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चुनाव से पहले ही कांग्रेस में बमचक

प्रदेश कांग्रेस में नेताओं के बीच खींचतान और दलबदल से पार्टी की विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लग रहा पलीता

पुष्कर धामी सरकार पर हमला बोलते प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल
अपडेटेड 18 मई , 2026

उत्तराखंड में कांग्रेस अंदरूनी गुटबाजी और उससे उत्पन्न असंतोष के कारण नेताओं के पार्टी बदलने या चुनावी रण में निष्क्रिय होने के खतरे से जूझ रही है. 2027 के विधानसभा चुनाव में गुटबाजी का खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ सकता है.

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के 'अवकाश' पर जाने और उनके समर्थकों को कथित तौर पर साइडलाइन करने से गुटबाजी बढ़ी है. प्रदेश कांग्रेस की नई चुनाव प्रबंधन समिति और जिला अध्यक्षों की सूची में रावत के समर्थकों को कोई महत्वपूर्ण स्थान नहीं दिया गया है.

2016 में बगावत करने वाले हरक सिंह रावत तक को इसमें जगह मिली है लेकिन हरीश रावत की सिरे से अनदेखी कर दी गई. उनके करीबी संजय नेगी की पार्टी में एंट्री रोके जाने से रावत नाराज हैं. इसके लिए वे कांग्रेस प्रभारी से भी मुलाकात कर चुके हैं. पार्टी की हिचक का कारण हरीश के ही सहयोगी रहे पार्टी के नेता रणजीत रावत हैं जो किसी भी सूरत में नेगी की एंट्री के खिलाफ हैं.

जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के भीतर यह टकराव 2027 के चुनाव से पहले वर्चस्व की लड़ाई का भी संकेत है. अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में पार्टी आलाकमान हरीश रावत को कितनी अहमियत देता है. यही कारण है कि रामनगर जैसे क्षेत्रों में संजय नेगी जैसे नेताओं की जॉइनिंग को लेकर पार्टी के भीतर ही विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. गुटबाजी के चलते वरिष्ठ नेता परेशान हैं.

उत्तराखंड कांग्रेस इस समय गुटबाजी और दलबदल की दोहरी चुनौती का सामना कर रही है. कांग्रेस की अंतर्कलह का असर यह हुआ कि मई महीने की शुरुआत में कांग्रेस की कई महिला नेता और कार्यकर्ता देहरादून में धूम-धड़ाके से भाजपा में शामिल हो गए. कांग्रेस को इसकी भनक भी न लगने पाई. जॉइनिंग के बाद ही पार्टी को पता चला. भाजपा ने इसको महिलाओं के आरक्षण संबंधी विधेयक नारी शक्ति वंदन से जोड़ने की कोशिश कर डाली.

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट बोले, ''अब समय आ गया है, जब देश की आधी आबादी अपने अधिकारों का हनन करने वाले राजनैतिक दलों को सबक सिखाएगी.'' पार्टी में शामिल होने वाले प्रमुख नामों में रुद्रप्रयाग की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी राणा, महिला कांग्रेस की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और रुद्रपुर नगर पालिका की पूर्व चेयरपर्सन मीना शर्मा और पिछले विधानसभा चुनाव में घनसाली से प्रत्याशी दर्शन लाल आर्य रहे.

उत्तराखंड कांग्रेस में आंतरिक कलह और गुटबाजी आगामी चुनाव में जीत दिलाने के रास्ते में कितनी बड़ी बाधा बन सकती है, यह पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के 'अर्जित अवकाश' पर जाने और अब जगह-जगह नेताओं-कार्यकर्ताओं के साथ मुलाकात करने से भी जाहिर हो जाती है. विवाद थामने के लिए नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने हरीश रावत से उनके आवास पर भेंट की थी.

रावत ने भी कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह के यमुना कॉलोनी स्थित निवास पर जाकर उनसे बदली परिस्थितियों के मद्देनजर चर्चा की. रावत के मुताबिक, उन्होंने कांग्रेस नेताओं से बातचीत के दौरान यही बात रखी कि इस समय जो समस्याएं उठाई जा रही हैं, उसका समाधान निकाला जाए. फिर चाहे वह संजय नेगी का विषय हो अथवा अन्य कोई. रावत समर्थक अपने नेता को साइडलाइन किए जाने की बात कह रहे हैं.

