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भारतीय नौसेना कैसे बदल रही अपनी 'खरीदार' वाली छवि?

भारतीय नौसेना में हाल ही में शामिल किए गए युद्धपोतों - INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय का डिजाइन और निर्माण भारत में ही हुआ है

INS संशोधक समेत तीन युद्धपोत नौसेना में शामिल
INS संशोधक समेत तीन युद्धपोत नौसेना में शामिल
अपडेटेड 23 जून , 2026

21 जून को स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित तीन युद्धपोत- INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल हुए. इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पहुंचे थे.

नौसेना में इन तीनों युद्धपोतों का कमीशन होना इस बात का संकेत है कि कभी विदेशी शिपयार्ड और तकनीक पर निर्भर रहने वाली भारतीय नौसेना आज देश के स्वदेशी रक्षा विनिर्माण तंत्र की प्रमुख ताकत बन चुकी है. उसके अधिकांश युद्धपोत अब देश में ही डिजाइन और निर्मित किए जा रहे हैं.

समारोह को संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने 21वीं सदी में समुद्री शक्ति के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा, “मजबूत समुद्री क्षमताओं के बिना कोई भी देश बड़ी शक्ति नहीं बन सकता. विकास, सुरक्षा और समृद्धि महासागरों से गहराई से जुड़े हैं."

पीएम मोदी ने आगे कहा, "दुनिया का अधिकांश व्यापार समुद्री मार्गों से होता है जबकि वैश्विक डेटा नेटवर्क का बड़ा हिस्सा समुद्र के नीचे संचालित होता है." प्रधानमंत्री ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिज, गहरे समुद्र में मौजूद संसाधन और भविष्य के ऊर्जा स्रोत आने वाले समय में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करेंगे. ऐसे में समुद्री क्षमता आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव का अहम आधार बनेगी.

नौसेना का यह बदलाव उसके भीतर विकसित मजबूत संस्थागत ढांचे के कारण संभव हुआ है. वेपन एंड इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स इंजीनियरिंग एस्टैब्लिशमेंट (WESEE), एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसल प्रोजेक्ट (ATVP), निदेशालय स्वदेशीकरण, वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) और डायरेक्टरेट ऑफ शिप प्रोडक्शन (DSP) जैसी संस्थाओं ने डिजाइन, निर्माण, हथियार एकीकरण और रखरखाव तक पूरी स्वदेशी क्षमता विकसित की है.

इनके प्रयासों से भारत विदेशी प्लेटफॉर्म के लाइसेंस-आधारित निर्माण से आगे बढ़कर स्वदेशी सेंसर, हथियार और युद्ध प्रबंधन प्रणालियों से लैस आधुनिक युद्धपोत विकसित करने में सक्षम हुआ है.

आंकड़े भी इस बदलाव की तस्वीर दिखाते हैं. भारतीय नौसेना के पास 130 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियां हैं, जबकि लगभग 50 जहाज भारतीय शिपयार्ड में निर्माणाधीन हैं. यह देश का अब तक का सबसे बड़ा स्वदेशी जहाज निर्माण अभियान है. इनमें से अधिकांश जहाजों में 75 से 80 फीसद से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हो रहा है, जिससे सैकड़ों MSME और हजारों कुशल कामगार जुड़े हैं.

नौसेना 2030 तक अपने बेड़े को 155-160 युद्धपोतों और 2030 के दशक के मध्य तक 175-200 जहाजों को बढ़ाने की योजना बना रही है. इस विस्तार का अधिकांश हिस्सा घरेलू शिपयार्ड ही पूरा करेंगे. कोलकाता में शामिल किए गए तीनों जहाज इस यात्रा का प्रतिनिधित्व करते हैं.

प्रोजेक्ट 17A का स्टेल्थ फ्रिगेट INS दूनागिरी उन्नत मिसाइल, रडार और पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणालियों से लैस अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत बनाने की भारत की क्षमता दिखाता है. INS संशोधक विशेष हाइड्रोग्राफिक और समुद्र विज्ञान जहाजों के निर्माण में स्वदेशी विशेषज्ञता को दर्शाता है जबकि INS अग्रय पनडुब्बी रोधी युद्ध और तटीय सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करता है. ये तीनों जहाज मिलकर भारत के आत्मनिर्भर समुद्री औद्योगिक तंत्र की तस्वीर पेश करते हैं.

इस निरंतर उत्पादन के पीछे नौसेना का विशाल संस्थागत तंत्र है. WESEE, ATVP और निदेशालय स्वदेशीकरण जैसी संस्थाओं ने स्वदेशी युद्ध प्रणालियों, सेंसर, हथियार एकीकरण क्षमताओं और रणनीतिक तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम हुई है.

