भारत के मैदानी इलाकों में इन दिनों प्रचंड गर्मी और हीटवेव यानी लू का असर देखने को मिल रहा है. गर्मी के कहर का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अधिकतर इलाकों में पारा 45 डिग्री के पार चला गया है. 19 मई यानी रविवार को दिल्ली का नजफगढ़ देश का सबसे गर्म स्थान रहा जहां पर अधिकतम तापमान 47.5 डिग्री तक दर्ज किया गया.
मौसम विशेषज्ञों ने भी ऐसी चेतावनी दी है कि आने वाले वक्त में हीटवेव का कहर और भी ज्यादा बढ़ सकता है. इससे ना केवल लोगों की रोजाना की जिंदगी और सेहत बल्कि व्यापार और घरेलू अर्थव्यवस्था के भी प्रभावित होने की आशंका है. विशेषज्ञों ने आने वाले महीनों में भारत में सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान लगाया है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र के अनुसार, 30 जून को समाप्त होने वाली तीन महीने की अवधि के दौरान देश के कई इलाकों में 10 से 20 दिनों तक लू चलने की आशंका है. अगर इसके बुरे असर की बात करें तो ज्यादा गर्मी लंबी अवधि वाली फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है.
बढ़ेगी बिजली की खपत
इसके अलावा सामान्य से ज्यादा गर्मी होने पर बिजली और पानी की खपत भी बढ़ जाती है. बिजली की खपत को पूरा करने के लिए कोयले की खपत भी बढ़ानी पड़ सकती है. 2021 और 2022 की गर्मियों में भी कोयले की कमी के संकट के दौरान देश के कई इलाकों में बिजली कटौती से विकट स्थितियां बनी थीं.
बिजली मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, इस गर्मी के दौरान देश में बिजली की अधिकतम मांग 260 गीगावॉट तक पहुंच सकती है, जो पिछले साल सितंबर के रिकॉर्ड 243 गीगावॉट से ज्यादा है. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, बिजली की अब तक की सबसे ज्यादा मांग के चलते, केंद्रीय बिजली मंत्री के अधिकारी रेलवे, कोयला और बिजली कंपनियों जैसे अन्य मंत्रालयों के साथ देश में हीटवेव यानी लू की अनुमानित स्थिति पर समीक्षा बैठकें कर रहे हैं.
मौजूदा गर्मियों के साथ-साथ आने वाली गर्मियों के दौरान भी भारत की निर्भरता कोल बिजली पर काफी ज्यादा रहने का अनुमान है. केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के मुताबिक, भारत में लगभग 25GW गैस आधारित बिजली उत्पादन क्षमता है. देश में कोयला और लिग्नाइट आधारित थर्मल पावर क्षमता लगभग 216 गीगावॉट है और बेस लोड के तौर पर काम करती है.
इसी साल फरवरी में आई सीईए की रिपोर्ट के अनुसार देश की सौर क्षमता लगभग 76GW है, जबकि पवन ऊर्जा की क्षमता 45GW है. इसी तरह, देश में बड़े हाइड्रो (25 मेगावाट से अधिक संयंत्र) बिजली क्षमता लगभग 47 गीगावॉट है. देश में कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 434 गीगावॉट है.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार, जो बिजली उत्पादन के लिए जरूरत का लगभग तीन-चौथाई है, पिछले वर्ष में 38 फीसदी तक बढ़ गया है और यह औसतन 18 दिनों तक चल सकता है. लेकिन इस सब के बावजूद भी कोयले का भंडारण अनिवार्य स्तर से नीचे हैं.
साल 2022 में, भारत को छह सालों के दौरान सबसे खराब बिजली की कमी का सामना करना पड़ा, जिसके कारण कई हिस्सों में घरों के साथ-साथ इंडस्ट्रीज को भी बिजली कटौती का सामना करना पड़ा. बिजली के अलावा इस हीटवेव का असर फसलों और फूड सप्लाई चेन पर भी देखने को मिल सकता है.
