आज से करीब 18 वर्ष पहले पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने अरब सागर के रास्ते मुंबई में घुसकर 26/11 के भयानक हमलों को अंजाम दिया था. अब ताजा खुफिया जानकारी से पता चलता है कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) एक बार फिर समुद्री मार्ग से बड़े आतंकी ऑपरेशन की तैयारी में जुटा है.
पाकिस्तान और PoK के विभिन्न स्थानों पर करीब 5,000 से अधिक युवाओं को पानी में तैराकी, स्कूबा डाइविंग और समुद्री अभियानों से जुड़े विशेष प्रशिक्षण दिए जाने की रिपोर्ट्स सामने आई हैं, जिससे भारतीय सुरक्षा एजेंसियां गहरी चिंता में हैं.
खुफिया सूत्रों के अनुसार, इनमें से लगभग 300 युवाओं को LeT के आतंकी कैडर में शामिल कर लिया गया है. सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह सब खुलेआम और संगठित तरीके से किया जा रहा है, जिसमें बड़े स्विमिंग पूल, नदियां, नहरें, झीलें और तटीय इलाकों का इस्तेमाल हो रहा है.
खुफिया एजेंसियों के हाथ एक वीडियो लगा है, जिसमें कथित तौर पर LeT के वरिष्ठ पदाधिकारी हारिस डार को जल-आधारित प्रशिक्षण अभ्यासों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हुए देखा जा सकता है. फुटेज में LeT के एक कथित कमांडर खुले तौर पर एक समर्पित 'समुद्री फोर्स' बनाए जाने की बात स्वीकार कर रहा है.
वीडियो में यह भी कहा गया है कि यह पूरा अभियान LeT और उसके सहयोगी संगठनों के जरिए संचालित किया जा रहा है. भारतीय सुरक्षा अधिकारी इस वीडियो को आतंकी भर्ती, कट्टर विचारधारा के प्रसार और सुनियोजित प्रशिक्षण का ठोस सबूत मान रहे हैं.
खुफिया एजेंसियों के विश्लेषण और मीडिया कवरेज के मुताबिक, LeT की समुद्री शाखा की गतिविधियां पाकिस्तान और PoK के कई स्थानों पर फैली हुई हैं, जो अलग-अलग जगहों पर होने के बावजूद संगठित ढांचे की ओर इशारा करती हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्लामाबाद, मुरीदके, लाहौर, बहावलपुर, कसूर, अलीपुर, कराची, मीरपुर (मंगला बांध के पास) और मुजफ्फरबाद में प्रशिक्षण शिविर और उनके पढ़ाई के लिए क्लासेस चलाए जा रहे हैं. पाकिस्तान के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में स्थित इन केंद्रों पर युवाओं को जिस तरह से प्रशिक्षण दिया जा रहा है, उससे साफ है कि उन्हें अलग-अलग जलीय वातावरणों (जैसे नदियां, बांध, समुद्री तट आदि) से परिचित कराया जा रहा है.
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि इस कार्यक्रम की देखरेख की जिम्मेदारी रिजवान हनीफ और अमीर जिया सहित LeT के वरिष्ठ कमांडरों को सौंपी गई है. खुफिया एजेंसियों को प्राप्त जानकारी के मुताबिक, जल-केंद्रित प्रशिक्षण मॉड्यूल में शामिल युवाओं में से लगभग 300 को वैचारिक जांच (Ideological Screening) और हथियार प्रशिक्षण के बाद LeT के कैडर में शामिल कर लिया गया है.
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि ऐसी भर्ती प्रक्रिया के जरिए LeT एक बड़ा प्रशिक्षित समुद्री लड़ाकों का समूह तैयार कर सकता है. संभव है कि भविष्य में इनमें से कुछ को आतंकी अभियानों में तैनात किया जाए. LeT के जरिए समुद्री गतिविधियों पर नए सिरे से जोर देने से स्वाभाविक रूप से नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों की याद ताजा हो जाती है.
उस घटना में आतंकी संगठन के 10 सदस्यों ने एक भारतीय मछली पकड़ने वाले जहाज का अपहरण किया था, जिसकी मदद से वे समुद्र के रास्ते भारत पहुंचे थे. मुंबई में उतरने के बाद इन आतंकियों ने चार दिनों तक शहर के कई प्रमुख स्थलों पर एक साथ हमले किए, जिसमें सैकड़ों निर्दोष लोग मारे गए थे.
भारत के इतिहास के सबसे भयावह हमलों में गिने जाने वाले 26/11 हमलों में 166 लोग मारे गए और 300 से अधिक घायल हुए. 10 में से 9 आतंकवादियों को भारतीय सुरक्षाकर्मियों ने मार गिराया. अजमल कसाब एकमात्र ऐसा आतंकवादी था, जिसे जिंदा पकड़ा गया. बाद में उसके खिलाफ मुकदमा चला, जिसमें वह दोषी साबित हुआ और उसे फांसी दे दी गई.
रिपोर्ट के अनुसार, LeT के चल रहे समुद्री प्रशिक्षण में तैराकी, स्कूबा डाइविंग, पानी के भीतर युद्धाभ्यास, तेज गति वाली मोटरबोट चलाना और आक्रमण रणनीतियां शामिल हैं. यह सब घुसपैठ और शहरी हमलों के लिए छोटी, फुर्तीली हमलावर टीमों के निर्माण की ओर इशारा करता है.
एक ओर पाकिस्तान की सेना डूरंड रेखा (अफगानिस्तान के साथ सीमा) पर बढ़ती अस्थिरता और उसके पश्चिमी प्रांतों में राज्य-विरोधी उग्रवादियों से तेज हो रहे हमलों से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर भारत को निशाना बनाने वाले पाकिस्तानी प्रॉक्सी समूह समुद्री मोर्चे पर घुसपैठ की तैयारी में लगे हुए हैं. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए इन तैयारियों को नजरअंदाज करना आसान नहीं है.
ऐसा इसलिए क्योंकि नियंत्रण रेखा (LoC) के साथ भूमि घुसपैठ के मार्गों को भारतीय सुरक्षा बलों के जरिए मजबूती से सुरक्षित किया गया है, जिससे समुद्र ही घुसपैठ का एक प्रमुख वैकल्पिक रास्ता बच जाता है. हालांकि, इसमें कोई दो राय नहीं कि समुद्री मार्गों की व्यापक और निरंतर निगरानी करना आसान नहीं है.
26/11 मुंबई हमलों के बाद तटीय निगरानी, रडार कवरेज और समुद्री क्षेत्र जागरूकता में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं. इसके बावजूद, भारत की 11,098 किलोमीटर लंबी समुद्री सीमा कई राज्यों से जुड़ी हुई है, जहां काफी अधिक नागरिक समुद्री यातायात होता है.
इन क्षेत्रों में बारीकी से निगरानी रखना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण बना रहता है. LeT के जरिए एक संगठित समुद्री शाखा का निर्माण यह संकेत देता है कि भले ही पाकिस्तान पर भू-राजनीतिक दबाव पश्चिमी सीमा की ओर बढ़ रहे हों, लेकिन वहां का भारत-विरोधी उग्रवाद का ढांचा रणनीतिक रूप से अब भ अवसरवादी बना हुआ है.

