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कोरोना लॉकडाउन में खेती का काम कैसे होगा, कुछ सवालों के जवाब

भारत में कोरोना की वजह से लॉकडाउन ने सबसे बुरा असर खेती पर डाला है. फसलें खेतों में खड़ी हैं. ऐसे में किसानों के मन में यह सवाल आना लाजमी है कि कटाई के लिए क्या उन्हें छूट मिलेगी? मशीनों का इस्तेमाल कितना होगा और कैसे होगा. जानिए अहम बिंदु जो आपके लिए जानना है बेहद जरूरी है

फोटोः चिन्मयानंद सिंह
फोटोः चिन्मयानंद सिंह
अपडेटेड 31 मार्च , 2020

भारत में कोरोना की वजह से लॉकडाउन ने सबसे बुरा असर खेती पर डाला है. फसलें खेतों में खड़ी हैं. ऐसे में किसानों के मन में यह सवाल आना लाजमी है कि कटाई के लिए क्या उन्हें छूट मिलेगी? मशीनों का इस्तेमाल कितना होगा और कैसे होगा. जानिए अहम बिंदु जो आपके लिए जानना है बेहद जरूरी है

1. किसानों के उन कर्जों का क्या होगा जो हाल फिलहाल में चुकाने योग्य थे.

कोरोना संकट के कारण लॉकडाउन की वजह से केंद्र सरकार ने किसानों के कर्ज चुकाने की अंतिम तारीख आगे बढ़ा दी है. यानी किसानों को सस्ते फसली कर्ज को चुकाने का मौका मिलेगा 31 मई तक. यह सीमा तीन लाख रुपये तक के कर्ज के लिए है. कृषि मंत्रालय की एक स्कीम के तहत फसली कर्ज पर, बैंक दो प्रतिशत ब्याज माफ करते हैं और किसानों को समय से कर्ज चुकाने पर ब्याज में तीन फीसदी की रियायत भी मिलती है. यानी कि कर्ज पर ब्याज है केवल चार फीसदी. इस स्कीम के तहत लिये गए कर्ज को चुकाने की तारीख बढ़ाई गई है.

लॉकडाउन के मद्देनजर देशभर में लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है. ऐसे में कई किसान कर्ज चुकाने के लिए भी बैंकों तक नहीं जा पा रहे हैं. इसके अलावा, कृषि उत्पादों की समय पर बिक्री और उसका पैसा पाने में भी किसानों को मुश्किल हो रही है. इसलिए सरकार ने यह फैसला किया है.

भारत में किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड और कॉपरेटिव सोयायटी के जरिए फसली लोन दिए जाते हैं.

2. लॉकडाउन के दौरान किसानों को किन कामों में राहत है. कौन सी दुकानें खुली रहेंगी.

लॉकडाउन के दौरान किसान को राहत देते हुए सरकार ने खेती से जुड़े कामों की इजाजत दी है. इसके लिए उर्वरकों की दुकानों और खरीद एजेंसियों को भी छूट दी गई है, जिससे कोरोना वायरस की वजह से देशभर में हुए लॉकडाउन के दौरान किसान खेती कर सकें.

केंद्र सरकार ने खेती से जुड़े कामकाज, मशीनरी, उर्वरक, खाद और बीज की दुकानों को लॉकडाउन के दायरे से बाहर कर दिया है. अब किसान आराम से खेत पर जा सकते हैं. किसान ट्रैक्टर से जुताई कर सकते है, कंबाईन मशीन से फसल काट सकते हैं. बीज और रासायनिक उर्वरक खरीद सकते हैं. और अपनी फसल मंडी तक ले जा सकते हैं.

3. पशु चारे और पॉल्ट्री फीड के वाहनों का क्या होगा?

गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों के लिए आदेश जारी किया है कि सभी राज्य पशु आहार और चारे के आवाजाही पर कोई रोक न लगाएं.

4. कृषि कार्य में क्या-क्या छूट है? सोशल डिस्टेंसिंग का क्या होगा?

किसानों और विशेषज्ञों की मांग के बाद इस वक्त की स्थिति यह है

-किसान बिना रुकावट खेती-बाड़ी कर सकते हैं

-खेत पर मजदूर लगाए जा सकते हैं.

-फसल कटाई से जड़ी मशीनें (कंबाइन-रीपर) वगैरह एक राज्य से दूसरे राज्य में जा सकेंगे

-सभी सरकारी मंडिया कृषि उत्पादन मंडी समितियां या फिर वो मंडियां जिन्हें राज्य सरकारों ने मान्यता दी हो, खुली रहेंगी.

-खाद-बीज और रासायनिक कीटनाशक की दुकानें खुली रहेंगी

-फार्म मशीनरी, कस्टम हायरिंग सेंटर उपलब्ध रहेंगे

इसमें कहा गया है कि कृषि यंत्रों के साथ किसान और मजदूर खेत में काम कर सकेंगे. साथ ही कीटनाशक दवाओं, बीज और खाद की बिक्री होती रहेगी. बता दें कि 24 मार्च को केंद्र की ओर से जारी नोटिफिकेशन लॉकडाउन के दौरान लोगों को परेशानी ना हो, इसके लिए निर्देश दिए गए हैं. स्वास्थ्य और खाने-पीने की चीजों समेत आवश्यक चीजों की सप्लाई को बनाए रखने को कहा गया है.

5. कौन सी मशीनें छूट में हैं?

-रबी फसल की कटाई में इस्तेमाल होने वाले कंबाईन हार्वेस्टर काम करेंगे, खेतों में मजदूर भी काम कर सकेंगे.

-रेलवे रैक रासायनकि खाद ढोने के लिए चलते रहेंगे. इन कामों में लगे मजदूरों की आवाजाही की भी छूट है.

-रोपाई के मशीन चलाने और उसके चालकों को छूट है. खाद के कारखाने काम करते रहेंगे

6. खेतों से निकले सामान की खपत कैसे होगी?

गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देश के अनुसार राशन, खाने-पीने की चीजों, फल-सब्जी, मीट, मछली और डेयरी आदि आवश्यक चीजों से संबंधित दुकानों को इस लॉकडाउन से छूट दी गई है.

7. सरकारी आदेश में बहुत सारी चीजों को, खेती के उपकरणों वगैरह को जरूरी चीजों में शामिल किया गया था. कहा गया पास दिए जाएंगे. पर यह खेती के लिए कितनी बड़ी समस्या है और क्या करना चाहिए?

कृषि को लॉकडाउन में नहीं रख सकते. कृषि कोई ऐसा उद्योग नहीं कि जब मर्जी शटर बंद करें और जब मर्जी खोल दें. यह जानते हुए कि अभी कटाई का सीजन है कि हमें यह तय करना होगा कि बाधा न आए इसमें. दूध और टमाटर, सब्जी वगैरह खराब होने वाली चीजें हैं गाय तो रोज़ दूध देगी, टमाटर भी वक्त पर पकेगा, इससे सारा नुक्सान किसान का होगा. कोरोना का संक्रमण ऐसी स्टेज पर है कि इतना समय नहीं था कि मैनेज किया जा सके. गृह मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी की गई है. उसको लागू करने में देरी हो रही है क्योंकि एक अंतर है जिला प्रशासन और सरकार में. इस पर ध्यान देने की जरूरत है. वरना सारा का सारा इस संकट का बोझ किसान पर आ जाएगा.

(कृषि विशेषज्ञ देविन्दर शर्मा और अन्य जानकारों से मंजीत ठाकुर और संध्या द्विवेदी की बातचीत पर आधारित)

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