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अब हाईवे पर नहीं लगेंगे ब्रेक! MLFF सिस्टम बचाएगा करोड़ों लीटर पेट्रोल-डीजल

भारत में शुरू हो रहा है बैरियर फ्री टोल सिस्टम यानी MLFF, जहां टोल प्लाजा पर अब गाड़ियों को रुकना नहीं पड़ेगा और इससे पेट्रोल-डीजल की बचत भी होगी

सांकेतिक फोटो
अपडेटेड 14 मई , 2026

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को लोगों से कम गाड़ी चलाने, कार-पूल करने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने की अपील की तो वो सिर्फ लाइफस्टाइल बदलने की बात नहीं कर रहे थे. पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर दबाव है, जिससे भारत का तेल आयात बिल भी बढ़ सकता है. ऐसे में मोदी का जोर फ्यूल बचाने पर था. जैसा उन्होंने कहा, छोटा हो या बड़ा, हर कदम मायने रखता है.

प्रधानमंत्री की इस अपील से जुड़ा एक बड़ा बदलाव अब हाईवे पर भी देखने को मिल रहा है. मल्टी लेन फ्री फ्लो (Multi-Lane Free Flow) यानी MLFF सिस्टम में टोल प्लाजा पर बैरियर ही हटा दिया जाता है जिससे गाड़ियां बिना रुके सीधे निकल सकती हैं. सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक इससे हर साल करीब 250 करोड़ लीटर फ्यूल बचाया जा सकता है क्योंकि टोल प्लाजा पर गाड़ियों को रुकना और इंजन चालू रखकर इंतजार नहीं करना पड़ेगा.

यह आंकड़ा इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से खरीदता है. मोदी की फ्यूल बचाने वाली अपील के अगले ही दिन गडकरी ने दिल्ली के मुंडका में अर्बन एक्सटेंशन रोड पर MLFF टोल प्लाजा का उद्घाटन किया. वहीं गुजरात के चोर्यासी में 1 मई से देश का पहला ‘बैरियर-फ्री’ टोल प्लाजा शुरू भी हो चुका है.

इस सिस्टम का सीधा मतलब है कि टोल प्लाजा पर लगने वाला जाम खत्म होगा. अभी गाड़ियां लाइन में खड़ी रहती हैं, बार-बार ब्रेक और एक्सीलरेटर का इस्तेमाल होता है और इंजन चालू रहने से फ्यूल ज्यादा जलता है. साल 2010 में इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन पर बनी एक समिति, जिसकी अगुवाई नंदन नीलेकणि ने की थी, उसने भी कहा था कि अगर टोल भुगतान कैशलेस हो जाए तो गाड़ी को निकलने में लगने वाला समय 10 मिनट से घटकर 60 सेकंड से कम हो सकता है.

MLFF इससे भी एक कदम आगे है क्योंकि इसमें रुकना ही खत्म हो जाता है. FASTag, नंबर प्लेट पहचानने वाली तकनीक और AI कैमरों की मदद से गाड़ियां 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सीधे निकल सकती हैं. न बैरियर खुलेगा, न लाइन लगेगी.

गडकरी के मंत्रालय का कहना है कि इससे टोल वसूली का खर्च भी काफी कम हो जाएगा. अभी टोल से मिलने वाली कमाई का 12-15 फीसदी हिस्सा संचालन में खर्च होता है जो MLFF आने के बाद घटकर 3-4 फीसदी रह सकता है. इससे हर साल करीब 5,000 से 6,000 करोड़ रुपए की बचत और अतिरिक्त कमाई हो सकती है.

माल ढोने वाले ट्रकों और बड़े वाहनों को इसका और ज्यादा फायदा होगा क्योंकि उनके इंजन बड़े होते हैं और ज्यादा फ्यूल खर्च होता है. मंत्रालय के मुताबिक, टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम की वजह से हर साल करीब 10,000 करोड़ रुपए का नुकसान होता है, जिसमें समय, फ्यूल और प्रदूषण शामिल हैं. वहीं MLFF से करीब 1,500 करोड़ रुपए सालाना बचाए जा सकते हैं.

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है, जिसका असर भारत में महंगाई और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. मोदी की फ्यूल बचाने की अपील जहां लोगों से जुड़ी पहल थी वहीं MLFF एक स्थाई और तकनीकी समाधान माना जा रहा है जो सिस्टम की बेकार की देरी और फ्यूल की बर्बादी को खत्म करता है.

गडकरी का यह भी कहना है कि इस सिस्टम से सरकार पर ज्यादा आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा. पहले की कई योजनाओं की तरह इसमें भी निजी तकनीकी कंपनियां निवेश करेंगी और खर्च की भरपाई बेहतर टोल वसूली और कम संचालन लागत से हो जाएगी.

इस सिस्टम का एक दूसरा फायदा भी है. MLFF में लगे कैमरे सीट बेल्ट न लगाने या ड्राइविंग के दौरान मोबाइल इस्तेमाल करने जैसी गलतियों को तुरंत पकड़ सकते हैं. इसके बाद बिना किसी मैनुअल चेकिंग के डिजिटल चालान भेजा जा सकता है.

कुल मिलाकर MLFF उसी सोच का हिस्सा है जिसमें सरकार डिजिटल सिस्टम के जरिए समय, पैसा और फ्यूल की बर्बादी कम करना चाहती है. FASTag इसका पहला चरण था और अगर योजना के मुताबिक विस्तार हुआ, तो MLFF अगला बड़ा कदम साबित हो सकता है.

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