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बजट 2026: आएगी इन नए हथियारों की खेप; चीन, पाक और बांग्लादेश के खिलाफ भारत ने कमर कसी

पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश लगातार अपने डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए नई-नई खरीद कर रहे हैं. ऐसे में भारत के लिए चाक-चौबंद रहना जरूरी है

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
अपडेटेड 2 फ़रवरी , 2026

बजट 2026 के बाद देश के डिफेंस खर्चों की ओर की गई भारी बढ़ोतरी से यह अब साफ है कि दुनियाभर में चल रही राजनीतिक उठापटक, और उससे उपजी चुनौतियों के बीच भारत खुद को किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रखना चाहता है. बीते वित्त-वर्ष के 6.81 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर इस साल इसे 7.84 करोड़ कर दिया गया है जो कि लगभग 15 फीसद की बढ़त है. 

कुल डिफेंस बजट में से 2.19 लाख करोड़ रुपए आधुनिकीकरण के लिए अलग किए गए हैं. इसे इस वर्ष होने वाली बड़ी खरीदों के लिए अलग किया है. जैसे, रफाल फाइटर जेट, पनडुब्बियां और और ऐसे हवाई वाहन जिन्हें इंसान खुद बिना हवा में गए, धरती से ही कंट्रोल कर सकते हैं (जैसे, ड्रोन). आधुनिकीकरण के लिए अलग किया गया हिस्सा भी पिछले बजट के मुकाबले 22 फीसद ज्यादा है. 

हालांकि यह बढ़ा हुआ बजट भी वित्त वर्ष 2026-27 की अनुमानित जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के कुल खर्च का लगभग 2 फीसद ही बैठता है. जबकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन और पाकिस्तान जैसे खतरों से लड़ने के लिए कम से कम इसे 2.5 फीसद होना चाहिए.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारतीय सेना खुद को पहले से भी अधिक मजबूत करने में लगी हुई है, जिसकी वजह भारत के आस-पड़ोस में हो रहे भारी बदलाव हैं जो देश की सुरक्षा पर सीधा असर डाल सकते हैं. इसके अलावा, पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश भी लगातार अपने डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए नई-नई खरीद कर रहे हैं. ऐसे में भारत के लिए चाक-चौबंद रहना जरूरी है.

पाकिस्तान भी अपने सेना के लिए लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों और मानव-रहित हवाई वाहनों को खरीदकर खुद को मजबूत कर रहा है. इनमें से अधिकतर चीन और तुर्की से खरीदे जा रहे हैं. चीन तो पहले से ही दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश होने के साथ-साथ दुनिया का प्रमुख हथियार निर्यातक भी है. अब भारत का यह पड़ोसी, दक्षिण एशिया में हथियार सप्लाई कर और लंबी सैन्य-साझेदारियां कर खुद की पकड़ और मजबूत कर रहा है. 

इधर बांग्लादेश भी अपने '2030 फोर्सेज गोल' प्रोग्राम के तहत आधुनिकीकरण में जुटा हुआ है. ढाका जल्द ही चीन से हजारों करोड़ की डील करने वाला है जिसके तहत वह चीन का चेंगदू-जे 10सीई  फाइटर एयरक्राफ्ट खरीदेगा, साथ ही उनके मिसाइल सिस्टम का भी जायजा लेगा. अपने ही देश में मानव-रहित हवाई वाहन बनाने के लिए बांग्लादेश चीन से पहले ही डील साइन कर चुका है. इतना ही नहीं, भारत की पूर्वी सीमा का बड़ा हिस्सा साझा करने वाला यह देश, पाकिस्तान के जेएफ-17 फाइटर जेट खरीदने पर भी विचार कर रहा है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता को बढ़ाने की योजना पर अमल करते हुए, रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए अलग किया गया बजट काफी बढ़ा दिया गया है. यह पिछले वित्त वर्ष में 14,923 करोड़ से बढ़कर 17,250 करोड़ (लगभग 15.5 फीसद ज्यादा) हो गया है. इसका मकसद  भारत की डिजाइन, डेवलपमेंट और इनोवेशन की क्षमताओं को बढ़ाना है.  

वायुसेना की बात करें तो पिछले वित्त-वर्ष के 48,000 करोड़ के मुकाबले इसका बजट बढ़ाकर इस साल 72,000 करोड़ कर दिया गया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर 114 रफाल विमान खरीदने की डील आगे बढ़ती है तो उसका शुरूआती खर्च इस बढ़े हुए बजट से पूरा किया जाएगा. इस मामले में डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ( डिफेंस सेक्रेटरी जिसके अध्यक्ष हैं) ने पहले ही भारतीय वायुसेना के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. अब दो स्तर पर मंजूरी मिलना बाकी रहता है. पहला, डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (रक्षा मंत्री के नेतृत्व में चलने वाला) और दूसरा, कैबिनेट रक्षा समिति, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसले लेने वाली देश की सर्वोच्च संस्था है.

डिफेंस बजट का जोर उन छोटे, मगर लगातार होने वाले खर्चों पर भी है जो हमें किसी भी विपरीत परिस्थिति में त्वरित जवाबी कार्यवाई के लिए तैयार करते हैं. मसलन: मेंटेनेंस, गोला-बारूद, ईंधन, मरम्मत, सपोर्ट स्टाफ की तनख्वाहें, वगैरह. इसीलिए, इस ओर अलग किए गए बजट में भी 17.24 फीसद की बढ़त देखी गई है. 

वहीं, डिफेंस पेंशन बिल 1.6 लाख करोड़ से बढ़कर 1.71 लाख करोड़ हो गया है, जो डिफेंस बजट का एक बड़ा हिस्सा है.

इसके अलावा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में डिफेंस सेक्टर की मदद करने की नीति के तहत एक और पेशकश की. लड़ाकू विमानों की मरम्मत और देख-रेख के लिए जो उत्पाद भारत में बनाए जाते हैं, उनके कच्चे माल के निर्यात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी नहीं भरनी होगी.  

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