पीएम नरेंद्र मोदी ने हाल के दिनों में अलग-अलग देशों के कई शीर्ष नेताओं के साथ कार यात्रा की और इनके के जरिए पीएम मोदी ने दो देशों के बीच दोस्ताने संबंध को दिखाने की कोशिश की है.
इसी क्रम में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बाद अब जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ पीएम मोदी ने कार यात्रा की है.
12 जनवरी को जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज अपनी पहली दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचे. इसी दौरान दोनों नेता एक कार में सवार नजर आए. औपचारिक बैठकों के अलावा, दोनों नेताओं ने एक साथ पतंग उड़ाई, अहमदाबाद में साबरमती आश्रम का दौरा किया और भारत-जर्मनी के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा की.
गांधीनगर में मीडिया को संबोधित करते हुए मर्ज ने कहा कि भारत जर्मनी के लिए एक प्रमुख और पसंदीदा पार्टनर है. उन्होंने भारत-जर्मनी संबंधों को उच्च रणनीतिक स्तर पर ले जाने के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता व्यक्त की. उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत को जल्द से जल्द पूरा करने की बात भी कही है.
मर्ज ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार संबंध ज्यादा गहरे और परिपक्व होंगे. इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती मिलेगी.
उन्होंने आगे कहा, "हम अपने रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ाना चाहते हैं. इसका रणनीतिक महत्व है. यही कारण है कि हमने विकास, उत्पादन, इनोवेशन और इंटरनेशनल सप्लाई चेन को मजबूत करने में नजदीकी सहयोग के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं."
मर्ज ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ को मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत को पूरा करना चाहिए. उन्होंने बताया कि समझौते पर हस्ताक्षर करने के उद्देश्य से कई यूरोपीय नेता आने वाले महीनों में भारत का दौरा करने वाले हैं. उन्होंने वैश्विक व्यापार की अनिश्चितता के इस दौर में आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया है.
मर्ज ने कहा कि दुनिया में संरक्षणवाद बढ़ रहा है. दरअसल, संरक्षणवाद एक ऐसी आर्थिक नीति है जिसमें सरकार अपने घरेलू उद्योगों और नौकरियों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए आयातित वस्तुओं पर एक्स्ट्रा टैरिफ लगाती है. इस दौर में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और जर्मनी के बीच सप्लाई चेन पर इसका असर नहीं पड़ना चाहिए.
उन्होंने कहा कि दोनों देश आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने और कमजोरियों को कम करने के लिए खुले, विविध और लचीले व्यापार ढांचों का समर्थन करते हैं. भारत और जर्मनी को मजबूत और बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं वाले दो बड़े लोकतंत्र बताते हुए मर्ज ने कहा कि दोनों देशों के बीच करीबी आर्थिक संबंध स्वाभाविक हैं.
मर्ज के बयान के कुछ ही समय बाद, मोदी ने भारत-जर्मनी CEO फोरम में बोलते हुए घोषणा की कि भारत और जर्मनी ने अपनी आर्थिक साझेदारी को एक "असीमित" सहयोग में बदलने और रणनीतिक क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा सहयोग करने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि मर्ज ने एशिया की अपनी पहली यात्रा के लिए भारत को चुना, जो जर्मनी की रणनीति में भारत की भूमिका और विश्वास को दिखाता है.
उन्होंने कहा, “हमने इस आर्थिक साझेदारी को असीमित बनाने का निर्णय लिया है. इसका अर्थ यह है कि पारंपरिक आर्थिक क्षेत्रों के साथ-साथ अब रणनीतिक क्षेत्रों में भी गहरा सहयोग होगा. रक्षा क्षेत्र में, हम आज एक संयुक्त घोषणापत्र एक-दूसरे को दे रहे हैं.”
