इंडिया टुडे
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोरोना की महामारी और लॉकडाउन की वजह से लोगों की परेशानियों को दूर करने के लिए कई तरह के कदम उठाए हैं. राज्य के 56 लाख परिवारों को दो महीने का राशन मुफ्त देने के अलावा बिना राशन कार्ड वालों को एक महीने का राशन दिया गया है. सबसे बढ़कर मुख्यमंत्री बघेल राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत 20 लाख किसानों को नकद राशि देने जा रहे हैं.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि लॉकडाउन के कारण सबसे ज्यादा परेशानी मजदूरों और श्रमिकों को हुई है. किसानों के भी भविष्य पर संकट है. लेकिन इससे निबटने के लिए उन्होंने उनकी मदद के लिए सारे उपाय किए हैं. उन्होंने बार-बार कहा है कि वे अपने राज्य में किसी को भूखा नहीं सोने देंगे और उन्होंने ऐसा ग्राउंड पर किया भी है. छत्तीसगढ़ में 56 लाख परिवारों को दो महीने का राशन निःशुल्क दिया है. यही नहीं, उन्होंने उन लोगों को भी एक महीने का राशन दिया है जिनके पास राशनकार्ड भी नहीं है.
सरकार ने लगभग 33,000 प्रवासी श्रमिकों के लिए अस्थायी कैम्प में भोजन और अस्थायी आवास की व्यवस्था की है. किसानों के लिए भी हमने काफी उपाय किए हैं. सरकार राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत किसानों की मदद कर रही है और शीघ्र ही उनके खातों में राशि हस्तांतरित की जाएगी
दरअसल, राहुल गांधी ने पत्रकार वार्ता में कहा था कि सरकार को लोगों को खाद्यान्न के अलावा एक निश्चित नकद राशि भी देना होगी ताकि वे पुनः अपनी आर्थिक गतिविधियों को प्रारंभ कर सकें. मुख्यमंत्री बघेल ने उनसे सहमति जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार को इस पर तुरंत निर्णय लेना चाहिए. उन्होंने इस बारे में प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा है. वे छत्तीसगढ़ में राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत हम लगभग 20 लाख किसानों को नकद राशि देने जा रहे हैं. इससे इस संकट के समय उन्हें सहायता मिलेगी.
कोरोना वायरस प्रभावित राज्यों में छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन काफी बेहतर है. राज्य के 28 जिलों में से 23 जिलों में कोरोना वायरस का कोई प्रकोप नहीं हैं. वर्तमान में राज्य में कुल एक्टिव कोरोना पॉजिटिव केस 13 हैं. ये सभी एक ही जिले के हैं. कुल 36 पॉजिटीव केस में से 23 स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं. राज्य में कोरोना से किसी भी व्यक्ति की मृत्यु नहीं हुई है. अन्य राज्यों के मुकाबले हमारे राज्य में स्थिति नियंत्रण में है. राज्य सरकार ने कोरोना वायरस महामारी के प्रसार की जानकारी मिलते ही राज्य में बचाव की तैयारियां प्रारम्भ कर दी थी.
सरकार ने 27 जनवरी को ही सभी जिलों में रैपिड रिस्पांस टीम गठित कर दी थी. 28 जनवरी से एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग प्रारंभ कर दी गई थी और 1 फरवरी को आइसोलेशन अस्पताल भी प्रारंभ कर दिया था. बघेल सरकार ने स्वस्फूर्त निर्णय लेते हुए किसी भी राज्य से पहले 21 मार्च को छत्तीसगढ़ राज्य की सीमाएं सील कर दी थी. देश में लॉकडाउन होने के पहले ही 22 मार्च को मुख्यमंत्री ने राज्य में लॉकडाउन की घोषणा की. इन सब प्रयत्नों से सरकार कोरोना वायरस के प्रसार को काफी हद तक नियंत्रण करने में सफल हुई है.
लेकिन लॉकडाउन ने लोगों के रोजगार खत्म कर दिए हैं. मुख्यमंत्री मानते हैं कि रोजगार उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है लेकिन उन्होंने इसके लिए कार्ययोजना बना ली है. मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में लॉकडाउन खुलते ही मनरेगा के माध्यम से कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दे दिए हैं. कार्यों को शुरू करते हुए फिज़िकल डिस्टेंसिंग का पालन करने के भी निर्देश दिए गए हैं. छत्तीसगढ़ वन बाहुल्यता वाला प्रदेश है. सरकार ने लघु वनोपजों को समर्थन मूल्य पर खरीदने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी है. इससे वनवासियों को रोजगार मिलेगा.
छत्तीसगढ़ में स्टील, सीमेंट, कोयला आधारित उद्योगों की बहुलता है. देश की अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए इनका सुचारू रूप से संचालित होना आवश्यक है. बघेल सरकार ने केंद्र सरकार से भी इन उद्योगों को राहत पैकेज प्रदान करने का आग्रह किया है. मुख्यमंत्री को विश्वास है कि आगामी कुछ माह में ये उद्योग वापस पटरी पर आ जाएंगे.
मुख्यमंत्री बघेल का कहना है कि कोरोना से लड़ाई लंबी है. इसके लिए संसाधन जुटाना होगा और संसाधनों को लंबे समय तक के लिए बचाना भी होगा. इस महामारी से ज्यादातर लड़ाई राज्यों को ही लड़नी है. केंद्र सरकार को इसके लिए राज्य सरकार को आर्थिक मदद करना ही होगी. उन्होंने प्रधानमंत्री को इसके लिए भी पत्र लिखकर राज्यों को राहत पैकेज देने का आग्रह किया है.
मुख्यमंत्री कहते हैं कि पूर्ववर्ती सरकारों ने अधोसंरचना पर ध्यान नहीं दिया. ऐसे में कोरोना वायरस महामारी ने राज्यों के सामने कई नई चुनौती खड़ी कर दी है. कमजोर स्वास्थय अधोसंरचना उनमें से एक है. सरकार इस दिशा में विशेष ध्यान दे रही है. राज्य के हर जिले में बेहतर स्वास्थ्य अधोसंरचना उपलब्ध कराना मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में है. राज्य को नए मेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति मिल गई है. सरकार आदिवासी क्षेत्रों में भी इन सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रही है.
राज्य ने लोगों की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए पहले से ही सुपोषण छत्तीसगढ़ अभियान चला रखा है. हाट बाजार क्लीनिक योजना भी ऐसा ही कदम है जो स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर क्षेत्रों तक ले जाती है. डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य बीमा योजना और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य योजना के माध्यम से सरकार राज्य के हर वर्ग के लोगों को सुरक्षा कवर भी उपलब्ध करा रही है.
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