भारत में जापान के राजदूत ओनो केइची ने 10 ट्रिलियन येन के निवेश का संकेत दिया है. 22 मई को उन्होंने कहा कि दोनों देश अब केवल एक दूसरे के लिए अच्छे शब्दों और सिद्धांतों पर ही सहमत नहीं हैं बल्कि उसे ठोस रूप देने की दिशा में काम भी कर रहे हैं.
राजदूत ओनो केइची ‘India Today Indo-Japan Conclave’ में शामिल होने के लिए आए थे. इस कार्यक्रम में ‘The New Growth Corridor’ सत्र के दौरान इंडिया टुडे ग्रुप के एडिटोरियल डायरेक्टर (पब्लिशिंग) राज चेंगप्पा से बात करते हुए उन्होंने ये बातें कही हैं.
इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए देश और विदेश के कई राजनयिक, नीति-निर्माता, राजनीतिज्ञ और उद्योग जगत के लोग पहुंचे थे. दिल्ली के उप-राज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने इसी मंच से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को एक सामान्य मेट्रो शहर से महानगर (Metropolis) में बदलने का महत्वाकांक्षी विजन रखा.
राजदूत ओनो केइची ने भारत-जापान संबंध को टोक्यो की नई Free and Open Indo-Pacific रणनीति का हिस्सा बताया है. उन्होंने इससे जुड़े कुछ बड़े आंकड़े भी साझा किए. उन्होंने कहा कि भारत पिछले चार साल से लगातार जापानी कंपनियों के लिए निवेश की सबसे पसंदीदा जगह बना हुआ है. साथ ही दोनों देशों ने जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन (लगभग 68 अरब डॉलर) के नए निजी निवेश का लक्ष्य रखा है जो पहले के लक्ष्य से दोगुना है.
राजदूत ने जोर देकर कहा कि भारत-जापान की द्विपक्षीय साझेदारी अब बयानबाजी से आगे निकल चुकी है. उन्होंने कहा, “हम अब एक-दूसरे के लिए सिर्फ खूबसूरत शब्दों का इस्तेमाल करने और सिद्धांतों पर सहमति जताने से आगे बढ़ चुके हैं. अब हम दोनों देशों के निजी क्षेत्रों के बीच ठोस सहयोग करने की दिशा में काम कर रहे हैं.”
ओनो केइची ने जापान-भारत आर्थिक सुरक्षा पहल का हवाला देते हुए इसके पांच प्रमुख क्षेत्र बताए- सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और फार्मास्यूटिकल्स. ओनो ने यह भी कहा कि जापानी कंपनियां गुजरात के धोलेरा और असम के जागीर रोड में सेमीकंडक्टर पार्कों का निर्माण कर रही हैं. साथ ही, उन्होंने कहा कि क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक 26 मई को नई दिल्ली में होने वाली है.
तरनजीत सिंह संधू ने पिछली उपलब्धियों से आगे बढ़कर भविष्य की महत्वाकांक्षा पर जोर दिया. उन्होंने कहा, “हम मेट्रो शहर से महानगर (Metropolis) की ओर कैसे बढ़ें? महानगर की पहचान सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर से नहीं होती, बल्कि दक्षता, स्थिरता, नवाचार और जीवन की गुणवत्ता से होती है.”
उप-राज्यपाल ने इस विजन के केंद्र में द्वारका को रखा है. उन्होंने कहा, “ एक आवासीय से आगे द्वारका को नॉलेज बेस्ड इंडस्ट्री, इनोवेशन सेंटर और ग्लोबल पार्टनरशिप का हब बनाया जा सकता है. यह जापानी कंपनियों के लिए क्षेत्रीय मुख्यालय, रिसर्च सेंटर और टेक्नोलॉजी हब स्थापित करने की प्रमुख जगह बन सकता है.”
उप-राज्यपाल ने कहा कि यही वह बदलाव है जिसकी हमें कोशिश करनी चाहिए- अलग-अलग प्रोजेक्ट्स से आगे बढ़कर एक ऐसे डेवलपमेंट की ओर बढ़ना चाहिए, जिसमें सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने को प्रमुखता नहीं दी जाए. इससे आगे बढ़कर पूरा इकोसिस्टम बनाने की ओर ध्यान दिया जाए.

