- एम.सी. पांडेय
उत्तराखंड में चुनाव को सालभर भी नहीं बचे हैं और भाजपा नेताओं की आपसी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है. पार्टी आलाकमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को चुनावी बैतरणी का खेवनहार घोषित कर चुका है. लेकिन मुख्यमंत्री का विरोधी गुट हथियार डालने को तैयार नहीं दिखता.
अब राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी उत्तराखंड का दौरा करने वाले हैं. संगठन चुनावी तैयारियों में जुटा है और गुटों में आपसी बयानबाजी से विपक्ष भी सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा है. इससे निष्ठावान नेताओं में भी हलचल है.
लगता है खींचतान के संकेत आलाकमान तक पहुंच गए हैं. 14 अप्रैल को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन समारोह खत्म होने के बाद मंच से लौटते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताओं से जिस तरह बात की उसका यही अर्थ निकाला जा रहा है. मोदी ने पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के साथ गर्मजोशी से संवाद किया. वहां खड़े त्रिवेंद्र सिंह रावत का अभिवादन स्वीकारने के बाद उन्होंने उत्तराखंड विधानसभा की स्पीकर ऋतु खंडूड़ी के साथ लंबे समय तक बात की.
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश में अवैध खनन को लेकर धामी सरकार की कार्यप्रणाली पर हाल ही सवाल उठाए थे. इसको लेकर विपक्षी नेताओं ने कहा कि त्रिवेंद्र ने उनके आरोपों पर ही मुहर लगाई. उन्होंने अवैध खनन से पर्यावरण को नुकसान और इसे रोकने में अफसरों की विफलता को लेकर चिंता जताई थी. विपक्ष के हमलों के बाद त्रिवेंद्र ने स्पष्ट किया कि वे सरकार के नहीं, बल्कि कुप्रबंधन के खिलाफ हैं. उनके बयानों के बाद आइएएस एसोसिएशन ने इस पर नाराजगी जताई और इसे नौकरशाही की गरिमा के खिलाफ बताया.
भाजपा में अंदरूनी असंतोष की झलक सोशल मीडिया के जरिए भी जाहिर हो जाती है. पीएम मोदी के बयान का उल्लेख करके बद्रीनाथ केदारनाथ टेंपल कमेटी (बीकेटीसी) के पूर्व अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने संन्यास लेने की धमकी दे डाली. उन्होंने अपनी नाराजगी को मोदी के उस बयान से जोड़ा, जिसमें उन्होंने कहा था कि आने वाला दशक उत्तराखंड का दशक होगा. अजेंद्र का कहना था कि यदि सच में राज्य के लिए यह दशक महत्वपूर्ण बनने वाला है, तो राज्य में व्यवस्थाओं और कामकाज में भी उसी स्तर की गंभीरता दिखाई देनी चाहिए. इससे पहले भी कई नेता सरकार और पार्टी को असहज कर चुके हैं. भाजपा के वरिष्ठ नेता अरविंद पांडे, बिशन सिंह चुफाल, कुंवर प्रणव चैंपियन समेत कई ऐसा नेता हैं जो समय-समय पर अपनी ही पार्टी और सरकार को कठघरे में खड़ा करते रहे हैं.
हाल ही बंशीधर भगत ने नैनीताल जिला योजना की बैठक में जल जीवन मिशन के तहत कार्यों में अत्यधिक लापरवाही और धीमी गति को लेकर अपनी ही सरकार पर नाराजगी जताई है. उन्होंने चेताया कि काम नहीं सुधरा तो 2027 का चुनाव मुश्किल होगा. यही नहीं, उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि मोदी-मोदी चिल्लाने से अब काम नहीं चलेगा, जनता के काम भी करने होंगे, तभी चुनाव जीता जा सकता है. उनका मानना है कि विकास कार्यों की अगर यही गति रही तो सरकार को आगामी चुनावों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. मामले ने तूल पकड़ना शुरू किया तो बाद में उन्होंने सफाई दी कि उनकी बातों को गलत तरीके से पेश किया गया और वे तो प्रधानमंत्री मोदी के कार्यों के प्रशंसक हैं.
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने बंशीधर भगत के इस बयान को लपकते हुए कहा कि भगत का बयान भाजपा सरकार की वास्तविकता को उजागर करने वाला है. जब भाजपा के ही वरिष्ठ नेता यह कह रहे हैं कि अब सिर्फ 'मोदी-मोदी' कहने से काम नहीं चलेगा, तो यह साफ हो जाता है कि प्रदेश में कोई ठोस काम हुआ ही नहीं.
पांच बार के विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता मुन्ना सिंह चौहान ने विकासनगर क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन के खिलाफ पुलिस और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए. डीडीहाट के भाजपा विधायक और पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल ने तो सरकार के बनाए गए दायित्वधारियों पर सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने साफ कहा कि पिथौरागढ़ जिले में अयोग्य लोगों को दायित्व सौंपे गए हैं. पिछले दिनों हुए कैबिनेट विस्तार के बाद भी लैंसडाउन से भाजपा विधायक दिलीप रावत ने कह दिया कि वे कुछ महीनों के लिए मंत्री नहीं बनना चाहते. अंतर्कलह के कारण पार्टी नेता कांग्रेस का रुख कर रहे हैं. अभी मार्च के ही अंत में राजकुमार ठुकराल, भीमलाल आर्य, नारायण पाल, गौरव गोयल, अनुज गुप्त और लाख नेगी जैसे नेता कांग्रेस में चले गए.
