चुनाव आयोग आज असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित करेगा. सुबह आठ बजे से काउंटिंग शुरू होगी और ज्यादातर जगहों पर काउंटिंग खत्म होने के साथ ही शाम तक जीत-हार की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है.
भारत में वोटों की गिनती चुनाव आयोग की देखरेख में एक तय प्रक्रिया के तहत होती है. इसकी शुरुआत सबसे पहले पोस्टल बैलट से की जाती है. इन्हें चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारी, सैन्य बल और दिव्यांग लोग डालते हैं. सबसे पहले इन्हीं वोटों को गिनकर इनका रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है.
इसके लगभग 30 मिनट बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के वोटों की गिनती शुरू होती है. चुनाव अधिकारियों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में जब EVM का रिजल्ट बटन दबाया जाता है, तब मशीन हर उम्मीदवार को मिले कुल वोट दिखा देती है.
इन चुनावों के लिए मतदान अप्रैल में हुआ था. असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को, जबकि तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोट डाले गए. पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान हुआ. पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया, जो दोनों चरणों को मिलाकर 92 प्रतिशत के पार रहा. वहीं असम में रिकॉर्ड 85.38 प्रतिशत भागीदारी देखी गई. तमिलनाडु में 84.69 प्रतिशत, केरल में 79.63 प्रतिशत और पुडुचेरी में 89.87 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया.
किस पार्टी के लिए क्या दांव पर है
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव अग्निपरीक्षा है. तृणमूल कांग्रेस जहां अपना दबदबा बनाए रखने की कोशिश में है, वहीं अन्य राज्यों के मुकाबले बीजेपी ने यहां सबसे ज्यादा जोर लगाया है. इसी वजह से पूरे देश की नजर इस मुकाबले के नतीजों पर टिकी है.
तमिलनाडु में सत्ताधारी डीएमके अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है, जबकि एआईएडीएमके फिर से वापसी की कोशिशों में जुटी है. यहां बीजेपी मुख्य विपक्षी पार्टी एआईएडीएमके की अगुवाई में अपनी छाप छोड़ने की जुगत में है. इसके अलावा फिल्म स्टार विजय थलापति अपनी पार्टी टीवीके (TVK) के जरिए चुनाव को त्रिकोणीय बना रहे हैं.
केरल में मुकाबला पारंपरिक रूप से एलडीएफ और यूडीएफ के बीच ही है. मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन राज्य में हर पांच साल पर सत्ता बदलने के रिवाज को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ सत्ता में लौटने की उम्मीद लगाए है.
असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी अपने गढ़ को बचाने के लिए मैदान में है. यहां उसे कांग्रेस की अगुवाई वाले एकजुट विपक्षी गठबंधन से कड़ी चुनौती मिल रही है.
पुडुचेरी की बात करें तो बीजेपी और कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधनों के अलावा क्षेत्रीय दल भी यहां पूरा जोर लगाए हुए हैं.

