पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमा पर चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था करने और घुसपैठ रोकने के लिए केंद्र सरकार ने ‘बॉर्डर मिशन’ के नाम से बड़ा अभियान शुरू किया है. इसकी कमान खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संभाली है. राजस्थान के बीकानेर से 26 मई को शुरू हुआ यह ‘बॉर्डर मिशन’ अगले कुछ हफ्तों में गुजरात, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल तक पहुंचेगा.
पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा से जुड़े संवेदनशील इलाकों में गृह मंत्री का यह दौरा केवल औपचारिक यात्रा नहीं बल्कि देश के बड़े सुरक्षा समीक्षा अभियान के रूप में देखा जा रहा है. अमित शाह के इस मिशन की बीकानेर से शुरुआत के पीछे सबसे बड़ी वजह पाकिस्तान से लगने वाला राजस्थान का लंबा बॉर्डर है.
पाकिस्तान से सटा राजस्थान का 1070 किलोमीटर लंबा बॉर्डर पिछले कुछ वर्षों में अवैध हथियारों, ड्रग्स और जाली नोटों की तस्करी के लिहाज से काफी संवेदनशील हो चुका है. माना जा रहा है कि अमित शाह के इस दौरे से इससे निपटने की रणनीति को और मजबूत किया जाएगा.
अमित शाह मंगलवार सुबह बीकानेर के सांचू बॉर्डर पोस्ट पहुंचे जहां उन्होंने बीएसएफ जवानों से संवाद किया. इसके साथ ही उन्होंने वहां प्रहरी सम्मेलन को संबोधित किया और सीमा पर तैनात जवानों का उत्साहवर्धन किया.
शाह ने सांचू पोस्ट पर बनाई गई प्रहरी शस्त्र गैलरी का अवलोकन किया और आधुनिक ड्रोन तकनीक की कार्यप्रणाली की जानकारी ली. इस दौरान उनके साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल भी मौजूद रहे.
गृह मंत्री ने सीमा चौकियों पर बनी 14 नई महिला बैरकों का ई-लोकार्पण भी किया. इसे सीमा क्षेत्रों में महिला जवानों की भूमिका बढ़ाने और उन्हें बेहतर सुविधाएं देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
बीकानेर की सांचू एक ऐतिहासिक चौकी है. वर्ष 1965 के युद्ध में पाकिस्तान ने इस पर कब्जा करने का प्रयास किया था. उस समय यहां से 25 किलोमीटर दूर रणजीतपुरा में तैनात 13 ग्रेनेडियर्स के जवानों को इसकी सूचना मिली. इसके बाद भारतीय जवानों ने जवाबी हमला किया और सांचू को सुरक्षित रखा. जवानों के अदम्य साहस के कारण पाकिस्तान को यहां से पीछे हटना पड़ा.
अमित शाह के इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 27 मई, 2026 को होने वाली उच्च-स्तरीय बैठक मानी जा रही है. इस बैठक में गृह मंत्रालय, राजस्थान सरकार, बीएसएफ और सीमावर्ती जिलों के प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के साथ सीमा सुरक्षा, घुसपैठ-रोधी उपायों और विकास कार्यों की समीक्षा होगी.
दरअसल केंद्र सरकार अब पारंपरिक सीमा सुरक्षा मॉडल से आगे बढ़कर ‘स्मार्ट बॉर्डर’ रणनीति पर काम कर रही है. इसमें ड्रोन निगरानी, तकनीकी सर्विलांस, आधुनिक फेंसिंग, महिला बलों की बढ़ती तैनाती और सीमावर्ती इलाकों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करना शामिल है.
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड तैयार करने की दिशा में यह अभियान अहम माना जा रहा है.
इस अवसर पर अमित शाह ने कहा, "सांचू पोस्ट 179वीं बटालियन की महत्वपूर्ण बॉर्डर आउट पोस्ट है. केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 1096 किलोमीटर लंबी लिटरल और 520 किलोमीटर लंबी एक्ससीएल रोड बना रही है, जो जवानों के आवागमन और कनेक्टिविटी संबंधी चिंता को दूर करेगी. बीएसएफ को परंपरागत ड्यूटी के साथ अब नई दिशा से भी सोचना होगा, ताकि सीमा के उस पार से अतिक्रमण, स्मगलिंग और घुसपैठ पर पैनी नजर रखी जा सके."
बीकानेर दौरे के बाद अमित शाह 29 मई को गुजरात के भुज जाएंगे, जहां वह सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील ‘हरामी नाले’ क्षेत्र का दौरा करेंगे. कच्छ के रण का यह दलदली समुद्री इलाका लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है.
माना जाता है कि पाकिस्तान समर्थित तस्कर और घुसपैठिए इसी मार्ग का इस्तेमाल करने की कोशिश करते रहे हैं. ऐसे में इस इलाके की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार विशेष सतर्कता बरत रही है.
इसके बाद 5 जून को त्रिपुरा और 15 जून के आसपास पश्चिम बंगाल में भी गृह मंत्री सीमावर्ती इलाकों का दौरा करेंगे. खास बात यह है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद यह पहला बड़ा बॉर्डर सिक्योरिटी रिव्यू माना जा रहा है.
वहां बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग, अवैध घुसपैठ और तस्करी लंबे समय से राजनीतिक और सुरक्षा बहस का केंद्र रहे हैं.
अमित शाह के इन दौरों को केवल सुरक्षा कवायद के रूप में नहीं देखा जा रहा है. इसे केंद्र सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें सीमा क्षेत्रों को सुरक्षा के साथ-साथ विकास और बुनियादी सुविधाओं से भी जोड़ा जा रहा है.
बीएसएफ जवानों के कल्याण, सीमावर्ती गांवों के विकास और तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था पर बढ़ता जोर इसी दिशा का संकेत देता है.
सामरिक के साथ ही राजनीतिक तौर पर भी इस मिशन को अहम माना जा रहा है. राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा जैसे राज्यों में सीमा सुरक्षा लंबे समय से बड़ा चुनावी और राष्ट्रीय मुद्दा रही है.
ऐसे में गृह मंत्री का खुद सीमा चौकियों तक पहुंचना और जमीनी समीक्षा करना यह संदेश देने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है कि केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा को लेकर किसी तरह की ढिलाई के पक्ष में नहीं है.

