scorecardresearch

जापान की 'चाइना प्लस वन' नीति में भारत कैसे बन सकता है 'बेहतर विकल्प'

रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ सुजान आर. चिनॉय ने India Today Indo-Japan Conclave में इस बात पर जोर दिया कि जब टोक्यो बीजिंग पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है तब नई दिल्ली के सामने एक बड़ा अवसर है.

India Today Indo-Japan Conclave में सुजान चिनॉय (फोटो : अरुण कुमार)
अपडेटेड 30 मई , 2026

मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (MP-IDSA) के महानिदेशक और जापान में भारत के पूर्व राजदूत सुजान आर. चिनॉय ने भारत-जापान संबंधों को और मजबूत करने की वकालत की है. उनका कहना है कि भारत के आर्थिक शक्ति के रूप में उभरने, चीन की बढ़ती आर्थिक-सैन्य ताकत और उसकी भू-राजनीतिक मुखरता जैसे कारकों ने द्विपक्षीय संबंधों को नई गति दी है.

चिनॉय 22 मई को नई दिल्ली में आयोजित India Today Indo-Japan Conclave के तीसरे संस्करण में ‘Bilateral Boost: India-Japan in an Uncertain World Order’  सत्र को संबोधित कर रहे थे.

चिनॉय ने कहा कि भारत की आजादी के शुरुआती दशकों में जापान, भारत को पश्चिमी देशों के साथ अपने गठबंधनों और साझेदारियों के नजरिए से देखता था, "इससे हमारे ऐतिहासिक संबंधों के बावजूद उस तरह की सहभागिता पर कुछ सीमाएं लग गईं."
फिर द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने वाला कारक क्या था? चिनॉय ने कहा कि भारत का आर्थिक उत्थान और जापान के लिए एक आकर्षक आर्थिक गंतव्य के रूप में उसका उभरना इसका प्रमुख कारण था. भारत के अमेरिका और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) के अन्य देशों के साथ करीबी संबंध भी एक महत्वपूर्ण पहलू थे. चिनॉय ने कहा, "जापान के लिए यह अपने आप में एक मानक बन जाता है. जापान पश्चिमी देशों, खासकर OECD के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है." उन्होंने कहा कि जापान का कारोबारी ढांचा भी इन्हीं मानकों से जुड़ा है.

पूर्वी और दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय दावों के साथ चीन की अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति में आई तेजी ने जापान को ‘कुछ अधिक असुरक्षित और संवेदनशील’ महसूस कराया है. इससे वह समान सोच वाले साझेदारों की ओर अधिक झुका है ताकि अपने भविष्य के लिए बेहतर माहौल तैयार कर सके. जापान ASEAN (एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशंस) के साथ भी रक्षा और सुरक्षा साझेदारियों का विस्तार कर रहा है.

चिनॉन ने कहा, "टोक्यो और नई दिल्ली में इस बात की समझ भी बढ़ी है कि एकतरफावाद, महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं के एकाधिकारवादी नियंत्रण और आर्थिक गतिविधियों के लिए किसी एक भौगोलिक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता से पैदा होने वाले जोखिमों के खिलाफ क्षेत्रीय सहमति बनाना जरूरी है."

चिनॉय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी जापानी समकक्ष सानाए ताकाइची की द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य को लेकर व्यक्तिगत प्रतिबद्धता है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत और जापान के बीच कोई विवादास्पद मुद्दा नहीं है.

अमेरिका द्वारा एकतरफा व्यापार शुल्क लगाए जाने और उसके गठबंधन सहयोगियों के खिलाफ दिए गए बयानों ने टोक्यो के इस संकल्प को और मजबूत किया है कि वह भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ समावेशी संबंध बनाकर अन्य विकल्पों को भी अधिकतम रूप से विकसित करे. यह भारत और जापान की तीनों सेनाओं के संयुक्त अभ्यास, 2+2 मंत्रीस्तरीय संवाद और 2025 में हुए सुरक्षा सहयोग संबंधी संयुक्त घोषणा-पत्र जैसे उदाहरणों में दिखाई देता है. चिनॉय ने कहा, "ये सभी हमारी साझेदारी की आधारशिला बन गए हैं. इनके केंद्र में महत्वपूर्ण खनिजों, आपूर्ति शृंखलाओं और औद्योगिक सहयोग से जुड़ा उच्च-प्रौद्योगिकी सहयोग भी है."

चिनॉय ने कहा कि जापान और चीन के संबंध एक आयामी नहीं हैं. सेनकाकू द्वीपों को लेकर क्षेत्रीय विवादों के बावजूद दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी बनी हुई है. जापान की प्रमुख आपूर्ति शृंखलाएं, विनिर्माण गतिविधियां, विपणन नेटवर्क और दुनिया के बाकी हिस्सों के लिए उसका (हब एंड स्पोक) ढांचा चीन से संचालित होता है. उनके मुताबिक, "लेकिन यह समझ भी है कि किसी एक भौगोलिक क्षेत्र पर निर्भरता उसके भविष्य के लिए अनुकूल नहीं है." 

इसीलिए टोक्यो लंबे समय से 'चाइना प्लस वन' नीति की बात कर रहा है, ताकि बीजिंग पर अपनी निर्भरता कम कर सके. हालांकि यह 'प्लस वन' केवल एक देश तक सीमित नहीं है. भारत जापान का वह प्रमुख साझेदार बनने की आकांक्षा रख सकता है. भारत और जापान के बीच फैले भौगोलिक क्षेत्र में वियतनाम, थाईलैंड और ताइवान जैसे कई खिलाड़ी हैं, जो उन निवेशों के लिए भारत से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं जो चीन से निकलकर वैकल्पिक स्थानों की ओर जाना चाहते हैं.

चिनॉय ने कहा, "हमें यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी कि जापान को भारत में बेहतर विकल्प मिले." भारत बेहतर विकल्प है क्योंकि प्रतिस्पर्धा में शामिल अन्य देश आर्थिक गतिविधियों की पूरी श्रृंखला उपलब्ध नहीं कराते. इस बात का हवाला देते हुए चिनॉय ने कहा कि द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी में तेजी आई है और आज संचयी निवेश के लिहाज से जापान भारत के सबसे बड़े निवेशकों में से एक है.

चिनॉय की खास बातें :

  • "स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि वे चाहते हैं कि भारत का हर युवा कम से कम एक बार जापान जाए और अपनी आंखों से देखे कि जापान क्या कर सकता है."
  • "भारत और जापान के बीच एक महान सभ्यतागत संबंध है. हम बौद्ध धर्म और सात भाग्यशाली देवताओं के माध्यम से अपने संबंधों का उत्सव मनाते हैं. दुनिया में कोई दूसरा देश नहीं है जहां गणेश, शिव, सरस्वती और लक्ष्मी इतने व्यापक रूप से पूजे जाते हों और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा हों."
  • "जब जापान देखता है कि दुनिया के बाकी देश भारत के साथ अधिक घनिष्ठ संबंध बना रहे हैं, तो स्वाभाविक रूप से उसके भीतर भी वैसी ही भावना पैदा होती है."
  • "भारत में जापान एक प्रतिष्ठित ब्रांड है. देश के हर हिस्से में उसका स्वागत होता है. वह गुणवत्ता, भरोसे और विश्वसनीयता का प्रतीक है."
  • "हमें यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए कि चाइना-प्लस नीति का झुकाव लगातार भारत की ओर बढ़े."
Advertisement
Advertisement