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NCERT को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा : रिसर्च को नई ऊंचाई या स्वायत्तता का समझौता?

NCERT को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देकर सरकार दावा कर रही है कि रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन सवाल यह भी है कि इससे संस्था की स्वायत्तता पर कितना असर पड़ेगा

Dharmendra Pradhan
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (फाइल फोटो)
अपडेटेड 4 अप्रैल , 2026

मुख्य तौर पर पाठ्यपुस्तकें तैयार करने, शिक्षा संबंधित शोध करने और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर काम करने वाली संस्था 'राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद' (NCERT) को केंद्र सरकार ने 'डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी' का दर्जा दे दिया है. 

इस फैसले के पीछे सरकार का तर्क है कि इससे शिक्षा के विभिन्न आयामों पर गंभीर शोध को बढ़ावा मिलेगा. दूसरी तरफ, NCERT के ही कुछ लोग इसे संस्थान की स्वायत्तता से समझौते के तौर पर देख रहे हैं.

केंद्र सरकार द्वारा 30 मार्च 2026 को जारी अधिसूचना के मुताबिक, NCERT अब 'डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी' होगी. देश की स्कूली शिक्षा की रीढ़ मानी जाने वाली यह संस्था अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के दायरे में आएगी. इसके बाद यह ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी जैसी डिग्रियां देने के साथ-साथ शोध कार्यक्रम भी चला सकेगी. शिक्षा मंत्रालय की अधिसूचना में NCERT के अलावा अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूरु और शिलांग स्थित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थानों (RIE) और भोपाल के पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान को भी इस 'विशिष्ट श्रेणी' में शामिल किया गया है.

केंद्र सरकार के इस फैसले को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की दिशा में एक बड़ा कदम बताया जा रहा है. लेकिन खुद NCERT के भीतर इस फैसले के हवाले से संस्थान की स्वायत्तता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. संस्थान के कुछ शिक्षक इसे UGC के आगे आत्मसमर्पण मान रहे हैं. वहीं केंद्र सरकार का दावा है कि इससे स्कूली शिक्षा के शोध को मजबूती मिलेगी और शिक्षकों के प्रशिक्षण को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने में मदद मिलेगी. इसके विपरीत, आलोचक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि इससे पाठ्यपुस्तक निर्माण और स्कूली पाठ्यक्रम निर्धारण जैसे NCERT के मूल काम कमजोर पड़ सकते हैं.

1961 में स्थापित NCERT की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में काफी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत स्वायत्त संस्था के तौर पर काम करने वाली यह संस्था स्कूली पाठ्यक्रम तैयार करने, गुणवत्तापूर्ण और सस्ती पाठ्यपुस्तकें प्रकाशित करने, शिक्षकों को प्रशिक्षण देने और शिक्षा संबंधी शोध करने का प्रमुख केंद्र रही है. इसके छह क्षेत्रीय संस्थान शिक्षक प्रशिक्षण और स्थानीय जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

पिछले छह दशकों में NCERT ने न सिर्फ राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे (NCF) तैयार किए, बल्कि राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (NAS) जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता का आकलन भी किया. लेकिन अब तक संस्थान के पास डिग्री देने की शक्ति नहीं थी. इसके क्षेत्रीय संस्थानों को नए कोर्स शुरू करने के लिए संबंधित विश्वविद्यालयों की मंजूरी लेनी पड़ती थी. अब डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने से यह बाधा दूर हो गई है.

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 2023 में ही NCERT को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देने के प्रस्ताव की घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि NCERT को शोध-उन्मुख संस्थान बनाकर वैश्विक शिक्षा व्यवस्था में भारत की भागीदारी बढ़ाई जाएगी. अधिसूचना के अनुसार, अब NCERT जरूरी कदम उठाकर शोध कार्यक्रम, डॉक्टरल और नए शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू करेगा.

संस्थान अब UGC के दिशानिर्देशों के तहत स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी और डिप्लोमा कोर्स चला सकेगा. सरकार के अनुसार, यह बदलाव NEP 2020 के विजन से जुड़ा है. इसमें स्कूली और उच्च शिक्षा के बीच के अंतर को कम करने, शिक्षकों के प्रशिक्षण को मजबूत करने और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है. अब NCERT न सिर्फ पाठ्यपुस्तकें तैयार करेगा, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में पीएचडी शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन भी कर सकेगा. माना जा रहा है कि इससे शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिक व्यावहारिक और शोध-आधारित होंगे.

हालांकि, यह फैसला NCERT के भीतर पहले से चले आ रहे विवाद को फिर से जिंदा कर रहा है. NCERT के कई वरिष्ठ लोग अनौपचारिक बातचीत में बता रहे हैं कि डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा हासिल करके परिषद अपनी शैक्षणिक स्वायत्तता UGC को सौंप रही है. उनका तर्क है कि इससे NCERT देश की स्कूली शिक्षा की प्रमुख संस्था के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान खो देगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि UGC के सख्त नियम संस्थान की मूल स्वतंत्रता को सीमित कर देंगे. अब NCERT को पाठ्यक्रम मानकों, फीस संरचना, प्रवेश प्रक्रिया और परीक्षा प्रणाली जैसे मामलों में UGC के नियमों के दायरे में रहकर काम करना होगा. अब तक NCERT शिक्षा मंत्रालय के तहत एक स्वतंत्र स्वायत्त संस्था के तौर पर काम करता रहा है. यहाँ के लोगों की एक चिंता यह भी है कि इससे संस्थान 'ब्यूरोक्रेटिक' यानी नौकरशाही के चंगुल में फंस जाएगा. NCERT के एक अधिकारी ने बताया कि यदि शोध पर बहुत अधिक जोर दिया गया, तो पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता और उनका समयबद्ध प्रकाशन प्रभावित हो सकता है.

NCERT के एक पूर्व निदेशक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि संस्थान की असली ताकत उसकी स्वायत्तता थी और अब UGC के साथ समन्वय बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा. हालांकि, वर्तमान निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने केंद्र सरकार के इस निर्णय को सकारात्मक और भविष्योन्मुखी बताया है.

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