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रथयात्रा पर संशय, चमत्कार का इंतजार

…..तो क्या कोरोना रोक पाएगा भगवान जगन्नाथ का रथ? लॉकडाउन में यह सवाल चर्चा में है. राज्य और केंद्र दोनों ही सरकारें रथयात्रा आयोजन को लेकर किसी भी प्रकार का जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं. एक दूसरे के पाले में गेंद फेंकते रहे. अगले माह 23 जून से होने वाली रथयात्रा की शुरुआती परंपराएं विधिवत नहीं हो पायी.

फाइल फोटोः इंडिया टुडे
फाइल फोटोः इंडिया टुडे
अपडेटेड 11 मई , 2020

महेश शर्मा

…..तो क्या कोरोना रोक पाएगा भगवान जगन्नाथ का रथ? लॉकडाउन में यह सवाल चर्चा में है. राज्य और केंद्र दोनों ही सरकारें रथयात्रा आयोजन को लेकर किसी भी प्रकार का जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं. एक दूसरे के पाले में गेंद फेंकते रहे. अगले माह 23 जून से होने वाली रथयात्रा की शुरुआती परंपराएं विधिवत नहीं हो पायी. मसलन, 26 अप्रैल अक्षय तृतीया के दिन से रथ निर्माण नहीं हो सका. महाप्रभु जगन्नाथ, भाई बलभद्र, बहिन सुभद्रा के साथ चंदनयात्रा नहीं कर पाए. श्रीमंदिर परिसर में प्रतीकात्मक तौर पर कुछ परंपराएं निर्वहन का प्रयास किया गया पर नहीं हो पाया.

रथयात्रा को लेकर संशय बरकरार है. श्रद्धालुओं के साथ ही मंदिर के पुजारियों, प्रशासकों व सरकार में शामिल लोगों के माथे पर चिंता की झलक साफ दिखती है. तीन अप्रैल को लॉकडाउन खत्म होने के बाद बैठक करके किसी निर्णय पर पहुंचने की बात कही गयी. तभी चार मई को श्रीमंदिर प्रबंधन समिति के सदस्यों ने प्रधानसेवक गजपति महाराज दिव्य सिंहदेव की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रेंसिंग करके निर्णय लिया कि बंड़दंड (श्रीमंदिर के सामने ग्रांडरोड) में रथ निर्माण कराया जा सकता है.

यह प्रस्ताव राज्य सरकार के कानून विभाग को भेजा गया तो सराकर ने इसे बिना विलंब किए केंद्र सरकार के प्रेषित कर दिया.

इस दौरान अक्षय तृतीया से पहले ही नयागढ़ और बौद्ध जिलों के जंगल से नीम की लकड़ी 361 टुकड़े लाकर एकत्र कर लिए गए थे. पत्र भेजने के दो दिन बाद गृह मंत्रालय के एक अनुभागीय सचिव के हस्ताक्षर से सर्कुलर ओडिशा सरकार को मिला कि रथनिर्माण शुरू किया जा सकता है.

पुरी जिला ग्रीन जोन में है. सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा जाएगा. कारीगरों के कोरोना टेस्ट की भी बात कही गयी. हालांकि रथ निर्माण का कार्य शुरू हो गया है पर कारीगरों की कमी और बाहर से कारीगरों को न बुलवा पाने की विवशता व प्रयास भी ढंग से न किए जाने से ऐसा लगता है कि अबकी रथयात्रा शायद ही हो पाए.

हां, धार्मिक पंरपंरा के निर्वहन के लिए प्रतीकात्मक यात्रा निकाली जा सकती है. पर क्या सभा आवश्यक अन्य परंपराएं पूरी हो सकेंगी? साफ तौर पर कोई नहीं बता पा रहा है.

रथयात्रा के मामले में राज्य सरकार की ओर से बराबर हस्तक्षेप करने वाले कानून मंत्री प्रताप जेना कहते हैं,”रथ निर्माण का काम शुरू हो गया है. अब रथयात्रा आयोजन तो हालात पर निर्भर करेगा.“ जेना की बात को एक वर्ग सही ठहराते हुए कहता है कि यदि कोरोना पॉजिटिव इसी तरह बढ़ता रहा और एक के बाद एक जिले रेड जोन में आते रहे तो क्या लाखों की भीड़ वाला रथयात्रा का पर्व मनाया जा सकेगा?

