पश्चिमी यूपी के संभल जिले की पहचान यहां भैंस की सींग से बनने वाले हैंडीक्राफ्ट से रही है. पिछले 50 वर्षों से यहां पर भैंस की सींग से शर्ट में लगने वाले बटन बनाने का काम हो रहा है. संभल से कच्चा बटन चीन की कंपनियां खरीद लेती हैं. ये कंपनियां इन बटन की बेहतर फिनिशिंग करके अमेरिका, यूरोप और भारत में महंगे दामों पर निर्यात करती हैं. भारत के साथ बढ़ते विवाद के चलते संभल ने चीन के साथ सारे व्यापारिक रिश्ते तोड़ लिए हैं.
यहां के व्यापारियों ने अपना कच्चा माल चीनी कंपनियों को बेचने से मना कर दिया है. व्यापारियों के जज्बे को देखते हुए यूपी के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) विभाग ने संभल जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर सरायतरीन इलाके में बटन की फिनिशिंग के लिए अत्याधुनिक विदेशी मशीनें लगाने की तैयारी शुरू कर दी है. करीब 10 करोड़ रु. वाले इस प्रोजेक्ट में राज्य सरकार की हिस्सेदारी 9 करोड़ रु. और स्थानीय उद्यमियों ने जमीन के साथ बाकी एक करोड़ रु. का इंतजाम किया है.
संभल के बड़े बटन व्यवसायी शोएब यूसुफ कहते हैं, ''देश-विदेश में जो महंगे चाइनीज बटन बिकते थे वे सभी कच्चे रूप में संभल से ही खरीदे जाते थे. संभल में भी फिनिशिंग की आधुनिक मशीनें लग जाने के बाद यहां के बटन पूरी दुनिया में धूम मचाएंगे. इससे संभल को पूरे विश्व में नई पहचान मिलेगी.’’
संभल से करीब 300 किलोमीटर दूर ताजनगरी आगरा में चमड़ा व्यवसाय से जुड़े उद्योगपति वर्षों से अपने उत्पादों की जांच के लिए चेन्नै या फ्रांस-जर्मनी की प्रयोगशालाओं का मुंह ताकते थे. बाहरी लैब की जांच में न केवल समय अधिक लगता था बल्कि यह पूरी प्रक्रिया काफी खर्चीली भी थी. ‘‘उत्तर प्रदेश निर्यात अवस्थापना विकास योजना’’ के तहत आगरा-मथुरा हाइवे पर 21 किलोमीटर दूर सिंगना इलाके में देश की अत्याधुनिक टेस्टिंग लैब बनाई गई है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 7 अगस्त को इस लैब का लोकार्पण किया और इसके साथ ही आगरा के चमड़ा व्यवसाइयों की दौड़भाग को भी विराम लगा. आगरा के मशहूर चमड़ा व्यवसायी पूरन डावर बताते हैं, ''लेदर, फुटवियर कंपोनेंट, गारमेंट और टेक्सटाइल में एक हजार तरह की हाइ रिस्क केमिकल और फिजिकल जांच की विश्वस्तरीय सुविधा शुरू होने से आगरा से चमड़ा उत्पादों के निर्यात में तेजी आएगी.’’ साढ़े पंद्रह करोड़ रु. की इस लैब के लिए धनराशि का 80 फीसद हिस्सा राज्य सरकार ने दिया है. स्थानीय उद्योगपतियों ने जमीन के साथ बाकी 20 प्रतिशत राशि का इंतजाम किया है.
कोरोना संक्रमण के दौरान बने माहौल में उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में एमएसएमई की फौज का इस्तेमाल प्रदेश के औद्योगिक विकास की गति को बढ़ाकर रोजगार की संभावनाएं पैदा करने के लिए कर रहे हैं. नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) के 73वें (2015-16) राउंड के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, यूपी में ऑन एकाउंट एंटरप्राइज (ओएई), मतलब ऐसे उद्यम जो एक भी कर्मचारी को नौकरी पर रखे बगैर चल रहे हैं, की कुल संख्या 78,74,711 हैं.
'एस्टैब्लिशमेंट’, यानी ऐसे उद्यम जिनमें कम से कम एक कर्मचारी को नौकरी मिली है, की संख्या 11,25,051 है. वहीं केंद्रीय एमएसएमई मंत्रालय में 'उद्योग आधार मेमोरेंडम’ (यूएएम) के तहत यूपी में रजिस्टर्ड इकाइयों की संख्या 8,92,029 है. एमएसएमई की इतनी बड़ी संख्या के बल पर यूपी सरकार प्रदेश में औद्योगिक विकास को तेज करना चाहती है.