भारत और जर्मनी ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) को अपना समर्थन दिया है. IMEC की पहली मंत्रिस्तरीय बैठक जल्द ही होने वाली है. दोनों देशों के संयुक्त बयान के मुताबिक, मोदी और मर्ज दोनों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप विकसित करने के लिए संयुक्त आशय घोषणापत्र पर हस्ताक्षर का स्वागत किया है.
इसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी साझेदारी और रक्षा प्लेटफार्मों और उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन सहित दीर्घकालिक उद्योग-स्तरीय सहयोग को बढ़ावा देना है. भारत ने रक्षा उपकरणों के शीघ्र निर्यात मंजूरी में सहायता के लिए जर्मनी के प्रयासों का स्वागत किया.
दोनों नेताओं ने पनडुब्बियों, हेलीकॉप्टरों के लिए बाधा टालने वाली प्रणालियों (obstacle avoidance systems) तथा काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (C-UAS) में जारी सहयोग की प्रशंसा की. उन्होंने साझा लक्ष्यों पर आधारित संबंध विकसित करके रक्षा क्षेत्र में औद्योगिक सहयोग को और मजबूत करने की उम्मीद जताई. इसमें भारत की कुशल श्रमशक्ति और लागत व जर्मनी की उच्च तकनीक और निवेश की भूमिका प्रमुख होगी.
जहां जर्मनी ने सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी-आईओआर) में एक संपर्क अधिकारी तैनात करने की घोषणा की है. वहीं यह भी घोषित किया गया है कि दोनों देश एक नया ट्रैक 1.5 विदेश नीति और सुरक्षा संवाद स्थापित करेंगे.
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भारत और जर्मनी के बीच बढ़ते तालमेल का जिक्र करते हुए घोषणा की कि मोदी इस साल भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी परामर्श (IGC) के लिए जर्मनी का दौरा करेंगे. उन्होंने कहा कि जर्मनी ने भारत को रक्षा निर्यात की प्रक्रिया को आसान बना दिया है क्योंकि हमारी रक्षा खरीद राष्ट्रीय हित से प्रेरित है, न कि विचारधारा से.
मर्ज की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों देश रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष और राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं. इस यात्रा के कम से कम 27 विषयों पर बातचीत हुई है, जिनमें सेमीकंडक्टर और AI पर समझ के साथ-साथ जर्मनी से होकर गुजरने वाले भारतीयों के लिए वीजा-मुक्त सुविधा शामिल है.
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को देखते हुए, मर्ज की यात्रा दो प्रमुख आर्थिक शक्तियों के मिलन को दिखाती है. दोनों देशों के बीच व्यापार 2024-25 में 51.23 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे जर्मनी भारत का सबसे बड़ा यूरोपीय संघ व्यापारिक भागीदार बन गया. भारत-यूरोपीय संघ व्यापार का एक चौथाई हिस्सा जर्मनी का रहा है, जिसमें सर्विस सेक्टर की भूमिका 12.5 फीसदी बढ़कर 16.65 अरब डॉलर हो गया.
भारत के निर्यात में मशीनरी, वस्त्र, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोलियम, इस्पात, इलेक्ट्रॉनिक्स, चमड़ा और वस्त्र शामिल हैं, जबकि जर्मनी मशीनरी, वाहन, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, धातु, प्लास्टिक, रबर उत्पाद और फार्मास्यूटिकल्स का निर्यात करता है.
जर्मनी, भारत में विदेशी निवेश का नौवां सबसे बड़ा स्रोत है, जहां वर्ष 2000 से अब तक कुल 15.4 अरब डॉलर और 2024-25 में 469 मिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ है. जर्मनी में 2,000 से अधिक कंपनियां कार्यरत हैं, जबकि 215 से अधिक भारतीय कंपनियां जर्मनी में काम कर रही हैं.
