
उत्तराखंड के सीमांत गांव भी अब देश के आखिरी नहीं 'प्रथम गांव' हैं. केंद्र सरकार ने 15 अगस्त, 2023 को 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' शुरू किया था. इसका मकसद था देश की सीमांत बसाहटों को आखिरी गांव न मानकर देश का 'प्रथम गांव' माना जाए. इस विजन के तहत इन गांवों का विकास किया जाना है. उत्तराखंड में ऐसे गांवों के विकास में 'होमस्टे योजना' के तहत बने होमस्टे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
इसके लिए सरकार की कुछ पहलकदमियां बड़ी कारगर साबित हो रही हैं. साहसिक खेलों का आयोजन एक ऐसी ही गतिविधि है. उत्तराखंड में भारत-चीन सीमा से सटे चमोली जिले में पड़ने वाली नीति घाटी में बीती 31 मई को ऐसे ही तीन दिवसीय आयोजन की शुरुआत हुई. राज्य सरकार ने 'नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन' यानी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मैराथन दौड़ का आयोजन किया.
सूबे के पर्यटन महकमे ने भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के सहयोग से इस मेगा इवेंट को अंजाम दिया. समुद्र तल से हजारों फुट की ऊंचाई पर बने दुर्गम ट्रैक, तीखी चढ़ाइयों और चुनौतीपूर्ण पहाड़ी रास्तों के बीच गमसाली से मलारी के बीच आयोजित 30 किलोमीटर माउंटेन बाइकिंग (एमटीबी) चैलेंज से इस आयोजन का समापन हुआ.
इसमें देश के 27 राज्यों से आए 1,200 से ज्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. ऐसा माना जा रहा है कि पलायन और दुर्गमता के कारण चर्चा में रहने वाली नीति घाटी अब एडवेंचर टूरिज्म के मानचित्र पर तेजी से उभरेगी. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस आयोजन को उत्तराखंड के सीमांत इलाकों में वैश्विक एडवेंचर टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने का एक कदम मानते हैं.
चमोली जिले के प्रभारी मंत्री भरत सिंह चौधरी ने 'नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन' का उद्घाटन किया था. वे कहते हैं कि सीमांत गांवों में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और इसके साथ-साथ इस सीमांत क्षेत्र के द्वितीय रक्षा पंक्ति के गांव और ज्यादा मजबूत होंगे. चमोली जिले में ही देश के प्रथम गांव माणा के पर्यटन विकास के तहत बुनियादी ढांचे को आधुनिक स्वरूप देने के लिए 56.16 करोड़ रुपए की योजनाएं स्वीकृत की गई हैं.
उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने चमोली जिले की नीति घाटी में जो आयोजन किया था, अब उसके नतीजे भी दिखने लगे हैं. करीब दो हफ्ते पहले यहां रजिस्टर्ड होमस्टे में रूम की संख्या मात्र 35 थी जबकि आयोजन के दौरान ही यह संख्या बढ़कर 650 हो गई.
होमस्टे के नाम पर गड़बड़झाले
हालांकि उत्तराखंड में होमस्टे योजना के तहत अब तक सब कुछ सही चला हो, ऐसा भी नहीं. राज्य सरकार ने 2015 में होमस्टे का रजिस्ट्रेशन शुरू किया था. लेकिन बीच में कुछ लोगों ने इस योजना के नाम पर फर्जीवाड़ा करने की कोशिश की. इसका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग भी सामने आया है. कई शहरों में कई अमीर लोगों ने होमस्टे का रजिस्ट्रेशन कराकर इसके लाभ लेते हुए होमस्टे को लीज पर दे रखा है. देहरादून जिले में ऐसे 103 होमस्टे मिले हैं जो किसी न किसी तरह से इस योजना के नियमों का उल्लंघन कर रहे थे.
देहरादून जिला प्रशासन ने सहसपुर और रायपुर विकासखंड के नगरीय क्षेत्रों में रजिस्टर्ड होमस्टे की जांच करवाई. इसके लिए पांच मजिस्ट्रेटों की टीम का गठन हुआ और उन्होंने लगभग 153 निरीक्षण किए. इस दौरान उन्हें 103 होम-स्टे गड़बड़ मिले. इन सभी के रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिए गए हैं. इनमें से कई होमस्टे में रात भर नियम विरुद्ध बार संचालन और तेज आवाज में डीजे बजाने की शिकायत मिली थी.
