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फ्लाइट में 60 फीसद सीटों के फ्री सिलेक्शन के नए नियम से एयरलाइंस कंपनियां क्यों हैं परेशान?

सरकार ने कहा है कि हर फ्लाइट में कम से कम 60 फीसद सीटें बिना अतिरिक्त चार्ज के चुनने के लिए उपलब्ध होंगी. इससे एयरलाइंस को सीट सिलेक्शन से होने वाली कमाई का नुकसान हो सकता है

हवाई यात्रा के दौरान 60 फीसद सीटों के चयन पर अब अतिरिक्त पैसे नहीं लगेंगे (फाइल फोटो)
हवाई यात्रा के दौरान 60 फीसद सीटों के चयन पर अब अतिरिक्त पैसे नहीं लगेंगे (फाइल फोटो)
अपडेटेड 20 मार्च , 2026

18 मार्च को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर ट्रैवल को और आसान बनाने के लिए नए निर्देश जारी किए हैं. मंत्रालय ने कहा कि किसी भी फ्लाइट में कम से कम 60 फीसदी सीटें बिना अतिरिक्त शुल्क लिए उपलब्ध करानी होंगी, ताकि सभी यात्रियों को बराबरी का मौका मिले.

मंत्रालय के इस दिशा-निर्देश को कई सालों में यात्री सुरक्षा के लिए सबसे अहम कदमों में से एक माना जा रहा है. सरकारी निर्देश में यह भी कहा गया है कि एक साथ यात्रा करने वाले परिवारों को बिना अतिरिक्त पैसे के पास-पास सीटें दी जाएं.

इसके अलावा, बुकिंग प्लेटफॉर्म्स और एयरपोर्ट काउंटर पर यात्री अधिकारों की जानकारी क्षेत्रीय भाषाओं में प्रमुखता से देनी होगी. कुछ हफ्ते पहले ही सरकार ने नियम बनाया था कि टिकट बुक करने के 48 घंटे के अंदर आप बिना अतिरिक्त पैसे दिए टिकट कैंसल कर सकते हैं. अब 18 मार्च को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने नया नियम जारी किया है, जो यात्रियों के लिए बेहद सुखद है.  

सरकार के इस फैसले से एयरलाइंस कंपनी को सीट चुनने, एक्स्ट्रा सामान आदि से होने वाली अतिरिक्त आमदनी कम हो जाएगी. खासकर लो-कॉस्ट एयरलाइंस (जैसे IndiGo) इन तरीकों से बहुत कमाई करती हैं. एक तरह से सरकार का यह निर्देश यात्रियों के हक में है, लेकिन एयरलाइंस के लिए टिकट के अलावा वाली कमाई पर बड़ा चोट माना जा रहा है.

अब तक यात्रियों को टिकट बुक करने के अलावा, आयल सीट या थोड़ी-सा भी ज़्यादा लेगरूम वाली सीट चुनने पर अतिरिक्त पैसे देने होते हैं. इतना ही नहीं पालतू जानवरों, खेल के सामान और संगीत वाद्ययंत्रों के लिए भी एयरलाइंस कंपनियां अतिरिक्त पैसा वसूलती हैं. यात्रियों को अक्सर एयरलाइन के नियमों और शर्तों में छिपी नीतियों के जाल में फंसना पड़ता है. हालांकि, सामानों और पालतू जानवरों के लिए वसूले जा रहे अतिरिक्त पैसे पर सरकार ने कंपनियों को फिलहाल सिर्फ साफ-साफ नियम बनाने के लिए कहा है.

नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने नए निर्देश को यात्रियों के लिए "सुविधाजनक" बताया है. उन्होंने कहा, "हमने यात्रियों को और अधिक सुविधा प्रदान करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं. 60 फीसद सीटें मुफ्त, परिवारों के साथ बैठने की सुनिश्चित व्यवस्था  करने के साथ ही खेल उपकरण, संगीत वाद्ययंत्र और पालतू जानवरों को ले जाने के लिए स्पष्ट और पारदर्शी नियम बनाने के निर्देश दिए गए हैं."

सरकार ने एयरलाइंस कंपनियों को यात्रियों के अधिकारों को रेखांकित करने वाले मौजूदा ढांचे का सख्ती से पालन करने का भी आदेश दिया है. इसमें फ्लाइट की देरी, रद्द होने और बोर्डिंग से इनकार करने से संबंधित साफ नियम लिखे हैं. साथ ही इनसे जुड़े हर अपडेट को DGCA समेत दूसरे कार्यालयों, ऐप्स और हवाई अड्डे के काउंटरों पर प्रमुखता से प्रदर्शित करने का भी आदेश दिया गया है.

इस आदेश के कंपनियों पर वित्तीय असर पड़ेंगे. भारत की एयरलाइंस कंपनी इन अतिरिक्त आय को अपने व्यापार मॉडल का एक प्रमुख जरिया मानती है. विश्व भर की कम लागत वाली एयरलाइंस के लिए कुल सहायक राजस्व का 20-30 फीसद हिस्सा सीट चयन से आता है. उदाहरण के लिए, इंडिगो की सहायक आय वित्त वर्ष 2023 में लगभग 5,400 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में लगभग 6,500 करोड़ रुपए हो गई (20 फीसद से अधिक की वृद्धि). इसमें सीट चयन शुल्क, जो प्रति बुकिंग 300 रुपए से 2,000 रुपए तक हो सकता है, इस आय का एक बड़ा हिस्सा था.

