
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की पहचान रखने वाला भारत अपनी चुनावी प्रक्रिया को अब केवल अपने 96 करोड़ मतदाताओं तक ही सीमित नहीं रखना चाहता. भारत ने पूरी दुनिया को अपनी चुनावी प्रक्रियाओं को देखने, समझने और अनुभव करने के लिए आमंत्रित किया है.
इसके लिए भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने 'इंटरनेशनल इलेक्शन विजिटर्स प्रोग्राम 2026' की शुरुआत की है. इस कार्यक्रम के तहत विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों को भारत में चुनावों के संचालन की प्रक्रिया को समझने और उसका प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने का अवसर दिया जा रहा है.
इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को भारत की चुनावी प्रणाली, तकनीकी इनोवेशन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से परिचित कराना है, जो स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. कार्यक्रम के दौरान प्रतिनिधियों को पांच चुनावी राज्यों का दौरा भी कराया जा रहा है.
आयोग ने 7 अप्रैल, 2026 को इंटरनेशनल इलेक्शन विजिटर्स प्रोग्राम-2026 की औपचारिक शुरुआत की. नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM) में आयोजित इस कार्यक्रम ने वैश्विक लोकतंत्र प्रेमियों के एक समूह को भारत की चुनावी मशीनरी को समझने का अवसर दिया.

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. एसएस संधु और डॉ. विवेक जोशी ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया. अपने संबोधन में ज्ञानेश कुमार ने कहा, "चुनाव आयोग भारत में चुनावों को लोकतंत्र के त्योहार के रूप में देखता है और इसे मिशन मोड में सुनिश्चित करने के लिए कार्य करता है." उन्होंने विदेशी प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे राज्यों में हो रहे चुनावों के दौरान सीखें, देखें और भारत की विविधता को करीब से महसूस करें.
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते सिर्फ चुनाव नहीं कराता, बल्कि अपनी चुनावी व्यवस्था को एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है. इसी कड़ी में यह कार्यक्रम शुरू किया गया है. यह अन्य देशों की चुनाव संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है.
आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक, इस कार्यक्रम के पहले चरण में 23 देशों के 43 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं. इनमें दिल्ली स्थित पांच विदेशी मिशनों के अधिकारी भी शामिल हैं.

IIIDEM में इन प्रतिनिधियों को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और VVPAT का लाइव डेमो दिया गया. उन्होंने खुद मॉक पोल में भाग लेकर वोटिंग प्रक्रिया का अनुभव लिया. विशेषज्ञों के साथ इंटरैक्टिव सत्र में प्रतिनिधियों ने अपनी आशंकाएं सामने रखीं और सवाल भी पूछे. विदेशी प्रतिनिधि भारत की चुनावी प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली तकनीक, जैसे डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम, मीडिया मॉनिटरिंग और रियल-टाइम कंट्रोल रूम में खास तौर पर रुचि दिखा रहे हैं.
यह कार्यक्रम दो चरणों में आयोजित है. पहले चरण में 9 अप्रैल, 2026 को प्रतिनिधि असम, केरल और पुदुचेरी का दौरा करेंगे. वे मतदान सामग्री के डिस्पैच और डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर, जिला कंट्रोल रूम और मीडिया मॉनिटरिंग सेंटर आदि का निरीक्षण करेंगे. 9 अप्रैल की सुबह वे मतदान प्रक्रिया के प्रत्यक्ष साक्षी भी बनेंगे. दूसरे चरण में 20 अप्रैल, 2026 से ये प्रतिनिधि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जाएंगे. इस तरह यह पूरा कार्यक्रम विधानसभा चुनावों वाले पांच राज्यों को कवर करेगा.
चुनाव आयोग अपनी इस पहल को इसलिए भी महत्वपूर्ण मान रहा है, क्योंकि देश में एक राजनीतिक वर्ग लगातार आयोग और चुनाव प्रक्रियाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है. ऐसे में आयोग की सोच यह भी है कि इन सवालों की वजह से विदेशों में भारतीय चुनावी प्रक्रिया को लेकर कोई नकारात्मक नैरेटिव न बने. आयोग को लगता है कि विदेशी प्रतिनिधियों को प्रत्यक्ष अनुभव दिलाने से वैश्विक स्तर पर चुनाव प्रक्रिया के बारे में एक सकारात्मक माहौल बनेगा.