गदरपुर से भाजपा विधायक अरविंद पांडे तो लगातार सरकार के लिए किरकिरी बने हुए हैं. उनके कई मामलों में खुलकर बोलने से सरकार असहज महसूस करती रही है. लेकिन बीच में स्थानीय प्रशासन ने उन्हें नोटिस दिया था, जिसमें उन पर कार्यालय की जगह को अतिक्रमण बताकर तोड़ने की बात कही थी. प्रशासन की इस कार्रवाई से भाजपा की अंदरूनी लड़ाई काफी तेज हो गई.
पांडे समर्थक माने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख और सांसद अनिल बलूनी, हरिद्वार के विधायक मदन कौशिक समेत कई दिग्गजों ने हरिद्वार में अमित शाह के दौरे के बीच गदरपुर पहुंचने की घोषणा कर दी थी. इससे सियासी तापमान बढ़ गया. हालांकि नेताओं को हरिद्वार में ही रोक लिया ताकि कोई गलत संदेश न जाए. दूसरी ओर, अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता सुखदेव सिंह नामधारी और गदरपुर के पूर्व पालिकाध्यक्ष सुरेश कांबोज ने काशीपुर में पत्रकार वार्ता कर स्पष्ट कह दिया कि अरविंद पांडे यूज एंड थ्रो की राजनीति करते हैं. वे धामी सरकार के समानांतर सरकार चला रहे हैं. उनका बहुत जल्द भाजपा से निष्कासन होगा.
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इस पर इतना ही कहा, ''बयान की जानकारी उन्हें भी मिली है. हम जांच करा रहे हैं कि इस तरह का बयान किस हैसियत से दिया गया है. इन दोनों के स्तर से इस तरह बोलना पूरी तरह गलत है. इसमें सख्त कार्रवाई की जाएगी.'' इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप और बयान बता रहे हैं कि पार्टी में अंतर्कलह बढ़ रही है. अगर इसे समय पर काबू न किया गया तो इसके परिणाम सुखद नहीं होंगे.
''कांग्रेस से कोई दुश्मनी थोड़े ही है!''
• क्या आप धामी सरकार से नाराज हैं?
मेरी क्या नाराजगी होगी? धामी मेरे छोटे भाई हैं. परिवार में बड़ा होने के हक से जो बात मुझे नहीं जमेगी तो मैं उनसे उसमें सुधार की अपेक्षा रखूंगा. जब हम सत्ता में होते हैं तो हमारी जिम्मेदारियां बढ़ जाती है. जब भी कोई ऐसी बात आई तो मैंने खुद मुख्यमंत्री जी से बात की और अधिकारियों को भी उनकी लापरवाही से अवगत कराया. खनन कार्य में मशीनों के प्रतिबंधित इस्तेमाल के बावजूद इस काम में घुस आए माफियाओं ने नियमों को ताक पर रखकर ऐसे करना शुरू किया तो मैंने कहा कि पर्यावरण को लेकर इसके परिणाम घातक हो सकते है.
• कई मामलों में आप सरकार से मुचैटा लेते दिखते हैं.
सवाल मुचैटा लेने का नहीं बल्कि जिम्मेदारी समझने का है. कोई भी मंत्री या मुख्यमंत्री सभी मामलों की पूरी जानकारी रखता हो, ऐसा संभव नहीं. कहीं कुछ गलत होते दिखेगा तो उसके लिए सजग करना मेरा भी फर्ज है. इसे मुचैटा लेना नहीं कहना चाहिए.
• गृह मंत्री के हरिद्वार दौरे के समय दूसरे नेताओं सहित आपको जाने से क्यों रोक दिया गया?
हमें किसी ने नहीं रोका, खुद अरविंद पांडे ने कहा कि मामला गरम है, आप लोग मत आइए. पांडेय सीनियर नेता हैं. उनसे संवाद करके उनके मसले का समाधान निकलना चाहिए. चाहे वे गलत हों तो भी उनको समझाना नैतिक जिम्मेदारी बनती ही है.
• प्रदेश भाजपा में अंतर्कलह है या नहीं?
इसे अंतर्कलह नहीं कहते. कुछ छुटपुट मतभेद हो सकते हैं. आज पार्टी में भारी मात्रा में लीडर हैं. सबकी कुछ न कुछ अपेक्षाएं हैं. सब कोशिश करते हैं तो इसको अंतर्कलह नहीं कहा जा सकता.
• पार्टी में गुटबाजी रोकने के लिए आप क्या सुझाव देते हैं?
कोई गुटबाजी नहीं है. सब अपने को दिए काम पर ध्यान दें. लोगों की भलाई किसमें हो सकती है इसका विशेष ध्यान रखें.
• कांग्रेस दावा कर रही है कि भाजपा के दर्जनों नेता पार्टी ज्वाइन करना चाहते हैं.
भाजपा के नेता तो हमेशा ही सबके संपर्क में रहते हैं. कांग्रेस से उनकी कोई दुश्मनी थोड़े है. वे ठीक ही कह रहे हैं. इसमें क्या दो राय हो सकती है. एक दूसरे के संपर्क में रहना अपराध थोड़े ही है.

