scorecardresearch

कैसे निबटेंगे भगवंत

मंत्री गिरफ्तार, पार्टी के राज्य प्रमुख के घर पर छापा, ज्यादातर राज्यसभा सदस्य टूटकर भाजपा में जा मिले. ऐसे हालात में मान आखिर करेंगे क्या?

पंजाब के सीएम भगवंत मान 5 मई को दिल्ली में आप विधायकों के साथ
अपडेटेड 25 मई , 2026

अगर वे हर तरफ से तलवारें लटकने के बावजूद जोशोखरोश से भरे हैं तो इसका श्रेय उनके राजनीति में आने से पहले के लंबे करियर को दीजिए. मंचीय कला में उनकी पुरानी महारत को देखते हुए माना जा सकता है कि भगवंत मान में खौफनाक हालात से घिरे होने पर भी मजाक करने की तगड़ी समझ है.

ताजा परिस्थितियों में इसकी जरूरत भी है. उनके लिए दो स्तरों पर अस्तित्व की चिंता है. राजनैतिक तौर पर आम आदमी पार्टी अपने सबसे सख्त इम्तहान से गुजर रही है. अगली फरवरी में उसे पंजाब में नया जनादेश हासिल करना है. इसी से जुड़ा दूसरा सवाल यह है कि ऊंच-नीच की स्थिति में उनका अपना भविष्य क्या होगा.

केंद्र ने आप सरकार से अदावत का नया दौर शुरू कर दिया है. ऐसे में पंजाब के आसमान पर संकट के बादल गहरा उठे हैं. 10 मई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा को गिरफ्तार कर लिया, आप के राज्य प्रमुख अमन अरोड़ा के ठिकानों पर ईडी-सीबीआइ के छापे पड़े और सतर्कता ब्यूरो ने शिकंजा कस दिया.

क्या मुख्यमंत्री आने वाली त्रासदी का मुकाबला कर सकते हैं? वे पहले ही पूरी तरह हरकत में आ चुके हैं. 5 मई को वे अपने विधायकों का पूरा लाव-लश्कर लेकर राष्ट्रपति भवन जा पहुंचे. उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू से विधिवत कहा कि राज्यसभा के उन 'पंजाब दे गद्दार' छह सांसदों की सदस्यता रद्द कर दी जाए जो पाला बदलकर भाजपा में चले गए. अब हालात ने दो ही रास्ते छोड़े हैं. या तो मुकाबला करो, या फिर मुकाबले से बाहर हो जाओ.

राघव चड्ढा की अगुआई में हुए दलबदल ने एक असहज स्थिति पैदा कर दी. भाजपा के विधानसभा में मात्र दो सदस्य हैं लेकिन राज्यसभा में अब पूरे छह. ये ऐसी सीटें थीं जिन्हें आप ने बहुत मेहनत-मशक्कत से हासिल किया था. फिर हैरानी क्या कि वे इसे 'ऑपरेशन लोटस' कह रहे हैं, यानी लालच और दबाव से साधा गया लक्ष्य.

सदन में 117 में से आप के 95 विधायक हैं. उसने पहली मई को ही विश्वास मत हासिल किया. फिर माहौल में सत्ता बदल की खुनक क्यों तारी है? भाजपा ने 4 मई को बंगाल जीत लिया. आप के मुताबिक, इसने भगवा पार्टी का हौसला बढ़ा दिया है, जिसने 'अगला लक्ष्य पंजाब' का ऐलान कर दिया था. छापों से लगता है कि यह खोखली धमकी भर नहीं थी.

सीधे टकराव का समय

मान ने इसका दो तरह से जवाब दिया. पहला टकराव. और इसके प्रदर्शन का मौका उस वक्त मिला जब 6 मई की रात पंजाब में कम तीव्रता के दो धमाके हुए: एक बीएसएफ के स्थानीय मुख्यालय के बाहर और दूसरा अमृतसर सैन्य छावनी के नजदीक. कोई हताहत नहीं हुआ. हां, एक तंज का मौका जरूर मिला. मान ने धमाकों के लिए तुरंत भाजपा को दोषी ठहराया. भाजपा ने भी पलटवार किया. राज्य प्रमुख सुनील जाखड़ ने कहा कि मान ने जो कहा, वह बताता है कि वे मुख्यमंत्री रहने के लायक नहीं हैं.

अमृतसर के मूलवासी और भाजपा के महामंत्री तरुण चुग ने उनसे कहा कि या तो सबूत दिखाएं या इस्तीफा दें. पंजाब के डीजीपी गौरव यादव दोनों जगह गए और कहा कि पाकिस्तान-समर्थित तत्वों का हाथ होने के संकेत हैं. इस पर भाजपा ने कहा कि जब उनके अपने पुलिस प्रमुख विदेशी हाथ की तरफ इशारा कर रहे हैं तो मुख्यमंत्री भाजपा को कैसे दोषी ठहरा सकते हैं?

उनके दूसरे जवाब ने पंथ का सहारा पकड़ा. 6 मई के उस वाद-विवाद के बीच मान ने शुकराना यात्रा भी शुरू कर दी. यह आनंदपुर साहिब से शुरू होकर चार दिन बाद फतेहगढ़ साहिब पर खत्म हुई. वे जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) कानून 2026 बना पाने के लिए 'कृतज्ञता' जाहिर कर रहे थे.

इस कानून में बेअदबी या गुरुग्रंथ साहिब को अपवित्र करने के लिए उम्र कैद और 50 लाख रुपए तक जुर्माने समेत ज्यादा कड़ी सजा तय की गई है. वे उस पंथिक स्पेस के लिए रणनीतिक कदम उठा रहे थे, जो पंजाब की राजनीति का मर्म है. लेकिन इसे विरोध का सामना करना पड़ा. अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने विधानसभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान को तलब कर लिया और कहा कि पंथिक व्यवस्था की अनदेखी की गई है.

सिख संस्थाओं और विद्वानों ने भी अमृतसर में बैठक की और इसे गुरु पंथ की मर्यादा का उल्लंघन माना और कहा कि इसे नामंजूर कर देना चाहिए. पूरी तरह खुलकर पंथ की राह पर जाना अब नई जरूरत है. 24 अप्रैल को जिन कारिंदों ने पार्टी बदली, वे कोई ऐसे-वैसे मुसाफिर न थे. टीवी पर सुदर्शन दिखने वाले चड्ढा और पार्टी के प्रमुख वास्तुशिल्पी संदीप पाठक के अलावा उनमें लवली यूनिवर्सिटी के संस्थापक अशोक मित्तल और ट्राइडेंट ग्रुप के सर्वेसर्वा राजिंदर गुप्ता सरीखे नामी-गिरामी थे.

वे शहरी कारोबारी वर्ग के साथ आप के गहरे जुड़ाव का प्रतीक थे. इस खालीपन को भरने में मान को बहुत समय लगेगा. कानून अब जब उन पर शिकंजा कस रहा हो, हर कदम पंथ की ओर बढ़ता लगता है. 

Advertisement
Advertisement