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कहीं बेहतर शिक्षा, कहीं रोजगार संकट: चुनावी राज्यों की जमीनी हकीकत

पांच प्रदेशों में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गई है. ऐसे में सरकारी रिपोर्टों के हवाले से समझते हैं कि शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी जैसे बुनियादी क्षेत्रों में इन प्रदेशों ने कैसा प्रदर्शन किया है

पांच चुनावी राज्यों का रिपोर्ट कार्ड (Photo-ITG)
पांच चुनावी राज्यों का रिपोर्ट कार्ड (Photo-ITG)
अपडेटेड 20 मार्च , 2026

अप्रैल 2026 में 5 प्रदेशों- पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं. 15 मार्च को चुनाव आयोग ने इसकी घोषणा की. हालांकि, घोषणा से पहले ही इन राज्यों में सियासी तापमान बढ़ चुका था.

एक तरफ हिमंता बिस्वा सरमा खुद को असम के लोगों का मामा बताने लगे, दूसरी तरफ ममता बनर्जी वोटर लिस्ट से काटे गए नामों के खिलाफ धरने पर बैठ गईं.

स्टालिन ने ‘भगवा भीड़’ कहकर BJP पर दक्षिणी प्रदेशों को निगलने का आरोप लगाया, तो केरल CM पिनरायी विजयन ने कांग्रेस को BJP की टीम B बता दिया. लेकिन, इन सबके बीच चुनावी प्रदेशों के सरकार के काम-काज की समीक्षा और चर्चा काफी कम है.

ऐसे में हमने इन चुनावी प्रदेशों को 5 पैमानों गरीबी, रोजगार, महिला सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य के आधार पर जांचा है. इसमें कुछ चौंकाने वाले नतीजे दिखे हैं. मसलन महिला सुरक्षा के मामले में ममता बनर्जी की सरकार फिसड्डी साबित हुई. 

वहीं, स्वास्थ्य सुविधाओं और गरीबी मिटाने में असम का प्रदर्शन सबसे ज्यादा खराब है. सरकारी आंकड़ों के हवाले से पढ़िए पांचों चुनावी प्रदेशों का रिपोर्टकार्ड-  

पांच चुनावी राज्यों का रिपोर्ट कार्ड

 पांचों चुनावी प्रदेशों में  केरल की साक्षरता दर सबसे ज्यादा है. इसके बावजूद यहां की कुल आबादी में से केवल 56.5 फीसद लोगों के पास रोजगार है. वहीं लोगों को काम देने के मामले में असम और बंगाल की सरकार ने ज्यादा बेहतर प्रदर्शन किया है.

केरल के अर्थशास्त्री बिनॉय पीटर कहते हैं कि शिक्षित केरलवासी सेमी-स्किल्ड जॉब्स लेने से कतराते हैं, जबकि माइग्रेंट वर्कर्स इन्हें खुशी से करते हैं.

पीटर का मानना है कि केरल के युवा काफी पढ़े लिखे हैं. वे बाहर जाकर नौकरी करते हैं. राज्य में बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है, जो रिटायर हो चुके हैं और अब काम नहीं करना चाहते. जबकि दूसरे प्रदेशों में रहने वाली आबादी को अपने खाने-पीने और जीने के लिए काम करना होता है. वह संगठित या असंगठित क्षेत्रों में काम कर जीवन यापन करते हैं. भले ही उन्हें मेहनत से काफी कम पैसा मिल रहा हो.   

केवल शिशु मृत्यु दर से किसी राज्य में स्वास्थ्य की स्थिति को नहीं आंका जा सकता है. लेकिन यह एक बड़ा पैमाना जरूर है.

ऐसे में स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में कौन राज्य बेहतर हैं, इसकी शिनाख्त नीति आयोग की हेल्थ इंडेक्स 2023 की रिपोर्ट से करते हैं. इसके बाद आयोग ने हेल्थ इंडेक्स जारी नहीं किया है.

अगर पांचों प्रदेशों में ऑवर ऑल हेल्थ की बात की जाए तो केरल टॉप पर है. आयोग ने 2023 में देश के प्रदेशों को वहां की स्वास्थ्य सुविधाओं के आधार पर नंबर दिए थे, साथ ही यह भी बताया था कि किस राज्य ने सबसे ज्यादा तरक्की की है.

बेहतर सुविधाओं के मामले में केरल पहले तो दूसरे नंबर पर तमिलनाडू रहा. वहीं असम ने स्थिति सुधारते हुए 15वें से 12वीं पॉजिशन हासिल की. वहीं पश्चिम बंगाल की सरकार ने नीति आयोग को डाटा नहीं दिया था, जिसके चलते वहां की स्वास्थ्य स्थिति का आंकलन नहीं हो पाया.

 

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) ने 2024 की अपनी रिपोर्ट में कहा था कि उच्च साक्षरता वाले प्रदेशों जैसे केरल में रिपोर्टिंग ज्यादा होती है, जिससे यहां महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े मामले ज्यादा दर्ज होते हैं. यह सुरक्षा की कमी नहीं, बल्कि बेहतर रिपोर्टिंग का संकेत है. 

रिपोर्ट के मुताबिक, यहां महिलाएं अपराध रिपोर्ट करने में ज्यादा सक्रिय हैं क्योंकि साक्षरता (92%), मीडिया जागरूकता, महिला हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर्स और पुलिस की महिला-फ्रेंडली यूनिट्स बेहतर हैं. जबकि, अन्य प्रदेशों में महिलाओं से जुड़े अपराधों को सामाजिक कलंक मानकर छिपाया जाता है. पुलिस पर भरोसा की कमी या जानकारी न होना भी कुछ प्रदेशों में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले कम रजिस्टर होने के एक कारण हैं.

हेमा कमिटी ने महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़ी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि काम करने वाले जगहों पर छेड़छाड़, घरेलू हिंसा और शराब या नशा से जुड़े अपराधों के कारण भी डेवलप स्टेट में इस तरह की ज्यादा घटनाएं सामने आती हैं

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