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धोलेरा की जमेगी धाक

यह भारत की पहली सेमी हाइ-स्पीड रेल लाइन और गुजरात की दूसरी प्रमुख रेल परियोजना है जो एक नए औद्योगिक हब से जुड़ेगी

सरखेज-धोलेरा डबल लाइन पर सेमी-हाइस्पीड लोकोमोटिव
अपडेटेड 27 जून , 2026

दशक भर बाद भी मुंबई और अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन परियोजना स्लो मोशन में बढ़ती दिख रही है लेकिन गुजरात को एक और बड़ी रेल परियोजना मिल गई. उस पर केंद्रीय कैबिनेट की मुहर लग गई है. यह देश का पहला सेमी-हाइ-स्पीड कॉरिडोर होगा, जो अहमदाबाद के उपनगर सरखेज से खंबात की खाड़ी में दक्षिण-पश्चिम की ओर तटीय शहर धोलेरा तक 134 किलोमीटर लंबा होगा. इसकी अहमियत बढ़ती जा रही है. प्रस्तावित रेल पटरी ही इसका सबूत है. यह ट्रेन 200 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेगी. उसे 220 किमी प्रति घंटा की रफ्तार के हिसाब से डिजाइन किया गया है. ये दोनों ही देश में ट्रेन की अब तक की सबसे ज्यादा रफ्तार हैं.

स्वदेशी टेक्नोलॉजी से बनी और अहमदाबाद-धोलेरा एक्सप्रेसवे के समानांतर चलने वाली यह सेमी-हाइ-स्पीड ट्रेन पैसेंजर और माल दोनों ढोएगी. इसका एक सिरा अहमदाबाद में पश्चिमी रेलवे नेटवर्क से जुड़ेगा, तो दूसरे सिरे पर धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (डीएसआइआर) के रूप में विकसित होगा. यह देश में पहली सुनियोजित ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी होगी, जिसे कमर्शियल, सेमीकंडक्टर और मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर डिजाइन किया गया है. सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो यह लाइन 2030-31 तक चालू हो जाएगी. आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने 13 मई को 20,667 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना को मंजूरी दी. 134 किलोमीटर लंबी यह लाइन डबल-ट्रैक वाली है, जिसकी कुल ट्रैक लंबाई 293 किलोमीटर है और उसमें 13 स्टेशन होंगे. उसमें लोथल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स तक 8 किलोमीटर और धोलेरा इंटरनेशनल एअरपोर्ट तक 17 किलोमीटर की अतिरिक्त लाइनें भी शामिल हैं.

'सिंगापुर से बड़ा'
इस परियोजना का इंजीनियरिंग ढांचा बहुत विशाल है. 74 किलोमीटर वायाडक्ट, तीन बड़े पुल, 39 रोड-अंडर-ब्रिज और दो रेल-ओवर-रेल क्रॉसिंग बनने हैं. इस परियोजना का ज्यादातर हिस्सा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गांधीनगर निर्वाचन क्षेत्र में आता है. वे इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच का 'मजबूत सबूत' बताते हैं. इस परियोजना का दारोमदार डीएसआइआर प्रोजेक्ट के दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के मुख्य हिस्से की कामयाबी पर टिका है. डीएसआइआर विकास प्राधिकरण के सीईओ तथा प्रबंध निदेशक कुलदीप आर्य कहते हैं, ''इसका दायरा 920 वर्ग किलोमीटर में है, जो सिंगापुर के 736 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल से भी बड़ा है.''

इस विशेष निवेश क्षेत्र का मुख्य आधार टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का 91,000 करोड़ रुपए का सेमीकंडक्टर फैब (मैन्युफैक्चरिंग प्लांट) है, जिसके लिए दिसंबर 2026 तक पहली चिप्स बनाने का लक्ष्य रखा गया है. डच लिथोग्राफी कंपनी एएसएमएल ने मई में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ धोलेरा प्लांट के लिए उपकरण सप्लाइ करने का समझौता किया.

इस फैब के आसपास एक बड़ा इंडस्ट्रियल बेस तैयार हो रहा है. 4,400 मेगावॉट का धोलेरा सौर ऊर्जा पार्क कई बड़ी कंपनियों को आकर्षित करेगा. ईवी सेक्टर में सिंगशान होल्डिंग ग्रुप जैसी कंपनियां आ रही हैं. महिंद्रा एक 'वर्ल्ड सिटी' विकसित कर रहा है और जैबिल की सिलिकॉन फोटोनिक्स यूनिट अत्याधुनिक तकनीक ला रही है. आर्य का कहना है कि 40 और कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है, जिनके साथ एक साल के भीतर समझौता पक्का होने और 2028 के आखिर तक उनके काम शुरू करने की उम्मीद है. इसी के साथ, छह लेन वाला अहमदाबाद-धोलेरा एक्सप्रेसवे लगभग पूरा हो चुका है और 80 प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण हो गया है. धोलेरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का पहला चरण चल रहा है और इस साल के आखिर तक उड़ानें शुरू होने की उम्मीद है.

उड़ान भरेगा हवाई अड्डा
आर्य कहते हैं, ''कुछ साल में धोलेरा अहमदाबाद का मुख्य हवाई अड्डा बन जाएगा. मौजूदा हवाई अड्डा काफी नहीं होगा. जिस तरह से यह इलाका विकसित हो रहा है, यहां एक हाइ-स्पीड रेलवे लाइन की जरूरत है.'' अहमदाबाद में 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक की दावेदारी करने के कारण, धोलेरा बड़ी संख्या में इंटरनेशनल ट्रैफिक को संभालने की स्थिति में है. उसकी भौगोलिक स्थिति भी मददगार है, क्योंकि पाकिस्तान के ऊपर से गुजरे बिना पश्चिम एशिया के रास्ते आवाजाही संभव है.

उसकी राजनैतिक स्थिति भी खास है. उसका सबसे ज्यादा फायदा शाह के चुनाव क्षेत्र को मिल रहा है. गांधीनगर में पहले से ही आने वाली बुलेट ट्रेन का टर्मिनस, गिफ्ट सिटी और दुनिया का सबसे बड़ा नरेंद्र मोदी स्टेडियम मौजूद है. साथ ही, साबरमती नदी के किनारे सरदार पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव भी बन रहा है. अब यह देश की पहली सेमी हाइ-स्पीड रेल लाइन का शुरुआती पॉइंट भी बन जाएगा.

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