अगर कोई मां कोरोना से पीड़ित है तो नवजात शिशु को स्तनपान कराने के लिए उसकी मां के पास नहीं ले जा सकते हैं. ऐसी स्थिति में पुणे के ससून अस्पताल के मिल्क बैंक की मदद से इस समस्या को कुछ हद तक दूर किया जा रहा है.
पुणे में बीजे मेडिकल कॉलेज का एक प्रतिष्ठित अस्पताल ससून है. इस अस्पताल से जेल के कैदियों का टेलीमेडिसीन के जरिए इलाज किया जा सकता है या मिल्क बैंक का उपयोग उन शिशुओं के लिए किया जा सकता है जो अपनी माताओं के दूध का सेवन नहीं कर पाते हैं. यह अस्पताल अपने इस नवाचार के लिए जाना जाता है.
इस समय पुणे में भी कोरोना ग्रस्त रोगियों की तादाद काफी है. जुना खडकी बाजार इलाके की रहने वाली एक 25 वर्षीया गर्भवती महिला को 16 अप्रैल को ससून अस्पताल में भर्ती कराया गया. वो कोरोना पोजिटिव थीं. उन्होंने शनिवार को एक नवजात शिशु को जन्म दिया.
इस महिला के परिवार वालों और अस्पताल के डॉक्टरों को चिंता सता रही थी कि यह नवजात शिशु भी कहीं कोरोना बाधित तो नहीं है. सौभाग्य से इस नवजात शिशु का कोरोना टेस्ट निगेटिव निकला. इस नवजात शिशु को मां के पास नहीं रखा गया बल्कि उसे अलग से नवजात शिशु कक्ष में ले जाया गया जहां डॉक्टर और नर्स उनकी देखभाल कर रहे हैं.
लेकिन समस्या यह थी कि नवजात शिशु को मां के दूथ के बिना कैसे रखा जा सकता है. नवजात शिशु को मां के दूध के वंचित होना पड़ रहा था. तब ससून अस्पताल के मिल्क बैंक की मदद ली गई. नवजात शिशु को मिल्क बैंक से दूध दिया जा रहा है. यह जानकारी पुणे के विभागीय सूचना कार्यालय के संदीप राठौर ने दी.
मिल्क बैंक में उन महिलाओँ के दूध को जमा रखा जाता है जिनको ज्यादा दूध होता है और वो अपने दूध को मिल्क बैंक में दान कर देती हैं. इस मिल्क बैंक से उन बच्चों को दूध दिया जाता है जो माताएं अपने बच्चे को स्तनपान नहीं करा सकती हैं. ससून अस्पताल में जिस कोरोना बाधित महिला ने नवजात शिशु को जन्म दिया है वो नवजात शिशु अब मिल्क बैंक का दूध पीकर स्वस्थ है.
इस अस्पताल में ऐसे भी बच्चे हैं जो कोरोना के रोगी हैं और उनका इलाज किया जा रहा है. ऐसे पांच बच्चे हैं जो डेढ़-दो साल की उम्र के हैं. हालांकि, इन बच्चों में कोरोना के हल्के लक्षण हैं. लेकिन उन्हें अपनी मां से अलग एक कमरे में रखा गया है. अस्पताल प्रशासन ने इन बच्चों के मन बहलाने के लिए तरह-तरह के खिलौनों की भी व्यवस्था की है.
चार साल पहले ससून अस्पताल में मिल्क बैंक की स्थापना की गई थी. इस मिल्क बैंक में उन माताओं के दूध का संग्रह किया जाता है जिनके शरीर में दूध का स्तर अधिक होता है. मिल्क बैंक में जमा करने से पहले दान किए गए दूध को एक प्रयोगशाला में ऐहतियात के तौर पर जांचा जाता है ताकि यह दूध पीने से शिशु को किसी तरह का नुकसान न हो. मिल्क बैंक का दूध पिलाने से पहले संबंधित शिशु के माता-पिता से भी इजाजत ली जाती है.
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