आर्थिक पैकेज की संजीवनी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संकट के बीच 12 मई को लाकडाउन चौथी बार बढ़ाने की घोषणा के साथ 'आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के लिए 20 लाख करोड़ रु. के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था. प्रधानमंत्री के आर्थिक पैकेज की घोषणा के तुरंत बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एमएसएमई विभाग के मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और तत्कालीन प्रमुख सचिव (अब अपर मुख्य सचिव) एमएसएमई नवनीत सहगल को आत्मनिर्भर भारत योजना का लाभ यूपी के उद्यमियों दिलाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य करने का निर्देश दिया था.
लोकभवन के सी ब्लॉक के पहले तल पर बैठने वाले एमएसएमई विभाग के अपर मुख्य सचिव सहगल ने पूरी रात अपना दफ्तर खोलकर बैंक और उद्यमियों के बीच समन्वय स्थापित किया. प्रधानमंत्री की घोषणा के महज 24 घंटे के भीतर मुख्यमंत्री ने यूपी के 56,754 एमएसएमई उद्यमियों को 2002.49 करोड़ रु. के ऑनलाइन ऋण वितरित किए. इस प्रकार लॉकडाउन अवधि में उद्यमियों को इतनी बड़ी संख्या में ऋण वितरित करने वाला यूपी पहला राज्य बन गया.
इसी दिन 14 मई को मुख्यमंत्री ने लोगों को रोजगार दिलाने के लिए ऑनलाइन 'स्वरोजगार संगम’ कार्यक्रम का भी आयोजन किया. इसमें 56,754 एमएसएमई इकाइयों में करीब दो लाख से अधिक कामगारों को रोजगार के अवसर मुहैया कराए गए. एमएसएमई विभाग 'ऑन एकाउंट एंटरप्राइज’ और 'एस्टैब्लिशमेंट’ श्रेणी के उद्यमों में कम से कम एक व्यक्ति को रोजगार दिलाने की व्यवस्था कर कुल 90 लाख रोजगार करने की दिशा में भी कार्रवाई कर रहा है. एमएसएमई विभाग यूपी में अब तक 2,71,473 नई इकाइयों को 8,949 करोड़ रु. का ऋण बैंकों के सहयोग से वितरित करा चुका है.
उद्योगों को ऑनलाइन प्लेटफार्म
लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने 7 अगस्त को एमएसएमई विभाग की ओर से संचालित हस्तशिल्पियों के कौशल विकास की प्रशिक्षण योजना, अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए प्रशिक्षण योजना और ‘एक जिला, एक उत्पाद’ (ओडीओपी)-विपणन योजना की ऑनलाइन प्रक्रिया की शुरुआत की. उद्योगों को अधिक से अधिक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए ई-बे के साथ समझौता किया गया है.
एमएसएमई विभाग की बदली कार्यप्रणाली के मुख्य आर्किटेक्ट अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल बताते हैं, ''एमएसएमई विभाग की सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आने से उद्यमियों को अनावश्यक दौड़-भाग नहीं करनी पड़ रही है. इसने उद्यमियों के बीच राष्ट्रीय स्तर पर यूपी की एक अलग छवि बनाई है.’’
लघु उद्योगों को तकनीकी जानकारियां मुहैया कराने के लिए एमएसएमई विभाग ने ‘‘डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी’’ (एकेटीयू) के साथ एमओयू किया है. एकेटीयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक बताते हैं, ''विश्वविद्यालय से जुड़े 756 कॉलेजों के विद्यार्थी न केवल ओडीओपी योजना से जुड़ेंगे बल्कि इनोवेशन, इन्क्यूबेशन और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम करेंगे.’’
संकट में सहारा बने छोटे उद्यम
कोविड-19 के खिलाफ जंग में एमएसएमई ने यूपी को सहारा दिया है. 25 मार्च से देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा हुए महज एक हफ्ता ही हुआ था कि देश भर में कोरोना संक्रमण के रोकथाम और इलाज में लगे डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों के लिए जरूरी 'पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट’ (पीपीई) किट की कमी महसूस होने लगी थी. यूपी में भी कोरोना संक्रमण के मामले धीरे-धीरे बढ़ रहे थे.
लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने 1 अप्रैल की सुबह अपनी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम-11 के बैठक में यूपी में ही पीपीई किट और वेंटिलेटर जैसे जरूरी उपकरणों के निर्माण की योजना बनाने को कहा. इसके बाद एमएसएमई विभाग हरकत में आ गया. विभाग के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और अपर मुख्य सचिव सहगल ने अन्य अधिकारियों के साथ बैठक करके योजना का खाका खींचा. अगले दिन योजना की जानकारी मुख्यमंत्री को दी गई.