प्रशासन के अनुसार कुछ होमस्टे में हुड़दंगी लोगों के ठहराने की भी शिकायत सच पाई गई. जांच रिपोर्ट में सामने आया कि बड़ी संख्या में होम स्टे के लिए बने भवनों में संचालक खुद नहीं रह रहे थे, जबकि होमस्टे रजिस्ट्रेशन की मूल शर्त ही यही है. कई स्थानों पर भवनों के पूरे फ्लोर किराए पर चल रहे थे, कहीं व्यवासायिक गतिविधियां संचालित मिलीं तो कहीं होमस्टे पूरी तरह होटल में तब्दील मिले.
देहरादून जिले में गठित पांच सदस्यीय मजिस्ट्रेट की जांच कमेटी ने पाया कि मसूरी रोड, राजपुर रोड, सेवला कलां, किशन नगर, गंगोत्री विहार, पंडितवाड़ी, माजरा और प्रेमनगर समेत विभिन्न क्षेत्रों में दर्जनों होमस्टे नियमों के मुताबिक काम नहीं कर रहे थे. ऐसी ही गड़बड़ियां नैनीताल जिले में भी सामने आईं. वहां 31 होमस्टे का रजिस्ट्रेशन निरस्त किया गया है. नैनीताल जिले के डीएम डॉ. ललित मोहन रयाल के मुताबिक ''ये होमस्टे नियमों की अनदेखी करते हुए चलाए जा रहे थे और ऐसी ढील कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.''
इस बीच होमस्टे के प्रति लोगों का रुझान बढ़ता जा रहा है. आज उत्तराखंड में पांच हजार से ज्यादा होमस्टे पंजीकृत हो चुके हैं. उत्तराखंड के पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल यह जानकारी देते हुए बताते हैं, ''जब से यह योजना शुरू हुई, करीब 1,500 लोगों को इसके तहत सब्सिडी दी गई है. इसके अलावा 'ट्रेकिंग ऐंड अट्रैक्शन' योजना के तहत होमस्टे के रूम रिनोवेट कराए जा सकते हैं. इसके तहत भी कई गावों में स्थानीय लोगों के रूम को रिनोवेट किया गया है.''
अकेले पिथौरागढ़ जिले में 'अतिथि उत्तराखंड गृह आवास (होमस्टे) योजना' के तहत 712 होमस्टे रजिस्टर्ड हैं. इस मामले में पिथौरागढ़ नैनीताल के बाद दूसरे स्थान पर है. नैनीताल में 808 होमस्टे रजिस्टर्ड हैं.

नए नियम लागू हुए
इस बीच उत्तराखंड में कम्युनिटी टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कुछ और नियमों को बदला है. ईमानदारी से काम कर रहे हो होमस्टे संचालकों को उनके यहां रूम की संख्या छह से बढ़ाकर आठ करने की अनुमति दी गई है. लेकिन इसके साथ यह शर्त जोड़ी गई है कि इन सब रूम में कुल बेड की अधिकतम संख्या 24 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. होमस्टे के अंतर्गत अब रजिस्ट्रेशन केवल नगर पंचायत या ग्रामीण क्षेत्रों में ही हो सकेंगे. उत्तराखंड में खासकर ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को ही अब होमस्टे संचालन की अनुमति दी जाएगी.
दरअसल इस योजना के पर्यटन की रीढ़ के तौर पर उभरने के बाद यह बात सामने आई थी कि बड़ी संख्या में उत्तराखंड से बाहर के लोग भी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं. उत्तराखंड से बाहर के लोग व्यावसायिक रूप से बेड ऐंड ब्रेकफास्ट (बीएनबी) के रूप में अपने घरों में अतिथि ठहराकर इनका संचालन कर सकते हैं. सरकार ने इसके लिए भी नियम घोषित किए हैं.

खास बातें
> उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में होमस्टे पर्यटन की रीढ़ बने.
> राज्य में अब तक करीब 5,000 होमस्टे रजिस्टर्ड हुए हैं.
> होमस्टे योजना से सीमांत गांवों से पलायन रुकने की उम्मीद.