एयरलाइंस अब अधिकांश मार्गों पर अपनी 60 फीसद सीटों को छोड़कर बाकी सभी सीटों पर सीट चयन के लिए शुल्क ले सकती हैं. एक सर्वे से पता चला है कि 44-65 फीसद भारतीय हवाई यात्रियों से सीट सेवाओं के लिए अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है, इसलिए साफ है कि यात्रियों के जरिए नई नीति को पसंद किया जाएगा.

एयरलाइंस इंडस्ट्री से जुड़े विश्लेषकों का कहना है कि इस कदम से प्रति उड़ान सीट शुल्क से होने वाली अतिरिक्त आय आधी होकर 30 फीसद तक कम हो सकती है. इंडिगो की प्रतिदिन 1,000 से अधिक उड़ानें हैं और हाल ही में 10 करोड़ यात्रियों का आंकड़ा पार कर चुकी है. इन आंकड़ों को देखकर ऐसा लगता है कि इससे कंपनी को सैकड़ों करोड़ का घाटा हो सकता है.  

एयरलाइन कंपनियां सामान शुल्क, भोजन में छूट या मूल किराए में मामूली वृद्धि करके इसकी भरपाई करने का प्रयास कर सकती हैं. हालांकि, बढ़े हुए किराए नागरिक उड्डयन मंत्रालय की निगरानी में रहेंगे, जिसने पहले लागत बढ़ने पर एयरलाइनों को मूल्य निर्धारण डेटा जारी करने का आदेश दिया था.

एयरलाइंस की निश्चित लागतें बहुत अधिक होती हैं. ईंधन, लीज और क्रू पर कंपनियां काफी पैसे खर्च करती हैं. इसके कारण ठीक-ठाक आय के बावजूद उनका मार्जिन बहुत कम होता है. IndiGo की वित्त वर्ष 2024 की तीसरी तिमाही में टिकट के अलावा अतिरिक्त कमाई कुल ऑपरेशंस का 9 फीसद था. यह आंकड़ा कम लगता है, लेकिन जब आप जानते हैं कि 2026 के अनुमानों में पूरी दुनिया की एविएशन इंडस्ट्री का औसत नेट मार्जिन सिर्फ 3.9 फीसद रहा, तो समझ आता है कि यह 9 फीसद वाली अतिरिक्त कमाई कितनी महत्वपूर्ण है. अब यह अतिरिक्त आय खत्म होने पर कंपनी की प्रॉफिट मार्जिन और भी कम जाएगा.

मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष से तेल की सप्लाई चेन पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें बढ़ रही हैं. भारतीय एयरलाइन पर भी इसका असर पड़ना तय है. ऐसे में आने वाले दिनों में हवाई किराया और बढ़ सकता है. एक एयरलाइन अधिकारी ने कहा, “इस समस्या के हल का एक ही तरीका है कि बेस फेयर (टिकट की मूल कीमत) बढ़ा दी जाए.”

सीटों की कितनी संख्या रिजर्व की जा सकती है, इसके अलावा मिनिस्ट्री ने एयरलाइंस को यह भी निर्देश दिया है कि वे पेट्स (पालतू जानवर), स्पोर्ट्स इक्विपमेंट (खेल का सामान) और म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स (संगीत वाद्ययंत्र) ले जाने के नियमों को साफ-साफ बताएं.

भारतीय एविएशन में ये चीजें सालों से ग्रे एरिया रही हैं, जहां नियम अलग-अलग तरीके से लागू होते थे. यह नियम इन चीजों के लिए फीस खत्म नहीं करता, लेकिन यह जरूरी करता है कि नियम स्पष्ट और पहले से ही दिखाए जाएं. एयरलाइंस इन नियमों को कितनी आसानी से लागू करती हैं या फिर चालाकी करती हैं, यह देखने वाली बात होगी.  

हाल के वर्षों में भारत में प्रतिदिन 5 लाख से अधिक घरेलू हवाई यात्रियों ने हवाई यात्रा की है. यह संख्या देश के मध्यम वर्ग में हवाई यात्रा को लेकर बढ़ते दिलचस्पी के साथ और तेजी से बढ़ रही है. सरकार का मानना ​​है कि जैसे-जैसे हवाई यात्रा करना एक आम बात होती जा रही है, वैसे-वैसे यात्रा के अनुभव से जुड़े मुद्दे- जैसे सीट चुनने का अधिकार किसे मिलेगा, उड़ान में देरी होने पर अपने अधिकारों की जानकारी आदि, केवल व्यावसायिक मुद्दा नहीं, बल्कि सियासी मुद्दा भी बन जाते हैं. साथ ही सरकार ने उम्मीद जताई है कि कंपनियां नए दिशा-निर्देश को जल्द और स्पष्टता के साथ लागू करेंगी. 

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