scorecardresearch

वकालत नहीं कर पाएंगे फिसड्डी एलएलबी पास

फिसड्डी रैंक पाने वाले एलएलबी नहीं कर पाएंगे वकालत की प्रैक्टिस, 45 फीसदी से दशमलव 1 फीसदी कम आने पर भी नहीं होगा वकालत का रजिस्ट्रेशन

प्रतिनिधि तस्वीर
प्रतिनिधि तस्वीर
अपडेटेड 18 नवंबर , 2019

कानून की पढ़ाई कम अंकों से पास करने वालों के लिए अब वकालत का पेशा करना नामुमकिन है. वकालत का लाइसेंस हासिल करने के लिए 45 फीसदी नंबर आना जरूरी है. इससे जरा भी कम अंक आने पर वकालत के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं होगा. 

पिछले दिनों पंजाब-हरियाणा हाइकोर्ट ने एक युवती की याचिका खारिज करते हुए कहा कि सिर्फ इस आधार पर नहीं मंजूर की जा सकती कि उसका कैरियर तबाह हो जाएगा. इस संबंध में लीगल एजुकेशन रूल्स, 2008 की धारा 7 के प्रावधान बिल्कुल स्पष्ट हैं. दरअसल, केस दायर करने वाली युवती ने एलएलबी में 44.70 फीसदी अंक हासिल किए थे; लेकिन नियम स्पष्ट हैं कि 45 फीसदी अंक वकालत का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए जरूरी हैं. इस संबंध में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्रा का कहना है कि 2008 से नियम बदल गए हैं और अब सामान्य श्रेणी के लिए 45 फीसदी अंकों की सीमा है. इतने अंक पाए बगैर वकालत का लाइसेंस नहीं हासिल किया जा सकता है. 

इस मामले में हाइकोर्ट के फैसले में एक बात और साफ हुई कि 45 फीसदी का मतलब 45 फीसदी ही होगा. साढ़े चौवालीस या पौने पैंतालीस को राउंड ऑफ करके 45 फीसदी नहीं किया जाएगा. मालूम हो कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया समय-समय पर अपने नियमों में बदलाव करती रहती है और ये अंक सीमा उसने खुद वकीलों पर लगाई है. 

देश में लाखों वकील हैं जो प्रैक्टिस कर रहे हैं. लेकिन ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो नौकरी या राजनीति में काफी वक्त देने के बाद वकालत की परीक्षा देते हैं. कई पुलिस अफसर भी नौकरी के दौरान वकालत करते हैं. ये सारे लोग पढ़ाई को वक्त नहीं दे पाते. इस फैसले से जाहिर है कि बिना पढ़े सीधे एलएलबी की परीक्षा देने पहुंचे लोग नकल या अन्य तरीकों से पास तो हो सकते हैं लेकिन 45 फीसदी अंक लाना उनके लिए टेढ़ी खीर हो सकती है.

***

Advertisement
Advertisement