर बहुत लोगों को भेजा गया था क्योंकि कई मोबाइल चैट्स में 'फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स' टैग मिला है.
सूत्रों का मानना है कि केरल से 2 मई को राजस्थान भेजे जाने से पहले भी यह गेस पेपर कई दिन से बाजार में घूम रहा था. परीक्षा से दो दिन पहले यह कथित गेस पेपर पांच-पांच लाख रुपए तक में बेचा गया, वहीं परीक्षा से एक रात पहले इसे 30-30 हजार रुपए में बेचा गया. हालांकि पुलिस ने अभी तक इस रकम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है मगर जांच एजेंसियां आर्थिक लेनदेन और डिजिटल ट्रेल की भी पड़ताल कर रही हैं.
सोशल मीडिया चैट, कॉल लॉग और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स की जांच की जा रही है. एजेंसियों को यह भी आशंका है कि गेस पेपर के सवाल सिर्फ ऑनलाइन ही नहीं, बल्कि प्रिंटआउट के जरिए ऑफलाइन भी बांटे गए. SOG ने पीजी संचालक को इस आधार पर जांच के दायरे में माना है कि हो सकता है उसने NTA को शिकायत भेजकर खुद को बचाने की कोशिश की हो.
NTA और SOG ने पेपर लीक जैसी आशंका से इनकार किया है. NTA की ओर से एक बयान जारी कर यह कहा गया है कि परीक्षा के दौरान कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे. प्रश्न पत्र जीपीएस ट्रैक्ड वाहनों के जरिए परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए गए थे और हर प्रश्न पत्र पर ट्रेस किए जाने वाला विशेष वॉटरमार्क लगाया गया था. नीट यूजी 2026 के सभी परीक्षा केंद्रों की निगरानी AI आधारित सीसीटीवी कैमरों से की गई थी और सभी परीक्षार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन हुआ.
परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी और परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल नेटवर्क रोकने के लिए 5जी जैमर लगाए गए थे. NTA के मुताबिक 7 मई को उन्हें कथित गड़बड़ी की जानकारी मिली, जिसके बाद 8 मई को इनपुट केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दिए गए.
इस प्रकरण में जो सबसे अहम बिंदु है वह यह कि अगर यह केवल एक गेस पेपर था, तो ऑरिजनल पेपर और इसमें इतने प्रश्नों का मिलान कैसे संभव हुआ? विशेषज्ञ मानते हैं कि देशभर में हजारों कोचिंग संस्थान और विशेषज्ञ गेस पेपर तैयार करते हैं, लेकिन किसी भी दस्तावेज से इतनी बड़ी संख्या में सवालों का मैच होना बेहद असामान्य घटना है. खासकर उस परीक्षा में जिसका एक-एक अंक लाखों छात्रों की रैंक और मेडिकल कॉलेज तय करता है.
फिलहाल जांच जारी है और पूरे देश के लाखों छात्र अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि क्या यह मामला केवल गेस पेपर तक सीमित था या वास्तव में देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की गोपनीयता में बड़ी सेंध लगी है.
पहले भी विवादों में रही है नीट परीक्षा
2013 : परीक्षा व्यवस्था और भाषा विवाद- मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने नीट यूजी व्यवस्था लागू करने पर कई राज्यों और निजी मेडिकल कॉलेजों ने विरोध किया. सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में NEET को रद्द किया था, लेकिन 2016 में फिर से लागू कर दिया गया. क्षेत्रीय भाषाओं में प्रश्नपत्र की गुणवत्ता और अनुवाद की गलतियों पर भी विवाद हुआ.
2017: तमिलनाडु में बड़ा विरोध- ग्रामीण और राज्य बोर्ड के छात्रों के साथ अन्याय की बात करते हुए तमिलनाडु में विरोध हुआ. एक छात्रा एस अनिथा की आत्महत्या के बाद परीक्षा पर राष्ट्रीय बहस छिड़ गई.
2018-2019: पेपर लीक के आरोप - कई राज्यों में फर्जी उम्मीदवार बैठाने और परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा पर सवाल उठे. NTA के संचालन की आलोचना हुई.
2020: COVID-19 के दौरान परीक्षा कराने पर विवाद - महामारी के बीच परीक्षा कराने के फैसले का विरोध हुआ. छात्रों और कई राजनीतिक दलों ने परीक्षा टालने की मांग की थी.
2021-2023: उत्तर तालिका, ग्रेस मार्क्स और तकनीकी पर विवाद- अलग-अलग वर्षों में उत्तर कुंजी की गलतियां, OMR स्कैनिंग और सर्वर समस्याओं पर विवाद हुए. कई मामलों में अदालतों तक मामला पहुंचा.
2024 : पेपर लीक विवाद- 2024 में पेपर लीक, ग्रेस मार्क्स, और असामान्य रूप से बहुत अधिक टॉपर होने पर बड़े सवाल उठे. सीबीआई ने जांच शुरू की. सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर हुईं और परीक्षा की पारदर्शिता पर राष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठे.

