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भत्तों में कटौती नहीं भायी यूपी के सरकारी कर्मचारियों को

उत्तर प्रदेश राज्य के कर्मचारी महंगाई भत्ते समेत अन्य भत्तों पर रोक लगाने के प्रदेश सरकार के निर्णय का विरोध कर रहे हैं

फोटोः आशीष मिश्र
फोटोः आशीष मिश्र
अपडेटेड 27 अप्रैल , 2020

राज्य कर्मचारियों ने महंगाई भत्ते समेत अन्य भत्तों पर रोक लगाने के प्रदेश सरकार के निर्णय का विरोध किया है. लाखों कर्मचारियों के महंगाई भत्ते सहित अन्य भत्तों पर रोक लगाने से प्रदेश के कर्मचारियों में काफी आक्रोश है.

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने भत्तों की कटौती के लिए वित्त विभाग को दोषी माना है.

परिषद के अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी ने कहा कि तृतीय श्रेणी एवं चुतर्थ श्रेणी कर्मचारी वैसे ही अल्प वेतन भोगी हैं ऐसे में उनके महंगाई एवं अन्य भत्तों की कटौती कष्ट दायक है. परिषद के महामंत्री शिवबरन सिंह यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से एक अप्रैल को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कर्मचारियों को आश्वासन दिया गया था कि इस वैश्विक महामारी में प्रदेश के कर्मचारी पूरी मेहनत से दिन-रात राहत व बचाव कार्य कर रहे हैं. उनके वेतन आदि में कोई कटौती नहीं की जायेगी. बावजूद वित्त विभाग की ओर से कटौती का आदेश जारी कर दिया गया है.

राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजिनियर संगठन के केंद्रीय महासचिव जय प्रकाश ने कहा कि बिजलीकर्मी और उनके परिवार के जीवकोपार्जन का आधार महंगाई भत्ता है. ऐसे में महंगाई सहित अन्य भत्ते रोकना अलोकतांत्रिक कदम है.

वहीं, राज्य विद्युत परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष दीपक चक्रवर्ती ने कहा कि सरकार के फैसले से बिजलीकर्मियों के वेतन से 40 हजार से तीन लाख रुपये तक की स्थायी कटौती होगी. विद्युत कार्यालय सहायक संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सुनील पाल और यूपी विद्युत पेंशनर्स परिषद के महासचिव कप्तान सिंह ने कहा कि सरकार को अपने फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए.

भत्तों में कटौती को प्रदेश कांग्रेस ने अव्यावहारिक और तुगलकी फरमान बताया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने सरकार से मांग की है कि वह इस फैसले को वापस ले.

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