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रेवंत की दौड़ मंदिर तक

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत विशालकाय परियोजनाओं के साथ तेलंगाना के मंदिरों में नया रंग-रोगन करा रहे हैं. परिसरों के अलावा जिसे चमकाया जा रहा है वह है उनकी अपनी राजनैतिक छवि

तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने 6 अप्रैल को ज्ञान सरस्वती मंदिर में अपने पोते के अक्षराभ्यास संस्कार में भाग लिया
अपडेटेड 5 मई , 2026

प्रसाद - निचेनमेटला

भगवा बड़बोलों की गाली-गलौज में उन्हें 'रेवंतुद्दीन' और 'हजरत रेड्डी' कहा जाता है, लेकिन इसमें तेलंगाना के मुख्यमंत्री का एक और पहलू जरा नहीं अटता. वह यह है कि उन्होंने हिंदू भक्ति की नीति का एक किस्म का रथ खुला छोड़ दिया है जो पूरे राज्य में कुलांचे भरता दौड़ रहा है.

समूचे तेलंगाना में फैले कई विशाल मंदिरों की जबरदस्त नई साज-सज्जा की जा रही है जिसके लिए कम से कम 1,610 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं. भूपल्लापल्ली, वायरा, कामारेड्डी और महबूबाबाद सरीखी जगहों के कई छोटे मंदिरों के लिए भी दोनों हाथों से उदार सहायता दी जा रही है.

अपने छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के रंग-ढंग में ढले रेवंत रेड्डी इस पाठ्यक्रम से बखूबी वाकिफ हैं. वेमुलावाड़ा, यादगिरीगुट्टा और मोइनाबाद में तीन आधुनिक गौशालाएं बन रही हैं. ये 50 से 100 एकड़ में फैली हैं और उन्नत पशुचिकित्सा सुविधाओं से लैस होंगी. गोरक्षा नीति भी आने वाली है. उधर, राज्य की पुलिस गायों की अवैध तस्करी पर अक्सर धावा बोलती रही है.

रेवंत की हिंदू समर्थक नीतियों में उनका निजी पुट है. इस पर कांग्रेस के बजाए उनकी अपनी छाप है. रेवंत 6 अप्रैल को अपने पोते के पारंपरिक दीक्षा समारोह के लिए पूरे परिवार सहित बसारा के ज्ञान सरस्वती मंदिर पहुंचे. रोज हजारों जोड़े स्कूल से पहले की पढ़ाई के लिए तैयार बच्चों को साथ लिए उत्तर तेलंगाना में गोदावरी नदी के तट पर बने इस मंदिर में अक्षराभ्यासम अनुष्ठान करने आते हैं.

उन्होंने 225 करोड़ रुपए की लागत से मंदिर के विस्तार और विकास कार्यों की आधारशिला रखी. इससे मंदिर परिसर का निर्मित क्षेत्र तिगुना बढ़कर 62,000 वर्ग फुट हो जाएगा, जिसमें श्रद्धालुओं की कतारों के लिए विशाल जगह शामिल है.

शुरुआत उन्होंने मार्च में आंध्र की सीमा पर स्थित भद्राचलम के सदियों पुराने श्री सीता रामचंद्रास्वामी मंदिर से की, जहां वे वार्षिक कल्याणम (विवाह) समारोह में भी शामिल हुए. इसमें हर साल दोनों तेलुगू राज्यों के बहुत सारे लोग आते हैं. चरण 1 में 12 साल में एक बार लगने वाले गोदावरी पुष्करम से पहले जून 2027 तक घाटों का विस्तार किया जाएगा.