ओडिशा सरकार के रवैये से रथ निर्माण करने वाले शिल्पकार नाराज हैं. नाम न छापने की शर्त पर एक ने बताया कि रथनिर्माण कार्य में इतना विलंब हो चुका है और इसकी शुभ तिथियां निकल गयी हैं. अब विधि-विधान के अनुसार रथ का निर्माण करना मुश्किल होगा.

पिछले 15 साल से रथयात्रा के लिए ओडिया दूरदर्शन चैनल के लिए लाइव कमेंट्री करने वाली जगन्नाथ रीतिनीति पर आस्थावान महिला आयोग की पूर्व सदस्य नम्रता चड्ढा कहती हैं कि उन्हें तो लगता है कि कोई चमत्कार ही रथयात्रा का आयोजन करा सकता है. भक्तों को इसी चमत्कार का इंतजार है.

जगन्नाथ भगवान को ओडिशा में हर परिवार सदस्य के रूप में मानता है इसीलिए तो उनकी रीतिनीति के लिए 36 नियोग के सेवायत तैनात हैं. रथयात्रा के धार्मिक अनुष्ठान की परंपरा प्रतीकात्मक रूप से श्रीमंदिर परिसर में ही संपन्न की जा सकती है.

दइतापति सेवक विनायक दास महापात्रा कहते हैं कि सरकार तो रथयात्रा पर ड्रामेबाजी कर रही है. राज्य सरकार ने पल्ला झाड़ते हुए केंद्र को लिखा और अनुमति चाही. इसी में तीन दिन लग गए. रथनिर्माण में विलंब होता रहा. बिना भक्तों की मौजूदगी में ही रथयात्रा आयोजित की जा सकती है. ऐसा सभी सेवायत कहते हैं.

रथनिर्माण के मुख्य विश्वकर्मा विजय महापात्रा कहते हैं कि अब तो समय बहुत कम बचा है. ज्यादा शिल्पकारों को लेकर 24 घंटे कार्य हो तो शायद रथ निर्माण संभव भी है. बीजेपी के वरिष्ठ नेता विजय महापात्रा कहते हैं कि नवीन सरकार का केंद्र सरकार को पत्र लिखना जरूरी नहीं था.

हालांकि कोरोना के कहर के बीच पुरी स्थित गोवर्द्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के आश्रम में 24 अप्रैल की बैठक में सभी महत्वपूर्ण लोग थे और शंकराचार्य ने यह निर्णय दिया था कि श्रीमंदिर परिसर के भीतर ही धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जा सकते हैं.

श्रीमंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष गजपति महाराज, मुख्य प्रशासक, सेवायतों के प्रतिनिधियों ने विकल्प पर सहमति जतायी. मौका मुआयना हुआ. कहा गया कि शंकराचार्य के साथ अगली बैठक में निर्णय ले लिया जाएगा. यह अगली बैठक अब तक नहीं हुई. शंकराचार्य कहते हैं कि परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेना चाहिए. विकल्प पर भी गहन विचार विमर्श करके राय बनानी होगी.

इधर ओडिशा में कोरोना पॉजिटिव के मरीज बढ़कर 377 (रविवार 10 मई तक) हो गए. तीन मौतें हो चुकी हैं. लाखों मजदूर अन्य राज्यों से ओडिशा पहुंच रहा है. अब तक 50 हजार से ज्यादा आ भी चुके हैं. यह आंकड़ा तो तब का है जब टेस्टिंग रेट कम है. टेस्टिंग बढ़ेगी तो परिदृश्य भयानक भी हो सकता है. ऐसे में कोरोना यदि श्रीमंदिर के बाहर रथयात्रा में रुकावट बन जाए तो बड़ी बात न होगी लेकिन लोगों को महाप्रभु जगन्नाथ के चमत्कार का इंतजार है.

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