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वेनेजुएला की नेता मचादो ने ट्रंप को दिया अपना नोबेल! क्या विजेता दूसरे को दे सकता है यह पुरस्कार?

अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद वेनेजुएला की विपक्ष की नेता मरिया कोरिना मचादो ने कहा कि उन्होंने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल भेंट किया है

मरिया कोरिना मचादो के साथ हाथ में नोबेल लिए डोनाल्ड ट्रंप
मरिया कोरिना मचादो के साथ हाथ में नोबेल लिए डोनाल्ड ट्रंप
अपडेटेड 16 जनवरी , 2026

15 जनवरी को व्हाइट हाउस में वेनेजुएला की विपक्षी नेता मरिया कोरिना मचादो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की. इसके बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए मचादो ने कहा कि उन्होंने अपना नोबेल शांति पुरस्कार मेडल ट्रंप को भेंट किया है.

इसके अलावा मचादो ने वहां मौजूद लोगों और पत्रकारों को इस संबंध में कोई दूसरी जानकारी नहीं दी. इस मामले में व्हाइट हाउस ने भी यह नहीं बताया कि ट्रंप ने मेडल स्वीकार किया या नहीं किया है. हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब किसी विजेता ने अपना नोबेल दूसरे को दिया हो.

आमतौर पर हम ये जानते हैं कि नोबेल शांति पुरस्कार दुनिया में सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक है, लेकिन इतिहास देखने पर पता चलता है कि इस नोबेल की कहानी अक्सर संघर्ष और दुनिया की बदलती राजनीति के आधार पर आकार लेती है.

एक वियतनामी राजनयिक के इस पुरस्कार को अस्वीकार करने से लेकर एडॉल्फ हिटलर के नाम नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन तक, दुनिया के इस सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार का एक लंबा और विवादास्पद इतिहास रहा है. एक बार फिर मचादो के इस फैसले से यह सवाल उठने लगा है कि क्या नोबेल पुरस्कार विजेता इसे किसी दूसरे को दे सकता है?

क्या वाकई इसे दूसरे के नाम ट्रांसफर किया जा सकता है, क्या इससे पहले भी ऐसा हुआ है? इन सवालों के जवाब जानने से पहले नोबेल शांति पुरस्कार के बारे में जानते हैं :

नोबेल शांति पुरस्कार क्या है?

यह पुरस्कार वैज्ञानिक और इन्वेंटर अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल की वसीयत के आधार पर दिया जाता है. इसीलिए इस पुरस्कार का नाम भी उनके ही नाम पर रखा गया है. नोबेल पुरस्कारों की स्थापना 1895 में हुई थी और पुरस्कार 1901 में मिला.

1901 से 2024 तक साहित्य, शांति और विज्ञान से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में सैकड़ों लोगों को सम्मानित किया जा चुका है. शुरुआत में केवल फिजिक्स, मेडिसिन, केमिस्ट्री, साहित्य और शांति के क्षेत्र में ही नोबेल दिया जाता था. बाद में इकोनॉमिक्स के क्षेत्र में भी नोबेल दिया जाने लगा.

नोबेल शांति पुरस्कार को अक्सर सभी नोबेल पुरस्कारों में सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार माना जाता है, जो उन लोगों को दिया जाता है, जिन्होंने संघर्षों से भरी दुनिया में शांति या मानव जाति को लाभ पहुंचाने के लिए कुछ बड़ा किया हो.

पुरस्कार विजेता को लैटिन भाषा में अंकित 18 कैरेट सोने का पदक प्रदान किया जाता है. इसके अलावा एक सर्टिफिकेट और 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना (1.8 मिलियन डॉलर) का चेक प्राप्त होता है. नॉर्वे की नोबेल समिति की सदस्य एस्ले तोजे ने 2022 में बताया था, "नोबेल शांति पुरस्कार थोड़ा अलग है क्योंकि इसमें अच्छे कर्म, अच्छा इंसान होने के साथ ही साथ मानवता के कल्याण के लिए अच्छा काम करना प्राथमिकता है."

क्या नोबेल शांति पुरस्कार को रद्द करना या साझा करना संभव है?

नॉर्वे के नोबेल संस्थान ने अपने एक बयान में कहा है, "एक बार नोबेल पुरस्कार की घोषणा हो जाने के बाद, इसे रद्द नहीं किया जा सकता, साझा नहीं किया जा सकता या दूसरों को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता."

यह निर्णय अंतिम है और हमेशा के लिए मान्य रहेगा. संस्थान के निदेशक ओलाव न्जोल्स्टैड के मुताबिक, न तो अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत में और न ही नोबेल फाउंडेशन के नियमों में ऐसी किसी संभावना का जिक्र है.

उन्होंने पहले दिए गए एक बयान में यह भी कहा था कि स्टॉकहोम और ओस्लो में पुरस्कार देने वाली किसी भी समिति ने पुरस्कार दिए जाने के बाद उसे वापस लेने पर कभी विचार नहीं किया.

उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए था क्योंकि इसको लेकर नियम-कानून स्पष्ट हैं. पुरस्कार देने वाली संस्था के जरिए पुरस्कार दिए जाने को लेकर लिए गए फैसले के खिलाफ भी कोई अपील नहीं की जा सकती.

अगर नोबेल ट्रांसफर नहीं हो सकता, तो मचादो ने किस आधार पर ट्रंप को अपना नोबेल दिया?

ट्रंप के साथ मचादो की मुलाकात से पहले नोबेल संस्थान ने X पर पोस्ट कर बताया था कि एक पदक के मालिक बदल सकते हैं, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार विजेता की उपाधि नहीं बदल सकती. इसका मतलब यह हुआ कि मचादो चाहें तो अपना मेडल फिजिकली ट्रंप को भेंट कर सकती हैं, लेकिन नोबेल संस्थान की ओर से यह उपाधि मचादो के ही नाम रहेगी.

क्या कोई नोबेल शांति पुरस्कार को ठुकरा सकता है?

हां, लेकिन इसे अस्वीकार करने से निर्णय रद्द नहीं हो जाता. केवल एक ही नोबेल शांति पुरस्कार विजेता ने इस पुरस्कार को सिरे से अस्वीकार किया है, जो वियतनामी राजनयिक 'ले डुक थो' थे.

1973 में वियतनाम युद्ध को समाप्त करने के मकसद से युद्धविराम वार्ता करने के लिए उन्हें तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर के साथ संयुक्त रूप से पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

नोबेल पुरस्कार की वेबसाइट के मुताबिक, वियतनामी नेता थो ने यह कहते हुए पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया कि युद्धविराम का उल्लंघन हुआ था और युद्ध पुरस्कार की घोषणा के वक्त भी जारी था. हालांकि, किसिंजर ने पुरस्कार स्वीकार कर लिया, लेकिन समारोह में शामिल नहीं हुए. बाद में इसे लौटाने का उनका प्रयास भी असफल रहा.

इसके अलावा, एक अन्य व्यक्ति ऐसे हैं, जिसने स्वेच्छा से किसी भी श्रेणी में नोबेल पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया था. इस व्यक्ति का नाम था ज्यां-पॉल सार्त्र. वे फ्रांसीसी दार्शनिक और लेखक थे. उन्होंने 1964 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि वे संस्थागत किसी उपहार को नहीं लेना चाहते. 

क्या कभी किसी नोबेल विजेता को उसके देश की सरकार ने नोबेल लेने से रोका है?

हां, ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें विजेताओं को अपने नोबेल पुरस्कार लेने से रोक दिया गया. जर्मन शांतिवादी कार्ल वॉन ओसिएत्ज़की के नाम की घोषणा 1935 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए हुई थी. इसके बाद ही  एडॉल्फ हिटलर ने सभी जर्मनों के नोबेल पुरस्कार स्वीकार करने पर प्रतिबंध लगा दिया था.

गंभीर रूप से बीमार होने के बावजूद ओसिएत्ज़की पुरस्कार लेने नॉर्वे जाना चाहते थे, लेकिन सरकार ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी. नाज़ी शासन के तहत कई अन्य जर्मन वैज्ञानिकों - रिचर्ड कुह्न, एडॉल्फ बुटेनंड्ट और गेरहार्ड डोमागक को भी रसायन विज्ञान और चिकित्सा में नोबेल पुरस्कार ठुकराने के लिए मजबूर किया गया था.

क्या किसी और विजेता ने भी अपना नोबेल पुरस्कार दूसरे को दिया है?

मचादो से पहले अमेरिकी लेखक अर्नेस्ट हेमिंग्वे ने भी 1954 में अपना साहित्य का नोबेल पुरस्कार दान किया था. उन्होंने यह पुरस्कार कहानी कहने की कला में अपनी महारत के लिए जीता था. उन्हें यह पुरस्कार उनके उपन्यास 'द ओल्ड मैन एंड सी' के लिए मिला था, जिसमें एक विशाल मछली पकड़ने वाले क्यूबा के मछुआरे की कहानी है.

खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए, हेमिंग्वे समारोह के लिए स्वीडन नहीं गए. इसके बजाय, क्यूबा में स्वीडिश राजदूत ने हवाना के पास स्थित उनके घर में उन्हें पदक देकर सम्मानित किया. हेमिंग्वे ने बाद में पदक और डिप्लोमा क्यूबा के लोगों को दान कर दिया और उन्हें एल कोबरे स्थित कैथोलिक चर्च की देखरेख में सौंप दिया. उन्होंने कथित तौर पर कहा था, "यह पुरस्कार क्यूबा के लोगों का है क्योंकि मेरी रचनाएं क्यूबा स्थित एक गांव कोजिमार पर आधारित थी. वहीं की फिजाओं पर मैंने कल्पना कर यह कहानी लिखी थी."  हालांकि, यह पदक चोरी हो गया था और बाद में 1986 में इसे बरामद किया गया.

रूसी पत्रकार दिमित्री मुराटोव ने अपने 2021 के नोबेल शांति पुरस्कार पदक को यूक्रेन युद्ध के शरणार्थियों, खासकर बच्चों की मदद के लिए नीलाम किया था और यह नीलामी रिकॉर्ड 103.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर में हुई थी. इसके सभी पैसे UNICEF को दान कर दिए गए थे.

मचादो ने क्यों कहा कि वॉशिंगटन के उत्तराधिकारी को मेडल लौटाया?

मचादो ने ट्रंप को अपना पुरस्कार सौंपते हुए 1825 में अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के हीरो मार्क्विस डे लाफायेट का उदाहरण दिया है. मचादो ने कहा है कि 200 साल पहले मार्क्विस डे लाफायेट को जॉर्ज वॉशिंगटन की तस्वीर वाला एक प्रतिष्ठित मेडल मिला था, उन्होंने इस मेडल को वेनेजुएला के नेता साइमन बोलिवर को दिया था.

अमेरिकी लाफायेट की इस कोशिश को तब अमेरिका और वेनेजुएला के बीच स्वतंत्रता की लड़ाई में भाईचारे का प्रतीक माना गया था. अब बोलिवर के लोगों ने वॉशिंगटन के उत्तराधिकारी यानी डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल मेडल लौटाया है. इस तरह इतिहास की कहानी के जरिए मचादो ने ट्रंप को यह पुरस्कार सौंपकर अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्तों को बेहतर करने की कोशिश की है.

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