योगी सरकार ने 15 अप्रैल से प्रदेश में गेहूं खरीद प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा कर दी है. इसके लिए सरकार ने प्रदेश में पांच हजार क्रय केंद्रों के जरिए किसानों से सीधे गेहूं खरीद करने की योजना बनाई है. खाद्य एवं रसद आयुक्त कार्यालय के अपर आयुक्त सुनील कुमार के अनुसार प्रदेश में सरकार ने दस एजेंसियों के जरिए 55 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य तय किया है. केंद्र ने इस वर्ष गेहूं खरीद के लिए 1,925 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया है.
किसानों को सफाई, छनाई और उतराई के मद में बीस रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से अलग भुगतान सीधे उनके खातों में किया जाएगा.
लॉकडाउन के चलते किसानों से गेहूं खरीद की प्रक्रिया शुरू होने में कई तरह की दिक्कतें भी मुंह बाए खड़ी है. लखनऊ के किसान नेता हरनाम सिंह वर्मा बताते हैं “इस बार खराब मौसम की मार से त्रस्त गेहूं उत्पादक किसानों को कोरोना का कहर भी ङोलना पड़ रहा है. खेतों में कटाई के लिए फसल तैयार है लेकिन, श्रमिकों की किल्लत के अलावा पंजाब व हरियाणा जैसे राज्यों से कंबाइन हार्वेस्टर सहित अन्य मशीनें कम आने से किसान परेशान हैं.”
लॉकडाउन की वजह से गेहूं की कटाई के साथ बिक्री भी प्रभावित होती दिख रही है. निदेशक मंडी परिषद जेपी सिंह का कहना है कि कटाई में देरी के कारण मंडियों में भी गेहूं की आवक कम है. प्रदेश में अब तक मात्र 2,23,355 क्विंटल गेहूं ही मंडियों में पहुंचा है. फसल कटाई का काम देर से शुरू होने के बावजूद किसानों ने गेहूं बेचने के लिए खाद्य एवं रसद विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण कराना शुरू कर दिया है.
हालांकि पंजीकरण का कार्य भी सरकार के लिए आसान नहीं है. जिन किसानों ने अभी तक पंजीकरण नहीं कराया है उन्हें जल्द पंजीकरण कराने के लिए लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई है.
पश्चिमी जिले में तैनात एक लेखपाल जितेंद्र सिंह बताते हैं “लॉकडाउन में बहुत से लेखपाल भोजन वितरण के कार्य में लगे हुए हैं. लेखपालों से कहा गया है कि वे जिस गांव में जाएंगे वहां पर किसानों से रजिस्ट्रेशन करवाने की अपील करेंगे और अपने सामने पंजीकरण करवाएंगे. अगर रजिस्ट्रेशन में ज्यादा समय लगा तो भोजन बांटने के कार्य में देरी होगी.”
ओलावृष्टि, आंधी और बारिश से फसलों की काफी क्षति उठा चुके जिले के किसान अब खराब मौसम देखते हुए जल्द से जल्द गेहूं की फसल की कटाई और मड़ाई करा लेना चाहते हैं. लॉकडाउन के बीच केंद्र एवं प्रदेश सरकार ने भले ही किसानों को पास की अनिवार्यता से मुक्त रखा है लेकिन उनका आवागमन अब भी सहज नहीं है.
उधर इस संकट के समय का फायदा उठा कम्बाइन संचालक किसानों से मनमानी रकम वसूल रहे हैं. मसलन गोरखपुर जिले में कम्बाइन संचालक गेहूं की कटाई का 1,500 रुपये से 1,800 रुपये प्रति एकड़ कीमत वसूल रहे हैं. दूसरी ओर रीपर से भूसा बनाने के लिए प्रति ट्राली 1,800 रुपये से 2,500 रुपये तक ले रहे हैं.
एक ट्रॉली में 6 क्विंटल तक भूसा आ जाता है. ऐस में औसतन किसान को प्रति एकड़ 3500 रुपये सिर्फ कटाई और मड़ाई में खर्च हो जा रहे हैं.
इस बारे में गोरखपुर के जिला कृषि अधिकारी अरविंद कुमार चौधरी कहते हैं “यह सही है कि किसानों का उत्पादन प्रभावित हुआ है लेकिन जहां तक कम्बाइन हार्वेस्टिंग और रीपर से भूसा बनाने की दरें तय करने की बात है, इसे उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया जाएगा.”
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