दोनों देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, डिजिटल और क्वांटम प्रौद्योगिकियों जैसे उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग करते हैं और जर्मन कंपनियां भारत में वैश्विक क्षमता केंद्र स्थापित कर रही हैं. भारत-जर्मन ऊर्जा मंच और वैश्विक पुनर्निवेश शिखर सम्मेलन के माध्यम से ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में सतत विकास सहयोग जारी है, जबकि 2022 में हुए समझौते के तहत स्किल एजुकेशन, व्यावसायिक प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देता है.
हरित और सतत विकास साझेदारी के तहत, जर्मनी ने 2030 तक 10 अरब यूरो का निवेश करने का संकल्प लिया है. इसका उद्देश्य रिन्यूएबल एनर्जी, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में मिलकर काम करना है.
इसके तहत दिसंबर 2025 में हरित शहरी गतिशीलता, स्वच्छ ऊर्जा, संसाधन प्रबंधन और शहरी अवसंरचना के लिए 1.24 अरब यूरो का वादा शामिल है. जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, शहरी विकास, जल, कृषि, मेट्रो प्रणाली, हरित ऊर्जा गलियारे, कोच्चि जल परिवहन और GIZ की कई पहलें शामिल हैं.
मई 2025 में जर्मनी की नई सरकार बनने के बाद से, मोदी और मर्ज ने लगातार एक-दूसरे से संपर्क बनाए रखा है, जिसमें 20 मई को फोन पर हुई बातचीत और कनाडा में G7 (17 जून) और जोहान्सबर्ग में G20 (22 नवंबर) में हुई बैठकें शामिल हैं.
भारत और जर्मनी बहुपक्षीय मंचों पर भी एक-दूसरे का साथ देते हैं. इनमें G4 (ब्राजील, जर्मनी, भारत और जापान) के तहत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार के लिए समर्थन शामिल है.
वहीं, भारत जर्मनी को अपनी ‘विकसित भारत’ की महत्वाकांक्षा में एक महत्वपूर्ण साझेदार मानता है. यहां 2,000 से ज्यादा जर्मन कंपनियां ‘मेक इन इंडिया’ पहल और विभिन्न हरित परियोजनाओं का समर्थन कर रही हैं, जैसे ग्रीन हाइड्रोजन, सतत शहरी परिवहन, मेट्रो सिस्टम और सौर ऊर्जा परियोजनाएं.
रक्षा क्षेत्र में संबंध और गहरे हो गए हैं. टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में साझेदारी, निर्यात नियंत्रणों में छूट, MALABAR 2025 तथा TARANG SHAKTI-1 जैसे संयुक्त अभ्यासों में भागीदारी के अलावा दोनों देशों की नौसेनाओं की पारस्परिक बंदरगाह यात्राएं होती हैं. इसके अलावा, संस्थागत स्तर पर सैन्य सहयोग, आतंकवाद विरोधी सहयोग रक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के आपसी मजबूत संबंध को दिखाता है.
जर्मनी में लगभग 60,000 भारतीय छात्र पढ़ रहे हैं, जो पांच साल पहले की तुलना में दोगुने हैं. इस तरह वे विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा समूह बन गए हैं. सात समझौते संयुक्त और दोहरी डिग्री कार्यक्रमों के तहत किए गए हैं.
इसके जरिए दोनों देशों के शिक्षण संस्थानों के छात्र एक-दूसरे संस्थानों में जाकर बेहतर नॉलेज हासिल करेंगे. इनमें आईआईटी मद्रास और RWTH आचेन के बीच का एक समझौता भी शामिल है, जिसमें 300 से अधिक छात्र शामिल होंगे.
जर्मनी भारतीय छात्रों और कुशल पेशेवरों के लिए एक पसंदीदा जगह बन गया है, जिसका जर्मन सरकार ने स्वागत किया है. इससे दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को मजबूती मिलती है. जर्मनी में भारतीय मूल के लगभग 300,000 लोग और पासपोर्ट धारक हैं, जिनमें छात्र, नौकरी करने वाले लोग, रिसर्चर, व्यवसायी, नर्स और आईटी और वित्त विशेषज्ञों की बढ़ती संख्या शामिल है.

