
- एम.सी. पांडेय
उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य की दोनों प्रमुख पार्टियों में सरगर्मी बढ़ गई है. सत्तारूढ़ भाजपा अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का प्रदेश में दौरा करवा चुकी है. ऐसा करके वह अपना माहौल बनाने का प्रयास कर रही है. विपक्षी कांग्रेस भी इस बार पूरी ताकत से चुनौती देने के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कार्यक्रम करवाने की जुगत में है. पूर्व सैनिकों के बीच राहुल के आयोजित कार्यक्रम से भाजपा खासी असहज दिखी.
उत्तराखंड में खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण राहुल का चार और पांच जून का अल्मोड़ा, पौड़ी और देहरादून दौरा भले ही परवान न चढ़ सका लेकिन उन्होंने अपना काम कर दिया. मोबाइल के जरिए दिए भाषण में राहुल ने बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, अग्निवीर योजना और राज्य के भविष्य को लेकर उपजे असंतोष जैसे मुद्दे उठा दिए. चार साल बाद राहुल के दौरे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता काफी उत्साह में थे. पार्टी ने तैयारियों के समन्वय के लिए 'कंट्रोल रूम' बनाया था. वरिष्ठ नेताओं को जिलों में जिम्मेदारी सौंपी गई जबकि राज्य प्रभारी कुमारी शैलजा ने व्यक्तिगत रूप से व्यवस्थाओं की निगरानी की.
उत्तराखंड में पूर्व सैनिकों की लगभग 13 प्रतिशत आबादी देख कांग्रेस उनके बीच अपनी पैठ बढ़ाना चाहती है. इसके लिए पूर्व सैनिक सम्मेलन करवाने की उसकी मंशा है. इसी तरह अलग वोटर समूहों को साधने के लिए कांग्रेस सक्रिय होती दिख रही है. इस दौरे के लिए कांग्रेस के सभी क्षत्रपों ने मिलकर काम किया जिससे पूरे प्रदेश में उनकी एकजुटता का संदेश पहुंचा.
खराब मौसम के चलते दौरा रद्द हो गया. राहुल को अल्मोड़ा में एक जनसभा, देहरादून में पार्टी नेताओं के साथ बैठकें और पूर्व सैनिकों से बातचीत करनी थी. अल्मोड़ा और पौड़ी के कार्यक्रमों को राहुल ने मोबाइल और ऑडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया. राहुल ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड को स्थानीय लोग नहीं, बल्कि दिल्ली से रिमोट कंट्रोल के जरिए चलाया जा रहा है. कांग्रेस नेता ने कहा कि अग्निवीर योजना ने सैनिकों और सरकार के बीच 'पवित्र समझौते' को तोड़ दिया है, क्योंकि इससे ''सैनिकों की दीर्घकालिक सुरक्षा और लाभ कमजोर हो गए हैं.'' राहुल बोले कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो इस योजना की समीक्षा की जाएगी और इसे रद्द कर दिया जाएगा.

राहुल ने अंकिता भंडारी के माता-पिता से भी बातचीत की. इस बातचीत के जरिए उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को उठाया. राहुल के दौरे के बहाने जुटी भीड़ और एकजुट नेताओं से कांग्रेस में उत्साह का संचार हुआ. पार्टी को अपनी जमीनी ताकत का अंदाजा लगा और शीर्ष नेतृत्व को फीडबैक मिला कि कुमाऊं (अल्मोड़ा) और गढ़वाल (पौड़ी) में भाजपा के खिलाफ असंतोष को कैसे भुनाया जाए.
कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राहुल का हेलिकॉप्टर न उड़ पाने को लेकर सरकारी सिस्टम पर सवाल उठाए हैं. उनका तर्क था कि जब सिंगल इंजन हेलीकॉप्टर आ रहे हैं, तो हमारा डबल इंजन हेलीकॉप्टर कैसे नहीं आ सका? या तो हेली कंपनी या डीजीसीए या यूकाडा में से किसी को इन सवालों का जवाब देना चाहिए कि देश के प्रतिपक्ष के नेता अल्मोड़ा क्यों नहीं पहुंच पाए? उनका हेलीकॉप्टर क्यों नहीं उड़ पाया? हरीश के अनुसार, पायलट और हेली सर्विसेज सरकार संचालित एजेंसी यूकाडा और डीजीसीए की मॉनिटरिंग में चलते हैं. रावत ने कहा, ''आम लोगों के दिमाग में उठ रहे प्रश्न को ही मैं अभिव्यक्ति दे रहा हूं. ऐसा तो नहीं कि मौसम के अलावा कुछ और कारक हों?''