इन मोर्चों पर आम आदमी की जब होगी ढीली
सामान्य से ज्यादा तापमान के चलते देश भर में सब्जियों और फलों के उत्पादन पर बुरा असर देखने को मिल सकता है. हीटवेव के चलते खड़ी फसलों के सूखने या फिर उनके समय से पहले पकने का खतरा हमेशा बना रहता है. वहीं उत्पादन के कम होने से कीमतों के बढ़ने का खतरा भी होता है. इसके अलावा सिंचाई के लिए पानी की मांग बढ़ने से पानी के स्रोतों पर भी दबाव बढ़ जाता है. फसलों के अलावा दूध या डेयरी उत्पादों के साथ मुर्गी और मछली पालन पर भी गर्मी का बुरा असर देखने को मिल सकता है.
बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने 'इकोनॉमिक्स टाइम्स' से बातचीत में कहा है कि देश में महंगाई की दर अभी भी 5 फीसदी के नीचे ही है. हालांकि हीटवेव का फसलों पर बुरा असर पड़ने से खाने-पीने के सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं. इस वजह से महंगाई के मोर्चे पर आम आदमी को झटके लगने की संभावना भी है.
देश में कोल्ड स्टोरेज या फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स की कमी भी है, जिस वजह से ताजा उपज को भी गर्मी के चलते नुकसान उठाना पड़ सकता है. साल 2023 में जारी वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक कोल्ड स्टोरेज की कमी के चलते भारत को हल साल लगभग 13 अरब डॉलर के आनाज की बर्बादी सहनी पड़ती है.
निर्मल बंग इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज प्राइवेट लिमिटेड की अर्थशास्त्री टेरेसा जॉन ने ब्लूमबर्ग से बातचीत में कहा है, "सब्जियों की फसलों पर हीटवेव का असर पड़ने से इस मोर्चे पर भी बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ सकता है."
असामान्य तापमान से ग्रामीण क्षेत्रों में भी मांग के नीचे जाने की संभावना बनी रहती है. जिससे एफएमसीजी कंपनियों के मुनाफे में कमी आती है. फिर वे आगे निवेश करने से बचती हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक भारत में गेंहू की फसल पक कर तैयार हो चुकी है और ऐसे में कटाई में देरी होने पर उसे भी नुकसान हो सकता है.
एसी और फ्रिज का बाजार हो सकता है गुलजार
भले ही असामान्य तापमान और हीटवेव के चलते खेती-किसानी के मोर्चे पर मुश्किलें बढ़ती हुई दिखाई दे रही हों लेकिन एसी और फ्रिज मार्केट के लिए यह एक अच्छी खबर हो सकती है. हालांकि अभी तक इस मार्केट में धीमी सीजनल ग्रोथ ही देखने को मिली है लेकिन कंपनियों को भरोसा है कि वे 11.5 करोड़ यूनिट्स की बिक्री का आंकड़ा पार कर सकती हैं.
डाइकिन, पैनासॉनिक, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्लू स्टार, गोदरेज एप्लायंसेज और लॉयड जैसी बड़ी कंपनियों ने इस साल 25 फीसदी तक ग्रोथ की उम्मीद जताई है. इन कंपनियों के मुताबिक इस ग्रोथ में बड़े शहरों से ज्यादा छोटे शहरों का ज्यादा योगदान हो सकता है
फ्रिज और एसी मार्केट के अलावा इस गर्मी के मौसम में आइसक्रीम, डेयरी और कोल्डड्रिंक का बाजार भी काफी फल-फूल सकता है. इस मार्केट में 15-20 फीसदी बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है. कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि भले ही शहरी इलाकों में यह हीटवेव कुछ सेक्टर्स के लिए मौके की तरह हो लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रामीण सेक्टरों में खास तौर पर फसलों के मामले में इसके गंभीर नुकसान देखने को मिल सकते हैं.

