नई दिल्ली में 22 मई को आयोजित India Today Indo-Japan Conclave में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने भारत-जापान संबंधों को केवल व्यापार समझौतों और तकनीकी साझेदारियों के नजरिए से नहीं, बल्कि लोगों के माध्यम से नए सिरे से देखने की जरूरत पर जोर दिया.
‘Skills & Workforce: India’s Talent, Japan’s Demand’ विषय पर अपने मुख्य वक्तव्य में उन्होंने कहा कि भारत की युवा कार्यशक्ति और जापान की तेजी से बुजुर्ग होती आबादी के बीच एक ‘स्वाभाविक रणनीतिक सामंजस्य’ मौजूद है.
विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा और देखभाल जैसे क्षेत्रों में जापान गंभीर श्रमिक संकट का सामना कर रहा है. ऐसे में भारत खुद को एक भरोसेमंद वैश्विक प्रतिभा साझेदार के रूप में स्थापित कर रहा है. हालांकि यह केवल विदेशों में कामगार भेजने का मामला नहीं है. मुखर्जी ने कहा कि भारत की कौशल विकास प्रणाली को केवल घरेलू रोजगार की जरूरतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करना होगा. अब फोकस वैश्विक कार्यबल (Workforce) की तैयारी, उद्योग-प्रमाणित प्रशिक्षण और सांस्कृतिक रूप से तैयार पेशेवरों के निर्माण पर है.
भाषा इस चर्चा का एक महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरी. अब केवल तकनीकी कौशल पर्याप्त नहीं हैं. जापानी भाषा का ज्ञान, कार्यस्थल की संस्कृति और अंतर-सांस्कृतिक समझ को दीर्घकालिक सफलता के लिए अनिवार्य माना जा रहा है. मुखर्जी ने इन क्षमताओं को विकसित करने के लिए सरकारों, प्रशिक्षण संस्थानों और जापानी कंपनियों के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया.
खास बातें :
- जनसांख्यिकीय मेल : भारत की युवा प्रतिभा और जापान की घटती कार्यशक्ति दीर्घकालिक सहयोग के लिए एक रणनीतिक अवसर प्रदान करती है.
- वैश्विक रोजगार पर फोकस : कौशल विकास अब केवल घरेलू नौकरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार बाजार के लिए तैयार करने पर केंद्रित है.
- भाषा अनिवार्य है : जापानी भाषा का ज्ञान और सांस्कृतिक प्रशिक्षण अब तकनीकी कौशल जितने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं.
- उद्योग की भूमिका अहम : केवल सरकारें यह काम नहीं कर सकतीं. जापानी कंपनियों और प्रशिक्षण संस्थानों के साथ गहरे सहयोग की आवश्यकता है.
- लोग तय कर रहे हैं नीति की दिशा : व्यापार और तकनीक के साथ-साथ प्रतिभा की आवाजाही भी भारत-जापान संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बन रही है.
विशेषज्ञ ने क्या कहा :
- "भारत की जनसांख्यिकीय ताकत और जापान की कार्यबल संबंधी जरूरतें स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे के पूरक हैं."
- "आज कौशल विकास केवल रोजगार का नहीं, बल्कि वैश्विक गतिशीलता का भी सवाल है."
- "भाषा और सांस्कृतिक समझ अब तकनीकी प्रशिक्षण जितनी ही महत्वपूर्ण होती जा रही है."
- "भारत जापान के लिए एक भरोसेमंद वैश्विक प्रतिभा साझेदार बन सकता है."
- "भारत-जापान साझेदारी को अब लोगों के बीच बढ़ते संबंध अधिक आकार दे रहे हैं."