गुटबाजी नेताओं को असंतुष्ट कर रही है, जबकि कांग्रेस के पास भाजपा की गुटबाजी का फायदा उठाकर उसके नाराज नेताओं को कांग्रेस में शामिल करने का विकल्प भी खुला है. खुद कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बयान दिया था कि भाजपा के लगभग डेढ़ दर्जन नेताओं ने कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा जाहिर की है और उन्हें हर महीने छह-छह की संख्या में कांग्रेस में शामिल करवाया जा सकता है. कांग्रेस अध्यक्ष जब यह बयान दे रहे थे, उसके कुछ ही समय बाद भाजपा ने कांग्रेस के नेताओं को पार्टी जॉइन कराकर उनको असहज कर डाला.

वैसे वर्चस्व की जंग तो पार्टी में गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह और यशपाल आर्य के बीच भी जारी है. ऐसी खींचतान के बीच केंद्रीय प्रभारी शैलजा का प्रदेश दौरा हो रहा है. गोदियाल के अनुसार, शैलजा ऋषिकेश से लेकर बद्रीनाथ, केदारनाथ और टिहरी के दौरे पर आ रही हैं. इसके बाद उनका एक और दौरा टिहरी, उत्तरकाशी और देहरादून जिले के चकराता और विकास नगर में प्रस्तावित है.

गढ़वाल भ्रमण के बाद एक और दौरा कुमाऊं मंडल में होगा. प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन से कांग्रेस की यह संकेत देने की कोशिश है कि पार्टी अब आस्था के जरिए जनता से जुड़ रही है. देखना है कि पार्टी जनता से कितना जुड़ पाती है और कितना अपने नेताओं को जोड़े रखती है

कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से बातचीत- 

'पार्टी में नौजवान लाए जाएं'

 ठीक चुनावी साल में आपका अवकाश का पैंतरा क्या पार्टी के लिए घातक नहीं?
अर्जित अवकाश के मायने कोई कुछ भी लगाए, मैं दिल से चाहता हूं कि रामनगर के संजय नेगी जैसे नौजवान पार्टी में शामिल किए जाने चाहिए. बीते दिनों नेगी को छोड़ छह लोगों को शामिल कराया गया, इसका अच्छा संकेत नहीं गया. ऐसे नौजवान पार्टी के लिए भविष्य के नेता बन सकते हैं.

• छह नेताओं को पार्टी में शामिल करते वक्त क्या आपको नहीं बुलाया गया था?
बुलाया गया था. बल्कि इन नेताओं में से कुछ को शामिल होने के लिए प्रेरित करने में भी मेरा हाथ था. शामिल होने के बाद वे मुझसे मिलने भी आए.

• आपके कुछ समर्थक यह अपील करते दिखे कि हरीश रावत की उपेक्षा के खिलाफ उनके समर्थक पार्टी छोड़ें. क्या यह बगावत नहीं थी?
डॉ. हरक सिंह रावत का बयान था: किसी को यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि पार्टी उनके बिना चुनाव नहीं जीत सकती. इसको मुझसे जुड़े विधायकों ने मेरी ओर इंगित किए जाने के रूप में लेते हुए भावना में आकर ऐसा कह डाला. धारचूला के विधायक हरीश धामी भी इसमें शामिल थे. यह एक बयान पर प्रतिक्रिया थी. इसलिए इसे बगावत की कोशिश कहना गलत है.

• प्रदेश कांग्रेस में चुनाव के लिए बनी समितियों में आपका नाम न होने से क्या आप नाराज हैं?
मैं तो किसी कमेटी में नॉमिनेट होने का इच्छुक नहीं था लेकिन हां, मुझसे जुड़े लोग इसमें शामिल किए जाते तो उसका एक अच्छा संकेत जाता. मैंने तमाम प्रतिकूल स्थितियों में भी कांग्रेस का झंडा उठाए रखा. मेरी भूमिका के कारण उत्तराखंड बनते वक्त पार्टी को असहज होने से बचने का रास्ता मिला.

• भाजपा में विवाद पार्टी के भीतर ही निबट जाते हैं. लेकिन कांग्रेस में वह बड़ा मुद्दा बन जाता है, ऐसा क्यों?
कांग्रेस लोकतांत्रिक पार्टी है. यहां शामिल होने की प्रक्रिया है तो निकालने का भी तरीका है. उसकी तुलना किसी पार्टी से करना गलत है. पर आज सोशल मीडिया के जमाने में इतना जरूर कहूंगा कि अपनी बात कहने के लिए उचित शब्दों का चयन करना चाहिए.

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