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एक संत पर सियासी घमासान

एक अतिवादी यूट्यूबर को भाजपा ने गोवा में दिया मंच, मगर कैथोलिक समुदाय की नाराजगी के बाद वह बचाव में उतरी

गौतम खट्टर को गोवा में 26 अप्रैल को क्राइम ब्रांच लाया गया
अपडेटेड 12 मई , 2026

अभी तक साफ नहीं कि यह कोई सोची-समझी रणनीति थी या फिर हद से ज्यादा उत्साह का नतीजा. मगर 2027 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ऐसे विवाद से बच सकती थी.

गोवा के संरक्षक माने जाने वाले संत पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए एक स्वयंभू 'सैफ्रोनिस्टा' यूट्यूबर को आगे करना सियासी समझदारी नहीं कही जा सकती. इससे राज्य के कैथोलिक समुदाय में नाराजगी है.

यह समुदाय राज्य की 25 फीसद ईसाई आबादी का बड़ा हिस्सा है और बीते कई साल से भाजपा इसका समर्थन हासिल करने की कोशिश करती रही है. 

यह पूरा समीकरण बिगड़ने की कगार पर पहुंच गया जब खुद को 'आध्यात्मिक विषयों को कवर करने वाला पत्रकार' बताने वाले गौतम खट्टर ने इसी महीने वास्को में आयोजित एक कार्यक्रम में संत फ्रांसिस जेवियर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं. गौतम सनातन महासंघ नाम का संगठन भी चलाते हैं. उसका भारी विरोध हुआ और भाजपा ज्यादा मुश्किल में पड़ गई क्योंकि उन टिप्पणियों के दौरान मंच पर पार्टी के परिवहन मंत्री मौविन गोडिन्हो और दो विधायक संकल्प अमोणकर और कृष्णा सालकर मौजूद थे.

बचाव की कोशिश
कैथोलिक चर्च ने उन टिप्पणियों को 'अपमानजनक और अवमाननापूर्ण' बताया, तो सरकार बचाव की मुद्रा में आ गई. पुलिस ने खट्टर को 24 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू से गिरफ्तार किया. उस कार्यक्रम के संयोजक और भाषण को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वाले उनके भाई माधव खट्टर को सह-आरोपी बनाया गया और उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया. 28 अप्रैल को यूट्यूबर ने 'सीने में दर्द' की शिकायत की और उसे मापुसा के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया.

इस बीच मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने स्थिति को संभालने की कोशिश की. इस तथ्य का सहारा लेते हुए कि खट्टर स्थानीय नहीं हैं, वे दिल्ली में जन्मे और उत्तराखंड में पले-बढ़े हैं, सावंत ने कहा कि अन्य राज्यों से आने वाले वक्ताओं को गोवा की सांप्रदायिक सद्भावना नहीं बिगाड़नी चाहिए.

आसान नहीं डगर
स्पेन में जन्मे जेवियर कोई सामान्य शख्सियत नहीं, बल्कि उन्हें श्रद्धापूर्वक यहां 'गोएनचो सैब' यानी गोवा का संरक्षक माना जाता है. वे 1540 में जेसुइट संघ की सह-स्थापना करने के दो साल बाद यहां आए थे. पूर्वी एशिया में उनके निधन के बाद, उनके पार्थिव अवशेषों के कुछ हिस्से ईसाई जगत के विभिन्न भागों में भेजे गए, जबकि उनके मुख्य शरीर को ओल्ड गोवा में बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस में संरक्षित रखा गया है. उनके अवशेषों के दशक में एक बार होने वाले सार्वजनिक दर्शन के लिए दुनियाभर से श्रद्धालु आते हैं और उनमें गैर-ईसाई भी शामिल होते हैं.

भाजपा ने यहां ईसाई समुदाय का समर्थन जुटाया है. 2012 में मनोहर पर्रीकर के नेतृत्व में पार्टी ने राज्य की 40 में से 21 सीटें जीती थीं और उसे ईसाइयों तथा चर्च नेतृत्व का समर्थन मिला था. पार्टी ने 10 कैथोलिक उम्मीदवारों को टिकट दिया, जिनमें 6 को जीत मिली थी. पर्रीकर के बाद यह समर्थन ज्यादा प्रतिस्पर्धी होता गया. पश्चिमी और मध्य गोवा के 'ओल्ड कन्क्वेस्ट्स' इलाके—मसलन, तिसवाड़ी, बार्देज और सियासी रूप से अहम साल्सेट—में कैथोलिक आबादी बड़ी संख्या में है. 2024 में कांग्रेस मुख्य रूप से इन्हीं कैथोलिक मतदाताओं के साथ-साथ लगभग 10 फीसद मुसलमान मतदाताओं के समर्थन के कारण दक्षिण गोवा लोकसभा सीट को बरकरार रखने में कामयाब रही.

विश्लेषक और संपादक राजू नायक का कहना है कि दक्षिणपंथी नेता संत जेवियर के खिलाफ जिस इन्क्विजिशन का हवाला देते हैं, वह असल में उन ईसाइयों और धर्म-परिवर्तित करने वाले लोगों के खिलाफ था जो कैथोलिक सिद्धांतों का पालन नहीं कर रहे थे. भाजपा के नेता निजी तौर पर मानते हैं कि यह विवाद पार्टी को नुक्सान पहुंचा सकता है. एक कैथोलिक विधायक कहते हैं, ''भाजपा राज्य की सियासत का ध्रुवीकरण करना चाहती है मगर भारी विरोध की वजह से वह बचाव की मुद्रा में आ गई है. इससे कैथोलिक समुदाय उससे दूर हो सकता है.''

शिक्षाविद् युगांक नाइक का मानना है कि भाजपा राज्य में प्रवासी समुदायों को हिंदुत्व के इर्द-गिर्द संगठित करने की कोशिश कर रही है. वे कहते हैं कि गौतम ने परशुराम जयंती के मौके पर भाषण दिया, जबकि इसका गोवा की संस्कृति से कोई संबंध नहीं. गैर-गोवावासी कारोबारी समूह ऐसे आयोजन और उनकी फंडिंग कर रहे हैं. कांग्रेस भी यही आरोप लगा रही है. कांग्रेस नेता यूरी अलेमाओ आरोप लगाते हैं कि गौतम जैसे 'बाहरी तत्वों' को गोवा लाकर लोगों को सांप्रदायिक आधार पर बांटने की कोशिश की जा रही है. 

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