अब नया साल आया है तो कुछ संकल्प भी लिए जाएंगे. कुछ वादे खुद से और कुछ अपने करीबियों से किए जाएंगे. लेकिन जैसा हमेशा से होता आया है. वैसा ही होगा. ज्यादातर संकल्प टूट जाएंगे. यूएस न्यूज ऐंड वर्ल्ड रिपोर्ट के मुताबिक नए साल में लिए गए 80 फीसदी संकल्प टूट जाते हैं. तो जैसा कि मनोविज्ञान भी मानता है कि शब्दों की अपनी ताकत होती है. कुछ नकारात्मक शब्द होते हैं तो कुछ सकारात्मक होते हैं. इआइ कैमिनो कॉलेज में लिंग्विस्टिक डिपार्टमेंट में प्रोफेसर बर्बरा ए जेफे लगातार शब्दों की ताकत पर काम कर रही हैं. उन्होंने बताया कैसे शब्दों की एनटॉमी यानी उनका गठन और कहने का तरीका उनके प्रभाव को सकारात्मक या नकारात्मक बनाता है.
वे कहती हैं, ठीक उसी तरह रिजॉल्यूशन एक ऐसा शब्द है जो आपसे डिमांड करता है. चीखता है. दबाव बनाता है. कुछ इस तरह की एक बार मैं सोच लेता हूं तो फिर खुद की भी नहीं सुनता. तो आधा बल तो आपका इसे लेते वक्त ही खत्म हो जाता है. क्योंकि दबाव में सुधार नहीं सप्रेशन यानी दमन होता है. अपनी इच्छाओं को बलपूर्वक दबाना ही दमन है. लेकिन इच्छाओं को समझाकर उन्हें सही रास्ते पर लाना सुधार है. आखिर, इच्छाएं भी कब तक दबी रहेंगी, जैसे ही उन्हें खाद पानी मिलेगा वे प्रबल हो जाएंगी. जैसे आपने सिगरेट न पीने का संकल्प लिया लेकिन कोई पुराना साथी मिला और कहा, अरे संकल्प के लिए तो पूरी जिंदगी पड़ी है. आज पी लो फिर कल से 'संकल्प पथ' पर चलना. वजन कम करने का संकल्प लिया तो आज तो जन्मदिन है. बस आज पित्जा खा लें, फिर कल से डाइट पर रहेंगे. अमूमन यही होता है.
तो सबसे पहले इस शब्द से ही तौबा करें...
तो क्या करें? अरे भाई खुद से वादा करें. नए साल में खुद से या अपने प्रियजनों से कुछ सकारात्मक वादे करें. और उन्हे पूरा करने की पूरी कोशिश करें. लेकिन उनकी मात्रा बिल्कुल तय न करें. जैसे 10 किलो वजन आप घटाएंगे. इस बार बिल्कुल सिगरेट पीना बंद कर देंगे. क्योंकि बेहतर तो बेहतर होता है. अगर पिछले साल आप 10 सिगरेट पीते थे और इस साल 9 पी रहें तो बेहतर तो हुआ न. वजन 10 किलो न सही 5 किलो ही सही कम तो हुआ न.
खुद को सराहें
आपने जो वादा किया था, उस पर अगर आप एक कदम भी चल पाएं हैं तो खुद की पीठ ठोकें. और मन ही मन दोहराएं, 'मैं कर सकता हूं.'
खुद थप्पड़ नीं थपकी दें
कई बार हम खुद से इतना बड़ा वादा कर लेते हैं कि हम उसके बोझ तले दब जाते हैं. अरे भाई वादा कोई थप्पड़ नहीं बल्कि थपकी है, यह सोचकर खुद से कोई वादा करें. छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर बड़े से बड़ा काम किया जा सकता है.
रिजॉल्यूशन की हिस्ट्री
ज्यादातर लोगों को तो यही लगता है कि रिजॉल्यूशन कोई मॉडर्न टर्म है. नहीं भाई. आज से 4000 वर्ष पूर्व बेबीलोनिया संस्कृति में लोग नए साल से पहले की शाम को संकल्प लेते थे. हालांकि उनका नया साल जनवरी में नहीं होता था बल्कि मार्च के मध्य में होता था. वे अपने ईश्वर से वादा करते थे कि इस साल उन्होंने जो कर्ज लिया है या फिर किसी से कोई भी वस्तु उधार ली है, उसे वापस कर देंगे. नए साल का उत्सव 12 दिन चलता था. इस अवधि को अकीतू कहते थे. हालांकि इस रिजॉल्यूशन के पीछे भी डर ही होता था. लोगों को लगता था कि अगर वे लोगों से उधार ली गई वस्तुएं वापस नहीं करेंग या फिर कर्ज नहीं चुकाएंगे तो भगवान दंडस्वरूप उनकी फसलें बर्बाद कर देगा.
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