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नायब सिंह सैनी हरियाणा को क्यों बनाना चाहते हैं जापान का लॉन्ग-टर्म बेस?

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने India Today Indo-Japan Conclave में बताया कि हरियाणा में जापानी निवेश चार दशकों के मजबूत भरोसे का नतीजा है

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी (फोटो : अरुण कुमार)
अपडेटेड 25 मई , 2026

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 22 मई को नई दिल्ली में आयोजित India Today Indo-Japan Conclave में अपने मुख्य भाषण का इस्तेमाल पारंपरिक निवेश अपील के बजाय एक रणनीतिक प्रेजेंटेशन के रूप में किया.

‘स्मार्ट स्टेट्स: हरियाणा मॉडल फॉर ग्लोबल पार्टनरशिप (Smart States: Haryana Model for Global Partnership)’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने तर्क दिया कि सप्लाई-चेन चिंताओं, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और पूंजी के लिए प्रतिस्पर्धा से प्रभावित दुनिया में आर्थिक वृद्धि का अगला चरण सब्सिडी पर कम और भरोसे, पूर्वानुमान और संस्थागत जवाबदेही पर अधिक निर्भर करेगा.

यह भाषण दिखाता है कि वैश्विक बदलावों के जवाब में भारतीय राज्य अपने आर्थिक दृष्टिकोण को कैसे बदल रहे हैं. हरियाणा को लंबे समय तक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के औद्योगिक विस्तार के रूप में देखा जाता रहा है. यह राज्य अब खुद को भारत के सबसे परिपक्व जापान-तैयार मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है. सैनी ने बार-बार जोर देकर कहा कि हरियाणा में जापानी निवेश न तो संयोग है और न ही केवल प्रोत्साहनों पर आधारित,  बल्कि यह ‘चार दशकों के भरोसे’ और जापानी औद्योगिक तरीकों तथा हरियाणा के मैन्युफैक्चरिंग माहौल के बीच सांस्कृतिक अनुकूलता का परिणाम है.

इस बात जोर देना काफी अहम था. जैसे-जैसे वैश्विक कंपनियां चीन के बाहर सप्लाई-चेन को विविध बनाने की कोशिश कर रही हैं, भारत खुद को एक वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग स्थान के रूप में पेश कर रहा है. लेकिन भारत के भीतर राज्य विदेशी पूंजी के पसंदीदा प्रवेश द्वार बनने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं. सैनी के अनुसार हरियाणा की रणनीति खुद को सिर्फ निवेश गंतव्य के रूप में नहीं, बल्कि दीर्घकालिक मैन्युफैक्चरिंग साझेदारियों के लिए एक स्थिर संचालन इकोसिस्टम के रूप में प्रस्तुत करने की है.

भाषण के दौरान दिए गए आंकड़े इस दावे को मजबूत करने के लिए थे. हरियाणा में करीब 394 जापानी उद्योग और 600 से अधिक जापानी व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं जो इसे भारत में जापानी कंपनियों का सबसे बड़ा केंद्र बनाते हैं. सैनी ने गुरुग्राम, मानेसर, झज्जर, बावल और सोनीपत को ‘भारत-जापान औद्योगिक एकीकरण’ के उदाहरण के रूप में बताया, न कि अलग-अलग औद्योगिक क्लस्टर के रूप में.

‘स्मार्ट स्टेट’ जैसा शब्द आजकल भाषणों में खूब इस्तेमाल होता है. सैने इसको भी नए तरीके से परिभाषित करने की कोशिश की. हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्ट गवर्नेंस सिर्फ डैशबोर्ड या डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं है बल्कि निवेशकों की चिंताओं को पहले से समझने, बाधाओं को कम करने और बिखरे हुए प्रोजेक्ट्स के बजाय इकोसिस्टम बनाने के बारे में है. उन्होंने ‘हरियाणा मॉडल’ को ‘जवाबदेही, सुधार, भरोसेमंदता और रिश्तों’ पर आधारित बताया.

