30 दिसंबर को बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत-पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष को लेकर बड़ा दावा किया. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाद अब वांग यी ने कहा है कि चीन ने भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव को कम कराने में अहम भूमिका निभाई थी.
उन्होंने कहा, "जब इस साल दोनों देशों के बीच हालात बिगड़ गए थे, तब हमने बीच में आकर तनाव कम करने की कोशिश की." कुछ देर बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर शेयर किया. हालांकि, भारत ने चीन के इस दावे को खारिज किया है.
भारत ने चीन के विदेश मंत्री के दावे पर क्या कहा है?
भारत ने चीन के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है कि उसने इस साल के बीच में हुए सैन्य संघर्ष के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की थी. साथ ही भारत ने इस बात को दोहराया है कि युद्धविराम के फैसले में किसी तीसरे पक्ष का कोई दखल नहीं था.
भारत लगातार यह कहता रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 10 मई को दोनों देशों की सेना के DGMO के बीच सीधी बातचीत हुई, जिसके बाद युद्धविराम हुआ था. ऐसे में साफ है कि इस संघर्ष को रुकवाने में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं रही.
भारत-पाक संघर्ष रुकवाने के क्रेडिट लेने की होड़ में अब चीन की एंट्री
चीन के विदेश मंत्री ने पहली बार अपने देश में आयोजित एक कार्यक्रम में ऐसा दावा किया है. हालांकि, ट्रंप ऐसा दावा कई बार, यहां तक की वैश्विक मंचों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विदेशी नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों के दौरान भी कर चुके हैं.
इसमें कोई दो राय नहीं कि संघर्ष रुकवाने के क्रेडिट लेने की इस होड़ में चीन का यह दावा उसके पाखंड को ही उजागर करता है. ऐसा इसलिए क्योंकि उसने तीन दिनों तक चले संघर्ष के दौरान पाकिस्तान का डटकर समर्थन किया और कथित तौर पर सैन्य सहायता भी प्रदान की.
सेना के शीर्ष जनरल राहुल आर सिंह के मुताबिक, चीन ने इस टकराव के दौरान पाकिस्तान को वास्तविक समय में भारतीय सुरक्षा संबंधी इनपुट दिए. ऐसे में इस संघर्ष को लेकर चीन की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई.
राहुल आर. सिंह का कहना है कि पाकिस्तान आगे था, लेकिन पीछे से उसे चीन का हर तरह से सपोर्ट मिल रहा था. इतना ही नहीं पिछले पांच वर्षों में पाकिस्तान को मिलने वाले सैन्य उपकरणों का 81 फीसद हिस्सा चीनी है.
पहलगाम हमले के बाद भारत ने किया था ऑपरेशन सिंदूर
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव हुआ. भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान में नौ आतंकी शिविरों को नष्ट कर दिया.
इस दौरान भारत ने पाकिस्तान के कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था, जिससे कुल मिलाकर 11 एयरबेस को नुकसान पहुंचा था. भारत की वायु रक्षा पूरी तरह से एक्टिव थी और छोटे हथियारों से लेकर बड़े एयर डिफेंस सिस्टम तक हर हथियार तैयार था. इन हथियारों ने पाकिस्तान के ड्रोन को काफी नुकसान पहुंचाया था.
इसके अलावा, भारतीय सेना ने भी सीमा के दूसरी तरफ भारी तोपों और रॉकेट लॉन्चरों का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान की सेना को बुरी तरह से उलझा कर रखा और उसे बड़ा नुकसान पहुंचाया.

