कोरोना संक्रमण की वजह से इस साल बुद्ध पूर्णिमा (7 मई) को राज्य के अभयारण्य और आरक्षित वन क्षेत्र में होने वाले वन्यजीवों की गणना का कार्यक्रम टाल दिया गया है. यह कार्यक्रम पिछले कई सालों से वन विभाग की ओर से आयोजित किया जाता रहा है जिसमें एक मचान पर वन रक्षक के साथ वन्यजीव प्रेमी और प्रकृति प्रेमी भाग लेते हैं. मचान पर एक से ज्यादा लोगों के होने से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पाएगा जिससे कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा है. इसलिए राज्य के वन्यजीव विभाग ने इस पर रोक लगा दी है. इससे बुद्ध पूर्णिमा को वन्यजीवों की होने वाली पारंपरिक गणना की परंपरा टूट गई है.
अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सुनील लिमये के मुताबिक महाराष्ट्र में इस साल बुद्ध पूर्णिमा के दौरान गणना का कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा रहा है. क्योंकि, गणना के लिए मचान पर 24 घंटे तीन से चार लोग होते हैं जो पूर्णिमा की पूरी रात पानी वाले स्थान के नजदीक मचान पर बैठकर वन के प्राणियों को देखते हैं और उनकी गिनती करते हैं. मचान पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पाएगा. कोरोना की वजह से ही सभी आरक्षित वनों, राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों को आम लोगों के लिए बंद है. क्योंकि, सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करना मुश्किल है.
बुद्ध पूर्णिमा की रात चांद की रोशनी का प्रकाश अन्य पूर्णिमा की रात की अपेक्षा अधिक प्रखर होता है. इससे रात के समय पानी वाले स्थान, अभयारण्य के तालाब पर प्यास बुझाने के लिए आने वाले वन्य प्राणी की सहज रूप से गिनती होती है. इसी तरह किसी भी प्रजाति के वन्यजीव रात में पानी वाले स्थान या मचान के पास से जाने पर वह भी सहजता से नजर आ जाते हैं. इसके लिए किसी भी अतिरिक्त प्रकार के प्रकाश की आवश्यकता नहीं पड़ती है. चांदनी का प्रकाश रात में प्राकृतिक होने से वन्यजीव भी बहुत अधिक इस प्रकाश से घबराते नहीं हैं. इसलिए वन्यजीव प्रेमी और पर्यावरण प्रेमी इस कार्यक्रम में दिवलचस्पी लेते हैं. लेकिन लॉकडाउन के कारण जिलों की सीमाएं बंद हैं जिससे वन्यजीव और पर्यावरण प्रेमियों का आना भी मुश्किल है. इसलिए वन विभाग ने मचान से गिनती का कार्यक्रम रद्द कर दिया है.
सतपुडा फाउंडेशन के संस्थापक और प्रख्यात प्रकृतिवादी किशोर रिथे का कहना है कि बुद्ध पुर्णिमा की रात जानवरों की गिनती और उन्हें देखने की पुरानी परंपरा है. अब तो कैमरा ट्रैप से आसान हो गया है जो वैज्ञानिक और प्रभावी भी है. लेकिन मचानों पर वन रक्षकों के साथ बैठकर जानवरों की गिनती करना छात्रों और प्रकृति प्रेमियों को शैक्षणिक अवसर भी प्रदान करता है. मुंबई महानगर क्षेत्र में भी संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान, तुंगारेश्वर वन्यजीव अभयारण्य, तानसा वन्यजीव अभयारण्य, कर्नाला पक्षी अभयारण्य, पेंच और ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान में भी जानवरों और पक्षियों की गिनती के लिए पानी वाले स्थान के नजदीक मचान बनाए गए थे. वन विभाग के सूत्रों का कहना है कि पिछले साल बुद्ध पूर्णिमा को वन्यजीव प्रेमियों ने ताडोबा और पेंच में बड़ी संख्या में बाघों को देखकर रोमांचित हुए थे.
हालांकि, अमेरिका में एक बाघिन के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की खबर जब फैली थी तो वन विभाग की ओर से महाराष्ट्र के वन्यजीवों को कोरोना के प्रकोप से बचाने के दिशानिनर्देश जारी किए थे. राज्य में तकरीबन 50 राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य हैं जो 18 मार्च से बंद हैं. यहां लगभग 25 हजार वन कर्मचारी हैं जिन्हें सावधानी बरतने के लिए कहा गया है ताकि मानव से जानवारों में कोरोना का संक्रमण न फैले. राज्य के वनों में 300 बाघ हैं. इसलिए जानवरों को खाना देते समय नियम का पालन किया जा रहा है. सूत्रों का कहना है कि कोरोना और लॉकडाउन के कारण वन्यजीव प्रेमी और पर्यावरण प्रेमी भी इस बार बुद्ध पूर्णिमा की रात मचान से जानवरों की गिनती और निसर्ग का अनुभव लेने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं

