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क्या रूसी मिलिट्री बेस इस्तेमाल कर सकेगी भारतीय सेना, पुतिन का यह दौरा क्यों है अहम?

राष्ट्रपति पुतिन के भारत दौरे से पहले रूस की संसद ने भारत के साथ हुए एक अहम सैन्य समझौते को मंजूरी दी है

पुतिन के साथ पीएम मोदी (फाइल फोटो)
पुतिन के साथ पीएम मोदी (फाइल फोटो)
अपडेटेड 3 दिसंबर , 2025

4-5 दिसंबर को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत में रहेंगे. इससे पहले 2 दिसंबर को रूस की संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा ने भारत और रूस के बीच हुए एक सैन्य समझौते 'RELOS' को मंजूरी दे दी है.

इस समझौते के तहत दोनों देशों की सेना किसी भी परिस्थिति में एक-दूसरे के मिलिट्री बेस और संसाधनों का इस्तेमाल और एक्सचेंज कर सकेंगी. राष्ट्रपति पुतिन के भारत दौरे से पहले रूस के इस कदम को बेहद अहम माना जा रहा है.

RELOS समझौता क्या है?

RELOS यानी रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक सपोर्ट समझौता. यह दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी में अब तक के सबसे अहम रक्षा समझौतों में से एक माना जा रहा है. यह एक डिफेंस लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज समझौता है.

दरअसल, 18 फरवरी को भारत और रूस के बीच यह समझौता हुआ था, जिसे पिछले हफ्ते रूसी संसद में मंजूरी के लिए भेजा गया था. अब इसके तहत भारत और रूस की सेना ना सिर्फ एक-दूसरे के सैन्य बेस, बंदरगाह (Ports), एयरफील्ड और सप्लाई पॉइंट का इस्तेमाल भी कर सकेंगी.

जब सदन में इस समझौते को मंजूरी दी जा रही थी, तब स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन ने कहा, "भारत के साथ हमारे रिश्ते बहुत खास और गहरे हैं और हम इनकी बहुत कद्र करते हैं. आज हमने जिस समझौते को मंजूरी दी है, यह दोनों देशों के रिश्ते को मजबूत करने के लिए बढ़ाया गया एक और कदम है, जिससे दोनों देश एक-दूसरे की मदद करेंगे. भारत हमारी सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेगा और हम जरूरत पड़ने पर भारत की सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे. इससे हम दोनों देशों के बीच दोस्ती और सहयोग और भी मजबूत होगा."

क्या भारत ने किसी और देश के साथ भी ऐसा समझौता किया है?

हां, भारत ने ऐसे ही समझौते अमेरिका (LEMOA), फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और कई अन्य देशों के साथ किए हैं. अब रूस का नाम भी इस लिस्ट में शामिल हो गया है.

पुतिन के भारत दौरे पर किन रक्षा समझौतों पर लगेगी मुहर?

S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के पांच अरब डॉलर का सौदा पहले ही हो चुका है. अब एक बार फिर से अतिरिक्त S-400 खरीदने की बात भी चल रही है. यह सिस्टम इसी साल पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकने में अपना कमाल दिखा चुका है. फिलहाल रूस के SU-57 स्टील्थ फाइटर जेट का प्रस्ताव है.

ये पांचवीं पीढ़ी के जेट हैं, जो जानकारों के मुताबिक राफेल से भी आगे हैं. रूस इसकी 70 फीसद टेक्नोलॉजी ट्रांसफर देने को तैयार है. बाद में भारत में ही इनका प्रोडक्शन भी हो सकता है. यानी हम रक्षा पर विदेशी निर्भरता को कुछ कम करेंगे क्योंकि टेक ट्रांसफर से स्थानीय उत्पादन बढ़ेगा. कुल मिलाकर, ये डील्स आत्मनिर्भर भारत को बूस्ट देंगी.

इसके अलावा, S-500 एयर डिफेंस सिस्टम पर भी दोनों देशों के बीच चर्चा हो सकती है. ये अगली पीढ़ी का सिस्टम है, जो हाइपरसोनिक मिसाइल्स को भी मार गिरा सकता है. नौसेना के लिए मिसाइल सिस्टम और दूसरे उपकरण भी लिस्ट में हैं. साथ ही नए लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर के संयुक्त उत्पादन या खरीद पर भी मुहर लग सकती है.

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