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अब एक से दूसरे शहर जा पाएंगे समुद्री विमान से! और क्या सुविधाएं लेकर आया है बजट 2026?

बजट 2026 में सरकार ने ट्रांसपोर्ट के अलग-अलग माध्यमों जैसे- रेल, सड़क, जलमार्ग, हवाई सेवा को आपस में जोड़कर एक मजबूत, इंटरकनेक्टेड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क बनाने की बात कही है, ताकि यात्रा पहले से ज्यादा सुलभ और किफायती हो. साथ ही अर्थव्यवस्था को तेजी मिले.

साबरमती नदी पर विशेष विमान से उतरे पीएम मोदी (फाइल फोटो)
साबरमती नदी पर विशेष विमान से उतरे पीएम मोदी (फाइल फोटो)
अपडेटेड 2 फ़रवरी , 2026

उम्मीद मुताबिक ही, बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचा) एक अहम विषय बनकर उभरा. इस साल, सरकार का मुख्य उद्धेश्य यात्रियों के लिए हाइ-स्पीड रेल को बढ़ावा देना और माल ढुलाई (कार्गो) के लिए नई फ्रेट (माल गाड़ी) लाइनों का विस्तार करना है.

इसके साथ ही हाइवे, इनलैंड वाटरवेज (अंदरूनी जलमार्ग), पोर्ट्स (बंदरगाह) और यहां तक कि सीप्लेन पर भी नए निवेश को लेकर घोषणाएं की गई हैं. इस सब कुछ पर केंद्र सरकार ने 12.2 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड कैपिटल एक्सपेंडिचर (capex) खर्च करने की बात कही है.

इन कदमों को उठाने के पीछे केंद्र सरकार का इरादा है कि इंफ्रास्ट्रक्चर, अर्थव्यवस्था के लिए लंबे समय तक विकास का इंजन बना रहे.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश करते हुए सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की. इन्हें "ग्रोथ कनेक्टर्स" (विकास के कनेक्टर) कहा गया है. उन्होंने कहा. "पर्यावरण के अनुकूल यात्री सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए, हम शहरों के बीच सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करेंगे, जो 'ग्रोथ कनेक्टर्स' के रूप में काम करेंगे."

जब सीतारमण ने संसद में यह योजना पेश की, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेज थपथपाकर अपनी मंजूरी दी, जो इस घोषणा के राजनीतिक महत्व को दिखाता है. इन प्रस्तावित कॉरिडोर में मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी शामिल हैं.

ये प्रस्तावित कॉरिडोर भारत के सबसे घने आर्थिक केंद्रों और उभरते पूर्वी हिस्से को कवर करते हैं. सरकार हाई-स्पीड रेल को अपने लिए सिर्फ एक प्रतिष्ठा का प्रोजेक्ट नहीं मान रही, बल्कि इसे एक मजबूत कनेक्टिविटी नेटवर्क के रूप में देख रही है. इसका उद्देश्य आने वाले समय में शहरीकरण के पैटर्न को बदलना और औद्योगिक विकास को नई दिशा देना है.

रेलवे में एक बार फिर सार्वजनिक क्षेत्र के बाकी विभागों से ज्यादा इंवेस्टमेंट की बात कही गई है. बजट 2026 में इंडियन रेलवे को ₹2,93,030 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (capex) दिया गया है. यह इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए विकास को बढ़ावा देने और विकसित भारत के विजन को तेज करने के लिए है.

इसमें ₹2.78 लाख करोड़ का सरकारी अनुदान भी शामिल है. यह राशि रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के साथ ही सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए है. इसके अलावा ये भारत की अपनी पैसेंजर ट्रेनों का कायाकल्प करने की परिकल्पना को दिखाता है.

सड़क यातायात को बढ़ावा देने और बेहतर बनाने के लिए भी बजट में कई अहम घोषणा हुई हैं. सरकार ने 2026-27 के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को ₹3.09 लाख करोड़ आवंटित किए हैं, जो मौजूदा वित्तीय वर्ष के ₹2.87 लाख करोड़ से लगभग 8 फीसद ज्यादा हैं.

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को बजटरी सपोर्ट ₹1.7 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹1.87 लाख करोड़ कर दिया गया है. एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक,  31 मार्च को खत्म होने वाले वित्तीय वर्ष में  NHAI अपना कर्ज ₹2 लाख करोड़ के नीचे ले आने की योजना बना रहा है, जबकि हाइवे निर्माण बड़े पैमाने पर जारी रहेगा.

माल ढुलाई (फ्रेट) के क्षेत्र में बजट देश के पूर्वी हिस्से से पश्चिमी हिस्से तक एक नई डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की योजना पेश करता है. यह दांकुनी (पश्चिम बंगाल) से सूरत (गुजरात) तक जाएगा. इस कॉरिडोर का मकसद सप्लाइ चेन में आने वाली रुकावटों को कम करना है. साथ ही, माल ढुलाई की खर्च घटाना और ज्यादा से ज्यादा माल ढुलाई को रेलवे पर शिफ्ट कर सड़कों पर दबाव कम करना भी इसका प्रमुख उद्धेश्य है.