उनकी अनुमति मिलते ही यूपी को पीपीई किट के निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने की योजना को हकीकत में बदलने के प्रयास शुरू हो गए. सहगल ने प्रदेश में काम कर रहे टेक्सटाइल से जुड़े उद्यमियों से संपर्क किया और उन्हें पीपीई किट निर्माण करने को प्रेरित किया. लॉकडाउन में इन फैक्ट्रिेयों में काम करने वाले श्रमिकों को उनके गांव से लाने की व्यवस्था हुई. युद्ध स्तर पर कच्चे माल का इंतजाम हुआ. सभी उद्यमियों को स्टैंडर्ड पीपीई किट बनाने का प्रोटोकॉल समझाया गया. 5 अप्रैल को नोएडा, कानपुर और उन्नाव में आधा दर्जन टेक्सटाइल फैक्ट्रियों ने पीपीई किट का उत्पादन शुरू किया.
आज यूपी में कुल 53 फैक्ट्रियों ने 50 हजार पीपीई किट रोज बनाने की क्षमता हासिल कर ली है. यूपी में कोविड के इलाज में लगे मेडिकल कॉलेज और अन्य अस्पतालों में बड़ी संख्या में प्रदेश में बनने वाली पीपीई किट का उपयोग हो रहा है. प्रदेश सरकार ने यूपी में वेंटिलेटर बनाने वाली नोएडा की एकमात्र इकाई को पुनर्संचालित करने में सहयोग किया है. यह इकाई अब रोज 300 वेंटिलेटर का उत्पादन की क्षमता हासिल कर पूरे देश में इसकी आपूर्ति कर रही है.
आसान हुआ उद्योग लगाना
एमएसएमई के जरिए यूपी में बड़े पैमाने पर रोजगार की संभावनाएं पैदा करने और औद्योगिक विकास का माहौल बनाने के लिए जरूरी है कि अधिक से अधिक मध्यम, लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों की स्थापना की जाए. इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आइआइए) के यूपी चैप्टर के पूर्व अध्यक्ष सुनील वैश्य बताते हैं, ''प्रदेश में नई एमएसएमई लगाने के लिए 29 विभागों से करीब 80 अनुमतियां लेनी पड़ती हैं.
उद्यमी कम से कम छह महीने आधा दर्जन विभागों से अनुमति पाने के लिए चक्कर लगाता रहता है.’’ एमएसएमइ उद्योगों की स्थापना में लाल फीताशाही को दूर करने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए योगी सरकार ने 18 अगस्त को कैबिनेट बाइसर्कुलेशन के जरिए ‘‘सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (अवस्थापना एवं संचालन) अधिनियम-2020’’ को मंजूरी दी है.
इस नए ऐक्ट के तहत यह व्यवस्था की जा रही है कि जिला उद्योग केंद्र में उद्यमी के निर्धारित प्रपत्र जमा कराने पर 72 घंटे के भीतर स्वीकृति प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाएगा. इस प्रमाणपत्र के जारी होने के बाद इकाई को 900 दिन तक किसी भी सरकारी विभाग से किसी भी प्रकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी और वह तत्काल अपना उद्यम शुरू कर सकेगा.
सहगल बताते हैं, ''नए अधिनियम के माध्यम से एक वर्ष में 5 लाख नए रोजगार उपलब्ध कराए जाने का लक्ष्य रखा गया है. इसमें ध्यान रखा गया है कि उद्यमियों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके.’’ निजी इकाइयों और एमएसएमई विभाग के बीच मामले सुलझाने के लिए फैसिलिटेशन काउंसिल का प्रावधान है लेकिन वर्तमान में एक ही फैसिलिटेशन काउंसिल होने के कारण एमएसएमई के काफी मामले लंबित हैं.
नए ऐक्ट में मंडल स्तर पर इस तरह की फैसिलिटेशन काउंसिल बनाने का प्रस्ताव है. इससे मंडल स्तर पर एमएसएमई की समस्याओं का मंडलायुक्त की अध्यक्षता में फैसिलिटेशन काउंसिल में निराकरण प्राथमिकता के तौर पर किया जा सके.
कोरोना के बढ़ते संक्रमण और इसके दुष्परिणाम से निबटने के लिए राज्य सरकार अगर एमएसएमई के ढांचे को मजबूत करने में कामयाब हुई तो वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले यह प्रदेश सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी.