भाषण का बड़ा हिस्सा लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित था.  इन क्षेत्रों में हरियाणा खुद को संरचनात्मक बढ़त वाला मानता है. राज्य का दो-तिहाई हिस्सा NCR में होने के कारण दिल्ली के नजदीक होना, एक्सप्रेसवे, फ्रेट कॉरिडोर, मेट्रो रेल नेटवर्क और एयरपोर्ट इसकी खासियत के रूप में पेश किए गए. सैनी ने औद्योगिक क्षेत्रों, ईवी (EV) इकोसिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर और लॉजिस्टिक्स हब के विकास का भी जिक्र किया और खास तौर पर METL झज्जर में जापानी इंडस्ट्रियल टाउनशिप और नारायणगढ़ में प्रस्तावित जापानी क्लस्टर को रेखांकित किया.

मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक दक्षता का भी संकेत देने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि हरियाणा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से आगे बढ़कर ‘स्पीड ऑफ डूइंग बिजनेस’ की ओर बढ़ चुका है. इसके लिए उन्होंने राज्य के डिजिटल सिंगल रूफ क्लियरेंस सिस्टम के जरिए मंजूरी की समयसीमा कम होने का हवाला दिया. इसका संदेश साफ था कि निवेशक अब केवल नीतिगत घोषणाओं से ज्यादा निश्चितता और तेजी से क्रियान्वयन को महत्व देते हैं.

भाषण में हरियाणा को उन क्षेत्रों से भी जोड़ा गया जो वर्तमान भारत-जापान आर्थिक सहयोग के केंद्र में हैं- सेमीकंडक्टर, ईवी, बैटरी, रोबोटिक्स, एआई और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग. सैनी ने एमएसएमई (MSMEs) पर भी खास जोर दिया और कहा कि छोटे उद्योग तकनीक हस्तांतरण और जॉइंट वेंचर के जरिए भारत-जापान सहयोग का अगला चरण बन सकते हैं.

भाषण का सबसे राजनीतिक रूप से संतुलित हिस्सा औद्योगिक नीति को मानवीय रूप देने की कोशिश था. सैनी ने गुरुग्राम के अंतरराष्ट्रीय स्कूलों, जापानी रेस्तरां और शहरी ढांचे का जिक्र करते हुए कहा कि निवेश का इकोसिस्टम अब सिर्फ फैक्ट्री इंफ्रास्ट्रक्चर पर नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता पर भी निर्भर करता है. जापानी निवेशकों के लिए एक विशेष ‘साकुरा डेस्क’ की घोषणा इसी संबंध-आधारित शासन की दिशा को दिखाती है.

कुल मिलाकर, सैनी का भाषण केवल जापानी निवेश आकर्षित करने के बारे में नहीं था. यह हरियाणा की ओर से भारत की मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षाओं में जापान का सबसे भरोसेमंद दीर्घकालिक साझेदार बनने की कोशिश थी.

सैनी के भाषण की खास बातें :

• “मैं यहां सिर्फ निवेश की बात करने नहीं आया हूं. मैं यहां भरोसे की बात करने आया हूं. ऐसा भरोसा जो पिछले चार दशकों में हरियाणा और जापान के बीच बना है.”
• “देश और राज्य अब केवल प्रोत्साहनों पर प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहे हैं. अब प्रतिस्पर्धा भरोसे, गति, लचीलेपन और साझेदारी की है.”
• “हमारे लिए स्मार्ट स्टेट वह है जो भविष्य को पहले से समझे, जो समस्याएं आने से पहले निवेशकों की चिंताओं को सुने.”
• “हम आसानी से गति की ओर और गति से पूर्वानुमान की ओर बढ़ रहे हैं. क्योंकि निवेशक सिर्फ मंजूरी नहीं, निश्चितता चाहते हैं.”
• “हरियाणा केवल निवेश नहीं चाहता. हरियाणा आपको साझेदारी के लिए आमंत्रित कर रहा है.”
 

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