इनलैंड वाटरवेज (अंदरूनी जलमार्ग) के बड़े विस्तार से माल ढुलाई को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. सरकार ने अगले पांच वर्षों में 20 नए नेशनल वाटरवेज को चालू करने की योजना बनाई है. शुरुआत ओडिशा से होगी, जहां पहले पांच जलमार्ग शुरू होंगे. यह खनिज-समृद्ध इलाकों तालचेर और अंगुल को औद्योगिक केंद्रों जैसे कालिंगा नगर से जोड़ेगा. साथ ही पारादीप तथा धामरा बंदरगाहों से लिंक करेगा. इससे संसाधन वाले इलाकों और निर्यात केंद्रों (एक्सपोर्ट गेटवे) के बीच मजबूत कनेक्शन बनेगा, जो लॉजिस्टिक्स को बेहतर, सस्ता और पर्यावरण-अनुकूल बनाएगा.

पोर्ट्स, शिपिंग और इनलैंड वाटरवेज (अंदरूनी जलमार्ग) को बजट में पहले कम महत्व दिया जाता था, लेकिन इस बार इनके विकास के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने की बात कही गई है. सरकार ने वाराणसी और पटना में इनलैंड वाटरवेज के लिए विशेष शिप-रिपेयर इकोसिस्टम (जहाज मरम्मत व्यवस्था) बनाने की योजना बनाई है.

इससे नदियों पर चलने वाले जहाजों की मरम्मत आसान होगी और स्थानीय स्तर पर कुशल रोजगार भी बढ़ेगा. इसके अलावा कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम यानी तटीय माल ढुलाई प्रोत्साहन योजना की घोषणा की गई है. इसका लक्ष्य है कि माल ढुलाई में इनलैंड वाटरवेज और कोस्टल शिपिंग (तटीय जहाजों से माल ढुलाई) का हिस्सा 6 फीसद से बढ़ाकर 2047 तक 12 फीसद कर दिया जाए.

इससे रेल और सड़क पर दबाव कम होगा, लॉजिस्टिक्स सस्ती होगी. साथ ही पर्यावरण को भी फायदा होगा. इसके साथ ही ₹10,000 करोड़ की कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (कंटेनर निर्माण योजना) 5 सालों में लागू होगी. यह योजना घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर से बेहतर तरीके से जोड़ेगी, ताकि कंटेनर सस्ते और ज्यादा बन सकें.

सिविल एविएशन (नागरिक उड्डयन) सेक्टर पर भी इस बार खासा ध्यान दिया गया है. कनेक्टिविटी और क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सीप्लेन (समुद्री विमान) के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन दिए हैं. साथ ही वायबिलिटी गैप फंडिंग स्कीम से इनके संचालन को सपोर्ट किया जाएगा. यह एक ऐसा अनुदान होता है जो सरकार के जरिए किसी आधारभूत ढांचा परियोजना के लिए दिया जाता है.

इससे दूरदराज इलाकों में आखिरी छोर तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी और पर्यटन बढ़ेगा.  बजट में एयरक्राफ्ट (विमान) के पार्ट्स और कंपोनेंट्स पर कस्टम्स ड्यूटी छूट देने का भी प्रस्ताव है. इससे भारत विमान निर्माण और मेंटेनेंस (मरम्मत) में मजबूत बनेगा.

कुल-मिलाकर, बजट 2026 का इंफ्रास्ट्रक्चर पैकेज अलग-अलग क्षेत्रों के मुकाबले सभी साधनों का एक साझा ट्रांसपोर्ट नेटवर्क बनाने की ओर काम करेगा. इसमें शामिल है:

  • हाइ-स्पीड पैसेंजर रेल को फ्रेट यानी माल ढुलाई की मुख्य मार्ग से जोड़ना  
  • NHAI के कर्ज कम कर हाइवे व्यवस्था को मजबूत करना
  • वाटरवेज (जलमार्ग) को पोर्ट्स (बंदरगाहों) से लिंक करना
  • एविएशन (हवाई यात्रा) को छोटे-खास इलाकों की कनेक्टिविटी की तरफ बढ़ावा देना

बजट में लिए गए इन फैसलों का एक मुख्य फोकस टियर-II और टियर-III शहरों का विकास है, ताकि वे "ग्रोथ इंजन" बन जाएं. सरकार का प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा शहरों को सिटी इकोनॉमिक रीजन का हिस्सा बनाया जाएगा. यह रीजन आसपास के इलाकों की अर्थव्यवस्था को एक साथ जोड़ेगा और बेहतर प्लानिंग करेगा. प्रत्येक सिटी इकोनॉमिक रीजन को 5 साल में ₹5,000 करोड़ मिलेंगे. यह धन रिफॉर्म-लिंक्ड चैलेंज मोड से आएगा, जिसमें राज्यों और स्थानीय निकायों को बेहतर प्लानिंग और रिजल्ट्स दिखाने पर फंड मिलेगा.

बजट में प्राइवेट निवेश पर भी बड़ा जोर है. पुरानी कमियों को दूर करने के लिए नया इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड बनाया जाएगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, इससे प्राइवेट डेवलपर्स का भरोसा बढ़ेगा, जिससे वे ज्यादा सस्ते घर बना सकें. यह इंडस्ट्री में एक बड़ी रुकावट को दूर करने के इरादे से उठाया जाने वाला कदम है.

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