राहुल के दौरे में पूर्व सैनिकों को लेकर आयोजित सम्मलेन पर भाजपा की बेचैनी की बानगी मुख्यमंत्री धामी के इस बयान से मिल जाती है, ''राहुल गांधी को देश में कोई गंभीरता से नहीं लेता, क्योंकि वे भारतीय सैनिकों के शौर्य के साक्ष्य मांगने के साथ ही विदेशों में जाकर देश को नीचा दिखाते हैं. कांग्रेस उन्हें बार-बार लॉन्च करती है और वे देशविरोधी बातें कर बार-बार फेल हो जाते हैं.'' इस तरह चुनावी तैयारी भाजपा ने भी शुरू कर दी है.
राहुल के दौरे से पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के उत्तराखंड के 28, 29 और 30 मई को हुए पहले दौरे पर सरकार और भाजपा ने पूरा जोर दिखाया. दोनों ने कई कार्यक्रमों में उनका स्वागत कर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाया. लेकिन कांग्रेस ने उनके दौरे के वक्त उनके साथ चल रही दर्जनों गाड़ियों की फ्लीट को पीएम मोदी की अपील का खुला उल्लंघन बता दिया. प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा, ''भाजपा की कथनी और करनी में बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है. एक तरफ आम जनता से पेट्रोल बचाने और सादगी अपनाने की अपील की जाती है, वहीं दूसरी ओर नबीन के काफिले के स्वागत और सुरक्षा में दर्जनों गाड़ियां झोंकी गईं.'' बताते हैं नबीन के स्वागत और सुरक्षा में 35 से ज्यादा गाड़ियां शामिल थीं. दसौनी ने कहा, ''लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या सादगी और ईंधन बचत के नियम केवल आम जनता के लिए ही हैं?''

नबीन के पहले उत्तराखंड दौरे को भाजपा के 2027 के विधानसभा चुनाव में तीसरी बार जीत यानी हैट्रिक का रोडमैप बनाने की रणनीति के तौर पर प्रचारित किया गया था. पूरे शहर में दौरे से जुड़े पोस्टर लगे थे. नबीन ने भाजपा को कम अंतर से हारी हुई सीटों पर जीत दर्ज करने और कमजोर बूथों को मजबूत करने की विशेष रणनीति बनाने का मंत्र दिया. उन्होंने सीएम धामी के कार्यों, विशेषकर समान नागरिक संहिता और चारधाम यात्रा प्रबंधन की प्रशंसा की जिससे पार्टी में सरकार के नेतृत्व को लेकर स्पष्ट संदेश दे दिया गया.
नबीन ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में बतौर वीआइपी भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री अजेय कुमार का नाम घसीटे जाने से पार्टी पर पड़ रहे प्रभाव पर नेताओं से बात की. हालांकि, अजेय कुमार को राजस्थान भेजे जाने से पार्टी को विवादों से छुटकारा मिल गया. कुमार की विदाई को कांग्रेस और उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) अपनी राजनीतिक कामयाबी बता रहे हैं. वहीं, भाजपा इसे संगठन के भीतर कुमार की बढ़ी हुई भूमिका और नेतृत्व के विश्वास का प्रतीक.
अब सुगबुगाहट यह है कि अगली विदाई क्या प्रदेश के केंद्रीय प्रभारी दुष्यंत गौतम की भी होगी? गौतम का भी नाम अंकिता केस में घसीटे जाने के बाद प्रदेश में एक बड़ा बवाल हो चुका है. इसी से निजात पाने के लिए सरकार ने केस की सीबीआइ से जांच कराने का ऐलान किया था. लेकिन राहुल गांधी ने अंकिता भंडारी के माता-पिता को दिल्ली आमंत्रित किया है जिससे यह दबाव और भी बढ़ता दिख रहा है. इस मुलाकात से इस केस के एक बार फिर जोर पकड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. बहरहाल, प्रमुख राजनीतिक पार्टियां मुद्दों के बहाने चुनावी माहौल बनाने में जुट गई हैं.