इनके साथ डायरेक्टरेट ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (DEE), डायरेक्टरेट ऑफ मरीन इंजीनियरिंग (DMEC) और डायरेक्टरेट ऑफ नेवल आर्किटेक्चर (DNA) भी काम करते हैं. ये संस्थाएं सुनिश्चित करती हैं कि आधुनिक युद्धपोत भारतीय डिजाइन और भारतीय निर्माण वाली प्रणालियों से लैस हों.

जहाज निर्माण प्रक्रिया के केंद्र में WDB, DSP, डायरेक्टरेट ऑफ स्टाफ रिक्वायरमेंट्स और वॉरशिप ओवरसीइंग टीमें हैं. ये संस्थाएं परिचालन आवश्यकताओं को आधुनिक युद्धपोत डिजाइनों में बदलती हैं, शिपयार्ड में निर्माण की निगरानी करती हैं और समय पर जहाजों की डिलीवरी सुनिश्चित करती हैं.

INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय की कमीशनिंग यह दिखाती है कि कैसे इस पूरे तंत्र ने भारतीय नौसेना को ‘खरीदार’ से ‘निर्माता’ में बदल दिया है. वर्तमान में ऑर्डर पर मौजूद लगभग सभी प्रमुख युद्धपोत भारत में ही बनाए जा रहे हैं जो आत्मनिर्भर भारत के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है.

INS दूनागिरी: पांचवां नीलगिरि श्रेणी का स्टेल्थ फ्रिगेट

INS दूनागिरी स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. यह नीलगिरि श्रेणी (प्रोजेक्ट 17A) का पांचवां जहाज और कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) के जरिए बनाया गया दूसरा जहाज है. इसे 30 मार्च को नौसेना को सौंपा गया था.

यह युद्धपोत पुराने INS दूनागिरी का नया रूप है, जो मई 1977 से अक्टूबर 2010 तक नौसेना में सेवा दे चुका लींडर श्रेणी का फ्रिगेट था. नया जहाज डिजाइन, स्टेल्थ क्षमता, स्वचालन, मारक क्षमता और जीवित रहने की क्षमता के मामले में कहीं अधिक उन्नत है. WDB के जरिए डिजाइन और कोलकाता स्थित वॉरशिप ओवरसीइंग टीम की निगरानी में निर्मित प्रोजेक्ट 17A फ्रिगेट, पहले के शिवालिक श्रेणी (प्रोजेक्ट 17) के जहाजों से एक पीढ़ी आगे की तकनीक का प्रतिनिधित्व करते हैं.

यह जहाज ब्रह्मोस सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल, MF-स्टार मल्टीफंक्शन रडार, मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM), सुपर रैपिड गन माउंट (SRGM), क्लोज-इन वेपन सिस्टम, पनडुब्बी रोधी रॉकेट और टॉरपीडो से लैस है.

जहाज में डीजल इंजन और गैस टर्बाइन आधारित CODOG प्रपल्शन सिस्टम के साथ आधुनिक इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम (IPMS) भी लगाया गया है. प्रपल्शन सिस्टम एक ऐसी व्यवस्था है जो किसी भी वाहन (जैसे कार, विमान, या रॉकेट) को आगे बढ़ाने के लिए थ्रस्ट या ताकत पैदा करता है.

पिछले 16 महीनों में नौसेना को सौंपा गया यह पांचवां प्रोजेक्ट 17A फ्रिगेट है. पहले चार जहाजों के निर्माण से मिले अनुभव के कारण इसका निर्माण समय घटकर 80 महीने रह गया जबकि प्रमुख जहाज INS नीलगिरि के लिए 93 महीने लगे थे. इस परियोजना में 75 फीसद स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है. इसमें 200 से अधिक MSME के जरिए लगभग 4,000 लोगों को प्रत्यक्ष तथा 10,000 से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला.

नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा, "INS दूनागिरी अत्याधुनिक युद्ध क्षमताओं से लैस है और जहाज निर्माण दक्षता में बड़ी प्रगति का प्रतीक है." उन्होंने कहा, “इसका निर्माण पिछले फ्रिगेट कार्यक्रम की तुलना में लगभग 33 फीसद कम समय में पूरा हुआ.”

