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असम- हाजिर है ‘बच्चा पार्टी’ का चुनावी घोषणा पत्र !

देश में असम ऐसा पहला राज्य है जहां बच्चों ने अपना चुनावी एजेंडा तय किया है. सियासी दलों से मिलकर घोषणा पत्र में बच्चों के मुद्दों को भी शामिल करने की मांग की है.

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर असम के एक स्कूल में तिरंगा फहराते बच्चे
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर असम के एक स्कूल में तिरंगा फहराते बच्चे

पूर्वोत्तर में भाजपा के चुनावी रथ के सारथी बने हेमंत बिस्वा सरमा ने 15 अगस्त 2017 में राष्ट्रवादी भावना से ओतप्रोत एक तस्वीर ट्वीटर में साझा की थी. इस तस्वीर में असम के धुबरी जिले के एक स्कूल के बच्चे और टीचर बाढ़ के पानी में आधा डूबकर तिरंगा फहरा रहे थे. एडॉलसेंट एंड चाइल्ड राइट्स नेटवर्क असम (एसीआरएनए) के प्रमुख डॉ. चिरंजीब ककोटे पूछते हैं, क्या यह तस्वीर राष्ट्री गर्व का प्रतीक बन सकती है? दरअसल असम में दर्जनों स्कूल ऐसे हैं जो बरसात के मौसम में बाढ़ की वजह से ठप पड़ जाते हैं. ऐसे में एसीआरएनए ने करीब 21 संस्थाओं के साथ मिलकर इस बार चुनावी घोषणा पत्र में बच्चों के मुद्दों को तरजीह दिलवाने का एक नायाब तरीका खोजा.

''चुनावी घोषणा पत्र बनाते समय पार्टियां देश के भविष्य को भूल जाती हैं, आज के बच्चे कल के वोटर होंगे.'' एडॉलसेंट और चाइल्ड राइट्स नेटवर्क आसाम (एसीआरएनए) में शामिल 21 सहयोगी संगठनों ने अगले महीने से शुरू होने वाले आम चुनावों के लिए बच्चों के मुद्दों की एक सूची तैयार की है. बच्चों से मुलाकात और फिर उनके मुद्दों को लेकर ब्रेन स्टॉर्मिंग का काम करने वाले एसीआरएनए के दल का नेतृत्व कर रहे डॉ. चिरंजीब ककोटे ने बताया, एक साल आठ महीन की भारी मशक्कत के बाद इस सूची को तैयार किया गया है. डॉ. ककोटे कहते हैं, इन मुद्दों को तय करते वक्त न बच्चों को कोई दिशा निर्देश दिए गए और न ही उनके मुद्दों में काट छांट की गई. संस्था की तरफ से बच्चों से मुलाकात करने वाले दल ने उन्हें इस प्रक्रिया का बस मकसद भर बताया. वे कहते हैं, कोई भी सियासी दल बच्चों के मुद्दों को तरजीह नहीं देता. शायद इसकी वजह वर्तमान में उनका वोटर न होना है, लेकिन ध्यान रहे यही बच्चे कल वोटर भी बनेंगे.  

क्या हैं मुद्दे

हर साल बाढ़ आती है और हर साल स्कूल ठप होते हैं. असम में कई स्कूल बरसात के मौसम में यदाकदा ही खुलते हैं. यह समस्या हर साल की है लेकिन किसी भी सरकार का ध्यान इस तरफ नहीं जाता. ऐसे में सूची में बाढ़ प्रबंधन के मुद्दे को प्रमुखता से शामिल किया गया है. सफाई, स्कूलों में शौचालय, स्वास्थ्य, कुपोषण, मां और बच्चे की मृत्यु दर, आंगनबाड़ी में मां और बच्चों के स्वास्थ की देखभाल, मिड डे मील और सबसे जरूरी बाढ़ के दौरान ठप होने वाली शिक्षा व्यवस्था के लिए जरूरी कदम उठाना. बाल श्रम, चाइल्ड ट्रैफिकिंग, बाल विवाह के मुद्दे भी सूची में शामिल किए गए. लड़कियों ने प्रमुखता से स्कूलों में सैनिटरी पैड की व्यवस्था जरूरी तौर पर लागू करने की मांग रखी.

सियासी दलों से मिली बच्चा पार्टी

राज्य से करीब 500 बच्चों ने पांच सियासी दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर अपना एजेंडा पत्र सौंपा. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस, असम गण परिषद (आगप), ऑल इंडिया यूनाइटिड डेमोक्रेटिक फ्रंस (एआइयूडीएफ), बोडोलैंड पिपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) को बच्चों का एक प्रतिनिधी दल अपना एजेंडा सौंप चुका है. भाजपा, आगप, एआइयूडीएफ ने भरोसा भी दिलाया है कि वे बच्चों के एजेंडे को अपने-अपने घोषणा पत्र में शामिल करेंगे.

...और भी राज्यों में बच्चे उठाएंगे मांग

डॉ. चिरंजीब ककोटे ने कहा, फिलहाल अभी एक राज्य में हमने यह पहल की है. हमारा नेटवर्क असम में ही है. लेकिन दूसरे राज्यों के संगठन भी बच्चों के एजेंडे पर अगर काम करना चाहेंगे हम उनके साथ जरूर शामिल होंगे. फिलहाल हम पार्टियों के घोषणा पत्र का इंतजार कर रहे हैं.

इस अनूठी पहल के साथ असम देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां बच्चों ने लोकसभा चुनाव के दौरान सियासी दलों को अपना एजेंडा पत्र सौंपा है. अगर यह पहल कामयाब होती है तो दूसरे राज्यों में भी बच्चों के मुद्दों को सियासी दल तवज्जो देने के लिए आगे आ सकते हैं.

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