केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 22 मई को पूर्वोत्तर को पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत की भागीदारी का केंद्र बनाने की जोरदार पैरवी की. साथ ही उन्होंने क्षेत्र में जापानी निवेश, सांस्कृतिक सहयोग और रणनीतिक एकीकरण को बढ़ाने की अपील की.
India Today Indo-Japan Conclave के ‘The Northeast Corridor: Looking and Acting East’ सत्र में बोलते हुए रिजिजू ने कहा कि भारत ने पूर्वोत्तर के बड़े भू-राजनीतिक महत्व के बावजूद अतीत में उसकी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति का इस्तेमाल करने में ‘बहुत बुरी तरह असफल’ रहा.
उन्होंने आगे कहा, “हर भू-रणनीतिक नीति या कार्यक्रम भूगोल पर आधारित होता है. भूगोल तय करता है कि आप अपनी रणनीति कैसे बनाते हैं.” उन्होंने तर्क दिया कि पूर्वोत्तर भारत को व्यापक दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र से अलग नहीं किया जा सकता. साथ ही उनका कहना था, “जब हम दक्षिण-पूर्व एशिया की बात करते हैं तो वह पूर्वोत्तर भारत के बिना पूरी नहीं होती.”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Look East से Act East नीति में बदलाव का जिक्र करते हुए रिजिजू ने कहा कि नाम में यह बदलाव निष्क्रिय कूटनीति से ठोस भागीदारी की ओर बदलाव को दिखाता है, “हमें जमीन पर वास्तविक काम करना होगा. यही Look East से Act East नीति में बदलाव का उद्देश्य है.”
अरुणाचल पश्चिम से लोकसभा सांसद रिजिजू ने जोर देकर कहा कि पूर्वोत्तर देश के सबसे संवेदनशील रणनीतिक क्षेत्रों में से एक है, जिसकी सीमाएं चीन, म्यांमार, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान से लगती हैं. इसके बावजूद, उनके अनुसार नीति-निर्माता लंबे समय तक इसके रणनीतिक महत्व को समझने में असफल रहे. उन्होंने कहा, “मुझे सच में लगता है कि भारत पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक स्थिति का उपयोग करने में बुरी तरह असफल रहा है.”
रिजिजू ने यह भी बताया कि चीन से जुड़े भू-राजनीतिक कारणों के चलते अरुणाचल प्रदेश में जापान की आर्थिक भागीदारी सीमित है, “अरुणाचल प्रदेश, जो पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा राज्य है, जापानी आर्थिक निवेश या गतिविधियों का हिस्सा नहीं है. JICA (Japan International Cooperation Agency) के प्रमुख और अन्य लोग कई बार मुझसे मिले, लेकिन चीन से जुड़ी समस्या के कारण जापान की मेरे राज्य में कोई आर्थिक मौजूदगी नहीं है.”
पूर्वोत्तर में जापान की मौजूदगी को ज्यादा दिखाई देने लायक बनाने की अपील करते हुए रिजिजू ने कहा कि प्रतीकात्मक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से क्षेत्र में लोगों की सोच पर बड़ा असर पड़ सकता है. केंद्रीय मंत्री का कहना था, “उनकी मौजूदगी है लेकिन बहुत दिखाई नहीं देती. जैसे दिल्ली मेट्रो या सुजुकी-मारुति सहयोग, कुछ ऐसा दिखने वाला होना चाहिए जो पूर्वोत्तर के लोगों के मन में यह असर डाले कि जापान यहां है और बड़े स्तर पर आ रहा है.”
रिजिजू ने पूर्वोत्तर भारत और पूर्व एशिया के बीच जुड़ाव को प्रभावित करने वाले सांस्कृतिक पहलुओं पर भी बात की. उन्होंने कहा कि कोरियाई पॉपुलर संस्कृति ने क्षेत्र के युवाओं को काफी प्रभावित किया है जबकि जापान का प्रभाव अधिक सूक्ष्म रहा है और तकनीकी उत्कृष्टता व ऐतिहासिक सम्मान पर आधारित है. उन्होंने कहा, “कोरियाई लोगों ने वैश्विक ध्यान आकर्षित करने के लिए सांस्कृतिक प्रभाव को सॉफ्ट पावर के रूप में रणनीतिक तरीके से इस्तेमाल किया. जापान को लगा कि इसकी जरूरत नहीं है क्योंकि Made in Japan कभी खुद सबसे बड़ा वैश्विक ब्रांड था.”
साथ ही रिजिजू ने लोगों के बीच मजबूत संपर्क की जरूरत पर जोर दिया, खासकर कौशल विकास और जापान के साथ श्रम गतिशीलता (mobility) साझेदारी के जरिए. केंद्रीय मंत्री का कहना था, “हम भारत और जापान के बीच खास तौर पर पूर्वोत्तर के युवाओं को कौशल देने और उन्हें जापान में अवसर उपलब्ध कराने के लिए विशेष समझौते कर सकते हैं.” उन्होंने जोड़ा कि वह इस मुद्दे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बात करने की योजना बना रहे हैं.
रिजिजू ने यह भी कहा कि जापान और अन्य एशियाई देशों के साथ संबंधों में बौद्ध धर्म भारत की सबसे कम उपयोग की गई सॉफ्ट पावर है, “आज भारत के पास सबसे बड़ी सॉफ्ट पावर बौद्ध धर्म है. अगर सऊदी अरब के पास मक्का और मदीना है तो हमारे पास बोधगया है. हम भारतीय यह समझ ही नहीं पा रहे हैं कि हमारे पास क्या है, एक प्रतिशत भी नहीं समझ पा रहे.”
बौद्ध बहुल देशों के साथ अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए रिजिजू ने कहा कि वहां भारत के प्रति गहरा सम्मान है क्योंकि इसे बुद्ध की भूमि के रूप में देखा जाता है. उन्होंने बताया, “जहां भी मैं बौद्ध लोगों से मिला वे भारतीयों को केवल एक महान देश के नागरिक के रूप में नहीं, बल्कि सम्मान की नजर से देखते हैं कि- ओह, वह बुद्ध की भूमि से है.”
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की कूटनीति में बौद्ध धर्म को केंद्र में रखने की कोशिश की है. इस दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में मोदी की पंक्ति को दोहराया: हमने बुद्ध दिया है, युद्ध नहीं.
रिजिजू के भाषण की खास बातें :
- “भारत पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक स्थिति का उपयोग करने में बहुत बुरी तरह असफल रहा है.”
- “जब हम दक्षिण-पूर्व एशिया की बात करते हैं तो वह पूर्वोत्तर भारत के बिना पूरी नहीं होती.”
- “अरुणाचल प्रदेश, जो पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा राज्य है, जापानी आर्थिक निवेश या गतिविधियों का हिस्सा नहीं है. चीन से जुड़ी समस्या के कारण मेरे राज्य में जापान की कोई आर्थिक मौजूदगी नहीं है.”
- “आज भारत के पास सबसे बड़ी सॉफ्ट पावर बौद्ध धर्म है. अगर सऊदी अरब के पास मक्का और मदीना है, तो हमारे पास बोधगया है.”
- “हम भारत और जापान के बीच खास तौर पर पूर्वोत्तर के युवाओं को कौशल देने और उन्हें जापान में उपलब्ध कराने के लिए विशेष समझौते कर सकते हैं.”

