करोड़ों वसूल कर दस साल से फ्लैट खरीदारों को एक अदद छत के लिए तरसा रहे आम्रपाली ग्रुप के डायरेक्टर्स और प्रोमोटर्स को सुप्रीम कोर्ट ने सख्त निर्देश दिए हैं. आम्रपाली ग्रुप को चेतावनी देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि या तो तय समयानुसार खरीदारों को घर दें या फिर जेल जाने को तैयार रहें.
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कई बार जब खरीदारों ने आशंका जताई कि नए-नए कानूनी पेंच फंसाकर ये बिल्डर मामले को लटका रहे हैं. ये झूठ ही बोलते रहे हैं. इस पर जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि अगर आम्रपाली वाले वादे के मुताबिक समय पर प्रोजेक्ट्स पूरा कर खरीदारों को फ्लैट्स नहीं देंगे तो हम इनको जेल भेज देंगे.

दरअसल आम्रपाली को ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लैजर पार्क प्रोजेक्ट में 19 टावर पूरे करने के लिए निर्माण शुरु कर पूरा करने की इजाजत कोर्ट ने दी.
इससे पहले कोर्ट ने इस प्रोजेक्ट के काम को यह कहते हुए बंद करवा दिया था कि खरीदारों के बकाया 87 करोड़ रुपए कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराओ फिर काम शुरू कर सबको फ्लैट दो.
इस पर प्रमोटर ने कहा था कि उसके पास इतनी रकम नहीं है कि वह कोर्ट में भी पैसा जमा कर दे और और बाद में प्रोजेक्ट पूरा भी कर दे.
आम्रपाली कहना था कि या तो वो कोर्ट में पैसा जमा कर सकता है या फिर प्रोजेक्ट पूरा कर सकता है.
कोर्ट ने आम्रपाली के प्रस्ताव के मुताबिक 1,665 फ्लैट जल्द से जल्द तैयार करने को कहा.
कोर्ट ने इसके लिए 13 डेवलपर्स से साझेदारी की अनुमति दी. कोर्ट ने सात मार्च तक आम्रपाली कोर्ट में इसके लिए अंडरटेकिंग दाखिल करने को कहा.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि वो इसकी निगरानी करेगा और 27 मार्च को सुनवाई करेगा.
बाकी प्रोजेक्ट पर सुनवाई 15 मार्च को कोर्ट ने कहा कि हम पर ना रेरा का कोई असर होगा और ना ही दिवालियापन कार्रवाई का. कोर्ट की कोशिश है कि लोगों को फ्लैट मिल सकें.
वहीं आम्रपाली की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल ब्यौरे में कहा गया है कि उसके 10 प्रोजेक्ट में 10647 फ्लैटों में से 980 फ्लैट 3 से 6 महीने के बीच 2085 फ्लैट 6 से 9 महीने के बीच, 3130 फ्लैट 9 से 12 महीने के बीच और 4452 फ्लैट 12 से 15 महीने के बीच तैयार होंगे. फ्लैट तैयार होने के बाद खरीदारों को कब्जा दिया जाएगा. पहले फेज में 19 टावरों के काम पूरा करने के लिए 87 करोड रुपये का खर्च आएगा.
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