INS संशोधक से भारत की हाइड्रोग्राफिक क्षमता को मजबूती

INS संशोधक अक्टूबर 2018 में हुए एग्रीमेंट के तहत निर्मित चौथा और अंतिम सर्वे वेसल (लार्ज) है. इसे भी 30 मार्च को नौसेना को सौंपा गया था. INS संशोधक से पहले INS संधायक, INS निर्देशक और INS इक्षक को क्रमशः फरवरी 2024, दिसंबर 2024 और नवंबर 2025 में नौसेना में शामिल किया गया था.

WDB के जरिए डिजाइन और GRSE के जरिए भारतीय रजिस्टर ऑफ शिपिंग के नियमों के मुताबिक निर्मित यह जहाज हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण, नौवहन सुरक्षा और समुद्री क्षेत्र जागरूकता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. यह तटीय और गहरे समुद्र दोनों क्षेत्रों में सर्वेक्षण करने, बंदरगाहों के मार्गों और मैप तैयार करने तथा रक्षा और नागरिक उपयोग के लिए समुद्र विज्ञान आंकड़े एकत्र करने में सक्षम है.

करीब 3,400 टन वजनी और 110 मीटर लंबा यह जहाज उन्नत हाइड्रोग्राफिक तकनीकों से लैस है. यह पोत डेटा हासिल कर उस डेटा का इस्तेमाल के लिहाज से एनालिसिस करने में सक्षम है. इसमें पानी के नीचे चलने वाले वाहन (AUVs), रिमोटली ऑपरेटेड वाहन (ROVs), डिजिटल साइड स्कैन सोनार और लंबी दूरी की डिफरेंशियल GPS प्रणाली शामिल हैं.

दो डीजल इंजनों से संचालित यह जहाज 18 नॉट (करीब 33 किलोमीटर प्रति घंटा) से अधिक की गति प्राप्त कर सकता है. जहाज की नींव 17 जून 2022 को रखी गई और इसे 13 जून 2023 को लॉन्च किया गया. इसके बाद व्यापक समुद्री परीक्षण किए गए.

80 फीसद से अधिक स्वदेशी सामग्री वाले इस जहाज में भारतीय उद्योग, MSME और नौसेना की डिजाइन एवं निगरानी संस्थाओं का योगदान रहा है जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री क्षमताएं मजबूत हुई हैं.

INS अग्रय: तटीय पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता को मजबूती

तीसरा जहाज INS अग्रय है, जो GRSE के जरिए बनाए जा रहे आठ अर्नाला श्रेणी के एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट में चौथा जहाज है. इसे भी 30 मार्च को नौसेना को सौंपा गया था. यह जहाज उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी युद्ध, माइन वॉरफेयर और समुद्री निगरानी को मजबूत करेगा.

करीब 77 मीटर लंबा अग्रय और इसके समान अन्य जहाज भारतीय नौसेना के सबसे बड़े वॉटरजेट संचालित युद्धपोत हैं. यह हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और उन्नत उथले पानी वाले सोनार सिस्टम से लैस है, जिससे पानी के भीतर मौजूद खतरों का पता लगाने, उनकी निगरानी करने और उन पर कार्रवाई करने में मदद मिलती है.

दूनागिरी की तरह अग्रय भी नौसेना की एक पुरानी विरासत को आगे बढ़ाता है. इसका नाम पुराने INS अग्रय के नाम पर रखा गया है, जो 1241 PE श्रेणी का एक गश्ती पोत था और 2017 में सेवा से हटाया गया था. 80 फीसद से अधिक स्वदेशी सामग्री वाला यह युद्धपोत भारत की बढ़ती रक्षा निर्माण क्षमता और आयात पर निर्भरता कम करने के नौसेना के प्रयासों का एक और उदाहरण है.

इन तीनों जहाजों की कमीशनिंग केवल बेड़े के विस्तार तक सीमित नहीं है. ये भारत की उस बढ़ती क्षमता का प्रतीक हैं, जिसके तहत देश उच्च स्तरीय युद्ध अभियानों, पनडुब्बी रोधी युद्ध और हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण जैसे विभिन्न मिशनों के लिए आधुनिक नौसैनिक प्लेटफॉर्म डिजाइन और निर्माण कर सकता है.

इस बीच, स्टेल्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरि और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट मालवन के जुलाई में नौसेना में शामिल होने की उम्मीद है. इससे भारत की स्वदेशी नौसैनिक क्षमता को और गति मिलेगी. हिंद-प्रशांत क्षेत्र और व्यापक समुद्री क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाने की भारत की महत्वाकांक्षा के बीच INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय का शामिल होना यह संकेत देता है कि देश का नौसैनिक आधुनिकीकरण अब तेजी से स्वदेशी इनोवेशन और औद्योगिक क्षमता के बल पर आगे बढ़ रहा है.

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