मार्च में ही मुख्यमंत्री ने हैदराबाद के बाहर मंचीरेवुला में 700 करोड़ रुपए की लागत से होने वाले ओंकारेश्वर और वीरभद्र स्वामी मंदिरों के जीर्णोद्धार की आधारशिला रखी. यह उनकी मुंचीरेवुला रिवरफ्रंट परियोजना का हिस्सा है, जिसमें मंदिर परिसर को 'दक्षिण की काशी' के रूप में विकसित किया जाएगा. मध्य तेलंगाना का वेमुलावाड़ा भी आकर्षक तीर्थ बनने की राह पर है.

कर्म की शुरुआत घर से
रेवंत जिन तीर्थस्थलों पर जोर दे रहे हैं, उसमें प्रमुख स्थलों को जोड़ने वाले चार बड़े धार्मिक परिपथ शामिल हैं. उनकी धर्मार्थ कोशिशों ने उनके गृहक्षेत्र की अनदेखी नहीं की. मुख्यमंत्री ने 2025 में श्री महालक्ष्मी वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, जिसे स्थानीय स्तर पर 'चिन्ना (छोटे) तिरुपति' के नाम से भी जाना जाता है, और उसके साथ दौलताबाद और कोसगी के मंदिरों के जीर्णोद्धार का ब्लूप्रिंट तैयार किया, जो सभी दक्षिण तेलंगाना के उनके निर्वाचन क्षेत्र कोडंगल में आते हैं.

मगर उनकी तैयारियां ज्यादा चौड़े परिसर उकेर रही हैं. वारंगल के भद्रकाली मंदिर में नियोजित मडावीधियों (कार स्ट्रीट) या पहाड़ी की चोटी पर स्थित कोंडागट्टू श्री अंजनेय स्वामी मंदिर की सुविधाओं को ही लीजिए. दोनों को मिलाकर रेवंत का मंदिर अभियान आसानी से उनके पूर्ववर्ती के. चंद्रशेखर राव की 1,500 करोड़ रुपए से यादगिरीगुट्टा योजना से आगे निकल गया है.

2025 में जुबिली हिल्स के उपचुनाव के दौरान प्रचार अभियान की गरमागरमी में रेवंत ने अपनी पार्टी को यह कहकर सांसत में डाल दिया था कि 'कांग्रेस का मतलब है मुसलमान और मुसलमान का मतलब है कांग्रेस'. मार्च में उन्होंने इन शब्दों के साथ प्रायश्चित किया, ''मैं कट्टर धर्मपरायण हिंदू हूं, जो कर्म में विश्वास करता है.''

उनके विश्वासपात्रों की बातों में भी यही सुनाई देता है. वेमुलावाड़ा के विधायक और कांग्रेस के सचेतक आदि श्रीनिवास का कहना है कि यादगिरी के प्रति केसीआर के लगाव के विपरीत रेवंत महाराष्ट्र से सटे बसारा के मंदिरों से लेकर ठेठ आंध्र तक से सटे मंदिरों को विकसित कर रहे हैं. उन्होंने इंडिया टुडे से कहा, ''भाजपा का नजरिया चुनावी है. हमारे मुख्यमंत्री पंथनिरपेक्षता पर अडिग रहते हुए उस धर्म की कहीं ज्यादा सेवा कर रहे हैं जिसे वे मानते हैं.''

मगर, भाजपा पीछे हटने को तैयार नहीं और उन्हें घेरने का कोई कसर नहीं छोड़ रही है. दिसंबर में मुख्यमंत्री ने कहा था, ''हिंदुओं के तीन करोड़ देवी-देवता हैं. ब्रह्मचारियों के लिए हनुमान हैं, दो शादियां करने वालों के लिए दूसरे भगवान हैं और शराब प्रेमियों के लिए तीसरे हैं...'' भाजपा कह रही कि ओछेपन से धर्मपरायणता बेकार हो जाती है. नेता अल्लेटी महेश्वर रेड्डी भी अल्पसंख्यक कल्याण निधि में 72 फीसद बढ़ोतरी होने और रेवंत के '100 राम मंदिरों' के अपूर्ण चुनावी वादे का हवाला देते हैं.

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