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लॉकडाउन बढ़ने से 5 लाख प्रवासी मजदूरों को लेकर चिंतित है महाराष्ट्र सरकार

राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने प्रवासी मजदूरों से किया आग्रह. कहा,गांव लौटने की कोशिश न करें. उन्होंने प्रवासी मजदूरों को आश्वस्त किया कि वे जहां हैं उनके लिए वहीं महाराष्ट्र सरकार खाने-पीने और आवास की व्यवस्था करेगी.

एक प्रवासी मजदूर बच्चे को खाना खिलाता हुआ
एक प्रवासी मजदूर बच्चे को खाना खिलाता हुआ
अपडेटेड 12 अप्रैल , 2020

महाराष्ट्र सरकार उन प्रवासी मजदूरों को लेकर चिंतित है जिन्हें राज्य के अलग-अलग ठिकानों पर आश्रय दिया गया है. राज्य सरकार को आशंका है कि 14 अप्रैल के बाद जब लॉकडाउन का कार्यकाल 30 अप्रैल तक बढ़ाने की आधिकारिक घोषणा की जाएगी तब प्रवासी मजदूर अपने गांव लौटने की कोशिश करेंगे. ऐसे में ये प्रवासी मजदूर राज्य सरकार के लिए नया संकट पैदा कर सकते हैं. इसलिए इन प्रवासी मजदूरों को समझाकर मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा है कि वे फिलहाल अपने मन में गांव लौटने की बात न लाएं.

गौरतलब है कि राज्य के विभिन्न जिलों में पांच लाख से ज्यादा मजदूरों को आश्रय दिया गया है. इनमें प्रवासी मजदूरों के साथ राज्य के भी मजदूर शामिल हैं. राज्य सरकार की ओर से इन मजदूरों के लिए न सिर्फ रहने की व्यवस्था की गई है बल्कि उनके खाने और स्वास्थ्य सेवा का भी इंतजाम किया गया है. लेकिन कोरोना संक्रमण बढ़ने के कारण राज्य सरकार को लॉकडाउन का कार्यकाल बढ़ाना पड़ रहा है.

लंबे समय तक अपने परिवार से दूर रहने वाले इन मजदूरों में भी ये भी भावना भर रही है कि आखिर कब तक ऐसी स्थिति का उन्हें सामना करना पड़ेगा. मजदूरों की इस भावना को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है. इसलिए राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने प्रवासी मजदूरों से आग्रह किया है कि कोरोना संक्रमण के कारण राज्य और देश में जो माहौल है ऐसे में उनको गांव लौटने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. उन्होंने मजदूरों से कहा है कि वे वहीं रहें जहां वे अभी रह रहे हैं. महाराष्ट्र सरकार गांरटी के साथ उनके लिए आवास की व्यवस्था कर रखी है और उनके लिए पर्याप्त भोजन है. उन्हें यहां किसी भी तरह की तकलीफ नहीं होगी. गृह मंत्री देशमुख ने उनसे अपील भी की कि वे इस कठिन समय में राज्य सरकार को सहयोग करें.

बीते दिनों राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी कहा था कि लॉकडाउन के कारण जो बेघर लोग, राज्य के मजदूर और दूसरे प्रांत के मजदूर अटक गए थे उनके आवास और भोजन की व्यवस्था की गई है. पांच लाख से ज्यादा मजदूर हैं उनको जहां ठहराया गया है वहां पर उनके लिए तीन समय के भोजन उपलब्ध कराए जा रहे हैं. उनकी सारी जिम्मेदारी महाराष्ट्र सरकार ने ली है.

ये मजदूर महाराष्ट्र सरकार की सेवा ले रहे थे ये सोचकर कि 14 अप्रैल के बाद उन्हें अपने गांव लौटने को मिलेगा. अब जब लॉकडाउन बढ़ाया जा रहा है तो राज्य सरकार भी आशंका में है कि ये मजदूर गांव लौटने की जिद्द कर सकते हैं और फिर उससे परेशानी बढ़ सकती है. इस संकट को भांपते हुए राज्य के गृह मंत्री देशमुख कानून-व्यवस्था पर भी गौर कर रहे हैं और इन मजदूरों को विश्वास दिला रहे हैं कि इस कठिन समय में सरकारी तंत्र, पुलिस प्रणाली और स्वास्थ्य प्रणाली आपके साथ हैं. किसी तरह की चिंता न करें. राज्य सरकार पर्याप्त भोजन, आश्रय और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर रही है.

गृह मंत्री देशमुख ने मजदूरों से कहा है कि कोरोना संकट न केवल हमारे राज्य, हमारे देश बल्कि पूरे विश्व को प्रभावित कर रहा है. यदि आप इन कठिन समय में शहर लौटने की कोशिश करते हैं तो आपको संभवतः रास्ते में रोक दिया जाएगा. यदि आपको गांव में नहीं ले जाया जाता है तो आप अधिक कठिन परिस्थितियों का सामना करेंगे. दुर्भाग्य से किसी साथी से कोरोना संक्रमण का शिकार होने का खतरा बढ़ जाएगा.

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