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कांग्रेस ने बीजेपी को दिया नया नाम कहा, बीजेपी बोले तो 'बहुत ज्यादा प्राइस'

ईंधनों की कीमत में आई इस बढ़ोतरी के लिए सरकार के टैक्स टेरर को जिम्मेदार ठहराते हुए कांग्रेस ने कहा कि चुनाव में सिर्फ कुछ ही महीने बाकी हैं और यह सरकार की ताबूत में आखिरी कील साबित होगा.

कांग्रेस ने चेताया, भाजपा को ले डूबेगी ये महंगाई
कांग्रेस ने चेताया, भाजपा को ले डूबेगी ये महंगाई
अपडेटेड 1 अक्टूबर , 2018

नई दिल्ली।  एक बहुत मशहूर कहावत है, कभी नाव पर हाथी, कभी हाथी पर नाव. जिस मुद्दे पर कभी भाजपा कांग्रेस को घेरती थी, आज कांग्रेस ने उसी को लेकर भाजपा का नया नामकरण कर दिया. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने बीजेपी का नया नामकरण किया हैः बहुत ज्यादा प्राइस.

जाहिर है, कांग्रेस पार्टी ने सीएनजी और रसोई गैस महंगे किए जाने पर भाजपा को घेरने की कोशिश की है. खेड़ा ने कहा कि आम लोगों की बचत पर डाका डालना भाजपा का पुराना और आजामाया हुआ नुस्ख़ा है.

खेड़ा ने कहा कि पहले तो पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती महंगाई और फिर एलपीजी और सीएनजी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी करके आम आदमी पर भाजपा ने करारा वार किया है.

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और जनता इस जन-विरोधी मोदी सरकार को चुनाव में करारा जवाब देगी.

ईंधनों की कीमत में आई इस बढ़ोतरी के लिए सरकार के टैक्स टेरर को जिम्मेदार ठहराते हुए कांग्रेस ने कहा कि चुनाव में सिर्फ कुछ ही महीने बाकी हैं और यह सरकार की ताबूत में आखिरी कील साबित होगा.

अच्छे दिनों का सपना ऐसा टूटकर बिखर गया है कि उसकी अब मरम्मत भी नहीं की जा सकती है. लोग पेट्रोल के बहाने इस लूट-पाट से तंग आ चुके हैं.  

गौरतलब है कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से रसोई गैस की कीमतों में चार सौ रु. की वृद्धि हो चुकी है. जबकि प्राकृतिक गैस की कीमत में भी 10 फीसदी का इजाफा हुआ है जिसका असर सीएनजी, पीएनजी, यूरिया और उर्वरकों तथा बिजली की कीमतों पर पड़ रह है.

दिल्ली में सीएनजी, पीएनजी की कीमतों में 1.70 रु. और 1.30 रु. प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई है. इसका अर्थ हुआ कि बिजली उत्पादन पर भी इसका असर पड़ेगा और बिजली के बिल भी अधिक आएंगे.

इसको अगर पेट्रोल और डीजल की बढ़ी हुई कीमतों से जोड़ दिया जाए तो एक आम आदमी के घर का पूरा बजट ही बिखर जाएगा.

कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री ने क्या इसी दिन के लिए मध्य वर्ग से गैस की सब्सिडी छोड़ने की अपली की थी?

दुर्भाग्य से, उनका यह जुमला गरीबों और मध्य वर्ग दोनों को मार गया है.

ध्यान रहे कि मई 2014 में 14.2 किग्रा वाले रसोई गैस के सिलिंडर की कीमत 414 रु. थी जो आज एक अक्तूबर 2018 को 831 रु. प्रति सिलिंडर हो चुकी है. यानी 52 महीनों में 399 रु. की बढ़ोतरी हुई है.

इसी तरह, सब्सिडी वाले सिलिंडर की कीमत 412 रु. (मई 2014) से बढ़कर सितंबर 2018 में 502 रु. कर दी गई. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उज्ज्वला योजना को प्रचारित तो बहुत किया गया पर दूसरी बार फीलिंग की कोई गारंटी नहीं है.

जिस 1600 रु. की छूट कनेक्शन लेने पर दी जाती है. वह भी किस्तों में लाभार्थी को चुकानी ही पड़ती है. गैस बर्नर की कीमत भी किस्तों में चुकानी होती है. लेकिन लाभार्थी के पास संसाधनों की कमी ही इस योजना की नाकामी की वजह है.

 पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर यूपीए और एनडीए सरकार के बीच तुलना करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस के बीते दिन भाजपा के अच्छे दिनों से बेहतर थे. उन्होंने कहा कि मई 2014 में पेट्रोल की कीमत 71.41 रु. थी आज यह 83.81 रु. है इसी तरह डीजल 55.49 रु. प्रति लीटर थी जो आज 75.17 रु. हो गई है.

इन 52 महीनों में पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर 12 रु. से अधिक का इजाफा हुआ है, जबकि डीजल में प्रति लीटर 19.68 रु. की बढ़ोतरी की गई है.

गौरतलब है कि 2 अक्तूबर से कांग्रेस कार्यकारिणी की वर्धा में बैठक होने वाली है.

माना जा रहा है कि वहां राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों की रणनीति तैयार करने के साथ ही लोकसभा चुनाव की तैयारियों पर भी अहम फैसले लिए जाएंगे.

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