मोदी सरकार की ओर से हाल ही में किया गया राज्यपालों का फेरबदल, राजभवनों में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है. इसके तहत छह नए राज्यपालों की नियुक्ति हुई है और तीन अन्य का ट्रांसफर हुआ है.
कहा जा रहा है कि वफादार बने रहने के लिए कुछ लोगों को पीएम नरेंद्र मोदी ने पुरस्कृत किया है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब बीजेपी के दिग्गज नेताओं ने युवा नेताओं के लिए रास्ता बनाया है.
कलराज मिश्र (राजस्थान), बनवारीलाल पुरोहित (पंजाब), अनुसुइया उइके (मणिपुर), विश्वभूषण हरिचंदन (छत्तीसगढ़) और फागू चौहान (मेघालय) जैसे अनुभवी राज्यपालों की जगह युवा नियुक्तियां की जा रही हैं. अपनी सरकार के लिए बीजेपी की सहयोगी दलों पर निर्भरता के बावजूद, इस फेरबदल में एनडीए के सहयोगियों के साथ समझौता या मेल-जोल के कोई संकेत नहीं दिखते.
पंजाब की बात करें तो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. पुरोहित का पिछले कुछ समय से भगवंत मान की सरकार के साथ तालमेल नहीं बैठ पा रहा था. उनकी जगह गुलाब सिंह कटारिया को राज्यपाल नियुक्त किया गया है, जो राजस्थान के एक अनुभवी बीजेपी नेता हैं और पहले असम के राज्यपाल के रूप में नियुक्त थे. लक्ष्मण प्रसाद आचार्य अब असम के राज्यपाल हैं और उइके की जगह मणिपुर का भी प्रभार संभालेंगे.
तीन राज्यपाल - आचार्य देवव्रत (गुजरात), आनंदीबेन पटेल (उत्तर प्रदेश) और आरिफ मोहम्मद खान (केरल) - जो या तो अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं या खत्म होने के करीब हैं, फिलहाल अपने पदों पर बने रहेंगे. त्रिपुरा में सत्ता संतुलन के लिए पूर्व उपमुख्यमंत्री जिष्णु देव वर्मा को तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया है, जो नॉर्थ-ईस्ट के किसी बीजेपी नेता के लिए एक दुर्लभ प्रमोशन है. इसी क्षेत्र से पूर्व असम सांसद रामेन डेका को छत्तीसगढ़ का राज्यपाल नियुक्त किया गया है.
राजस्थान में कलराज मिश्रा की जगह वरिष्ठ बीजेपी नेता हरिभाऊ किसनराव बागड़े लेंगे, जबकि मैसूर के पूर्व सांसद सीएच विजयशंकर मेघालय में चौहान की जगह लेंगे. मोदी सरकार ने एक चौंकाने वाला कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस और तमिलनाडु के आर.एन. रवि को बरकरार रखने का फैसला किया है, जिनका अपनी-अपनी राज्य सरकारों के साथ टकराव रहा है. बोस का ममता बनर्जी सरकार के साथ विवाद चल रहा है, जबकि रवि का एम.के. स्टालिन प्रशासन तनातनी लगातार सुर्खियां बनती रही है.
सबसे ज्यादा ध्यान जिन नियुक्तियों ने खींचा, उनमें मोदी के विश्वासपात्र और पूर्व नौकरशाह के. कैलाशनाथन की पुडुचेरी के उपराज्यपाल, बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओ.पी. माथुर की सिक्किम और पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की झारखंड के राज्यपाल के तौर पर नियुक्तियां हैं. रमेश बैस की जगह सी.पी. राधाकृष्णन को महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाया गया है.
इंडिया टुडे के पत्रकार अनिलेश एस महाजन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, "कैलाशनाथन की नियुक्ति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है. पिछले महीने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मुख्य प्रधान सचिव के पद से हटने के बाद, कैलाशनाथन, जो बीजेपी सरकार का समर्थन करने के लिए गुजरात में ही रुके थे, अब अपने सालों के प्रशासनिक अनुभव को पुडुचेरी में इस्तेमाल करेंगे. माथुर की नियुक्ति को सक्रिय राजनीति से उनके बाहर होने के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि वे पहले बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना चाह रहे थे."
गंगवार भी एक सांसद और केंद्रीय मंत्री के रूप में लंबे करियर के बाद सक्रिय राजनीति से दूर हो रहे हैं. कुछ ही महीनों में होने वाले विधानसभा चुनावों के बीच बैस के महाराष्ट्र से जाने से अटकलों का बाजार गर्म हो गया है. उनके उत्तराधिकारी राधाकृष्णन, जो पहले झारखंड और तेलंगाना के राज्यपाल रह चुके हैं, अपने संवैधानिक ज्ञान और पार्टी लाइन से परे सम्मान के लिए जाने जाते हैं, जो महाराष्ट्र के जटिल राजनीतिक परिदृश्य को समझने के लिए महत्वपूर्ण है.

