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IIM : देश के टॉप मैनेजमेंट संस्थान अपने यहां डायरेक्टर नियुक्त क्यों नहीं कर पा रहे?

आईआईएम कलकत्ता, आईआईएम शिलांग और आईआईएम काशीपुर अपने फुलटाइम शीर्ष नेतृत्व के बगैर ही काम करने को मजबूर

आईआईएम कलकत्ता
अपडेटेड 30 मई , 2025

भारत में हायर एजूकेशन को रेगूलेट करने वाली एजेंसी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के चेयरमैन के पद पर पिछले दो महीने से फुल टाइम चेयरमैन की ​​नियुक्ति नहीं हुई है. देश भर में ऐसे 10 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं, जहां फुल टाइम कुलपति की नियुक्ति कई महीनों से टलती जा रही है. 

ये सभी नियुक्तियां केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्तर पर की जानी हैं. हालांकि शैक्षणिक संस्थानों में शीर्ष स्तर पर नेतृत्वहीनता की ये स्थिति सिर्फ केंद्रीय विश्वविद्यालयों तक ही सीमित नहीं है बल्कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित 'इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल इंपॉर्टेंस' वाले संस्थानों की भी है. 

ऐसे ही संस्थानों की सूची में भारतीय प्रबंधन संस्थान यानी आईआईएम भी आते हैं. प्रबंधन की पढ़ाई के लिए श्रेष्ठ संस्था के तौर पर इनकी शुरुआत 1961 में कोलकाता और अहमदाबाद से हुई थी. अपने अब तक के सफर में आईआईएम ने न सिर्फ भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रबंधन की पढ़ाई के मामले में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. 

मैनेजमेंट की पढ़ाई में आईआईएम के उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र सरकार ने इन्हें 'इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल इंपॉर्टेंस' का टैग दिया था. इस टैग का मतलब यह है कि ये संस्थान देश के विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं और इस टैग के बाद ऐसे संस्थानों को अपने कामकाज में दूसरे उच्च शिक्षा के संस्थानों के मुकाबले अधिक स्वायत्तता मिलती है.

ऐसे राष्ट्रीय महत्व के तीन संस्थान आईआईएम कलकत्ता, आईआईएम शिलांग और आईआईएम काशीपुर अपने फुलटाइम निदेशक का इंतजार पिछले कई महीने से कर रहे हैं. इन संस्थान के फुल टाइम निदेशक की नियुक्ति का मामला केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्तर पर लगातार टलता जा रहा है.

देश के पहले आईआईएम के तौर पर आईआईएम कलकत्ता की शुरुआत हुई थी. उसी साल आईआईएम अहमदाबाद भी शुरू हुआ. लेकिन देश के पहले आईआईएम यानी आईआईएम, कोलकाता में तो तकरीबन दो साल से कोई फुल टाइम निदेशक नहीं है.

उत्तम कुमार सरकार ने आईआईएम कलकत्ता के निदेशक पद से 2023 के अगस्त में इस्तीफा दिया था. उसके बाद तकरीबन दो महीने तक इस पद पर न तो कोई नियुक्ति हुई और न ही किसी को प्रभारी निदेशक बनाया गया. नवंबर, 2023 में सहदेब सरकार को संस्थान का डायरेक्टर इंचार्ज बनाया गया. जनवरी, 2025 में उन्होंने यह पद छोड़ दिया. इसके बाद से शैबाल चट्टोपाध्याय डायरेक्टर इंचार्ज के तौर पर काम कर रहे हैं. लेकिन अब तक फुल टाइम निदेशक की नियुक्ति नहीं हो पाई है. 

आईआईएम लखनऊ में पिछले एक साल से पुराने निदेशक ही कार्यकाल विस्तार पर काम संभाल रहे थे. लेकिन अप्रैल के आखिरी हफ्ते में संस्थान को एमपी गुप्ता के तौर पर फुल टाइम निदेशक मिल गया. 

लेकिन आईआईएम शिलांग और आईआईएम काशीपुर अभी भी डायरेक्टर इंचार्ज के नेतृत्व में ही काम कर रहे हैं और इनके लिए नए फुल टाइम डायरेक्टर का इंतजार लंबा होता जा रहा है. आईआईएम शिलांग के निदेशक पद पर काम कर रहे डीपी गोयल का कार्यकाल पिछले महीने खत्म हुआ. इसके बाद प्रभारी निदेशक के तौर पर नलिन प्रव त्रिपाठी की नियुक्ति की गई है. नए निदेशक की नियुक्ति के लिए संस्थान ने 27 दिसंबर, 2024 को विज्ञापन निकाला था लेकिन अब तक कोई नियुक्ति नहीं हो पाई है.

उत्तराखंड के काशीपुर में आईआईएम की शुरुआत 2011 में हुई थी. यह संस्थान भी अभी प्रभारी निदेशक के नेतृत्व में चल रहा है. सोमानाथ चक्रवर्ती अभी इस पद पर हैं. संस्थान के नए निदेशक की नियुक्ति के लिए पिछले साल ही विज्ञापन निकाला गया था. आवेदन की अंतिम तारीख 5 जुलाई, 2024 थी. नए निदेशक की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाले करीब साल भर हो गए हैं लेकिन अब तक इस पद पर नियुक्ति नहीं हो पाई है.

आईआईएम काशीपुर में निदेशक की नियुक्ति में ही सिर्फ देरी नहीं हो रही बल्कि संस्थान के बोर्ड के चेयरमैन के पद पर पिछले छह साल से संदीप सिंह कार्यरत हैं. जबकि उनका कार्यकाल कब का पूरा हो गया है. उनकी जगह पर नए चेयरमैन की भी नियुक्ति केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने नहीं की है. यह मामला उत्तराखंड हाई कोर्ट में भी पहुंचा. अप्रैल, 2025 के तीसरे सप्ताह में इसकी सुनवाई हुई. हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह निर्देश देते हुए आदेश पारित किया कि चार महीने के अंदर संस्थान के नए चेयरमैन की नियुक्ति की जाए. इस अदालती आदेश के बाद संस्थान के शिक्षकों और छात्रों में यह उम्मीद जगी है कि निदेशक की नियुक्ति के मामले में भी कोई प्रगति हो.   

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