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अंधविश्वास का भूत मेला

झारखंड में बीते दस साल में 263 हत्याएं, फिर भी नर बलि और भूतों का मेला बेखौफ चल रहा है

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पलामू के हैदरनगर में बीते दिनों चैत्र नवरात्र पर लगे भूत मेले का दृश्य
अपडेटेड 25 अप्रैल , 2026

बीती रामनवमी को हजारीबाग का माहौल सांप्रदायिक होते-होते बचा. 25 मार्च को हजारीबाग जिले में एक नाबालिग बच्ची का शव वीभत्स हालत में क्षत-विक्षत मिला. परिजनों ने बलात्कार के बाद हत्या का मामला दर्ज कराया. जनता सड़क पर उतरी, इसे दिल्ली में हुए निर्भया कांड जैसा लोमहर्षक माना गया लेकिन पुलिस जांच में जो खुलासा हुआ, वह बेहद चौंकाने वाला था.

पुलिस के मुताबिक, उस बच्ची की मां ने अपने 13 साल के बेटे के मानसिक और शारीरिक इलाज के लिए एक तथाकथित महिला ओझा के कहने पर अपनी बेटी की बलि दे दी. बच्ची की गला दबाकर हत्या करने के बाद उसके सर को पत्थर से कुचला गया, फिर बच्ची के खून से तांत्रिक क्रिया की गई. फिलहाल इस मामले में तीन लोग सलाखों के पीछे हैं.

घटना से ठीक दस दिन पहले 16 मार्च को गोड्डा जिले के देवडाड़ डांगा गांव में 13 वर्षीय बेटे समेत एक आदिवासी दंपती की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी गई. दंपती को गांव के कुछ लोगों ने डायन घोषित कर दिया था. राज्य पुलिस के मुताबिक, बीते दस साल में डायन-बिसाही के आरोप में 263 लोगों की हत्या की जा चुकी है, इनमें 70 फीसद से ज्यादा महिलाएं हैं.

इन्हीं दस सालों में डायन-बिसाही से संबंधित 6,000 से ज्यादा घटनाएं (सामाजिक और कानूनी तौर पर) दर्ज की गईं. अक्तूबर 2025 में एनसीआरबी की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2023 में डायन हत्या के 22 मामलों के साथ झारखंड देश में पहले स्थान पर था. दूसरे नंबर पर 19 मामलों के साथ छत्तीसगढ़ और तीसरे नंबर पर मध्य प्रदेश रहा जहां 14 लोगों की हत्या हुई.

ऐसी घटनाओं को रोकने के तथाकथित सरकारी प्रयासों के बीच पलामू जिले में हर साल चैत नवरात्र के दौरान भूत मेला आयोजित होता है. दस दिनों के इस मेले में झारखंड के अलावा ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और असम के तथाकथित ओझा पहुंचते हैं. इन्हीं राज्यों से 10,000 से ज्यादा लोग अंधविश्वास का इलाज कराने भी आते हैं.

वहां तंत्र-मंत्र का आयोजन 24 घंटे जारी रहता है. यह मेला भी जिला प्रशासन की निगरानी और स्थानीय मंदिर कमेटी के लोगों की देखरेख में आयोजित होता है. मंदिर परिसर में मजार भी है. जहां हिन्दू और मुसलमान, दोनों धर्मों के लोग अपने भूत भगाने आते हैं. यह सब उस राज्य में हो रहा है, जहां डायन कुप्रथा के खिलाफ लड़ने के लिए छुटनी देवी को पद्मश्री से नवाजा गया.

क्या होती है प्रक्रिया
ग्रामीण इलाकों में भगत और भगतिन का प्रभाव इतना गहरा है कि लोग अपनी बीमारी, पारिवारिक विवाद या आर्थिक संकट लेकर थाना, अस्पताल या अदालत की बजाए उनके पास पहुंचते हैं. महज 100 रुपए के डलिए (चावल-पूजा सामग्री) के चढ़ावे पर ये तथाकथित ओझा परेशान लोगों की किस्मत, बीमारी और समस्याओं का तत्काल समाधान करने का दावा करते हैं. साथ ही डर भी दिखाया जाता है कि इच्छा पूरी होने पर देवी को बड़ी रकम चढ़ानी होगी वरना समस्या दोबारा आ सकती है.

कई बार पूर्वजों की गलती का हवाला देकर 25,000 रुपए तक की पूजा, बलि और तंत्र-मंत्र कराने का दबाव बनाया जाता है.
तीन सालों से डायन प्रथा पर रिसर्च और इसी विषय पर फिल्म का निर्देशन करने वाली नंदिता गुप्ता कहती हैं, ''बीमारी, आर्थिक संकट या पारिवारिक विवाद एक कारण हो सकता है, लेकिन सबसे प्रमुख है पित्तृसत्ता. जो महिलाएं छोटे स्तर पर ही सही, नेतृत्व करती दिखती हैं, या किसी की मदद करती दिखती हैं, वे पुरुषों के अहंकार के निशाने पर आ जाती हैं.’’

क्यों नहीं हो पा रहा काबू
पद्मश्री छुटनी को भी कभी डायन करार दिया गया था. वे बताती हैं, ''बीस साल से मैं इसके खिलाफ लड़ रही हूं. 80 फीसदी मामलों में जमीन मुख्य मुद्दा मिला. अगर किसी कमजोर के पास जमीन है, तो दबंग आदमी उसे किसी ओझा से डायन घोषित करवा देता है और फिर कई बार मामला हत्या तक पहुंच जाता है.’’ आशा के संचालक अजय जायसवाल 2023 में राज्यभर की ऐसी 1,500 महिलाओं का सर्वे किया, जिन्हें समाज ने डायन घोषित किया था, जिनमें 15 से 80 साल तक की महिलाएं थीं.

इनमें से 70 फीसदी के पास किसी तरह की संपत्ति नहीं थी. हां, इनमें ज्यादातर महिलाएं विधवा या अकेली जरूर थीं.’’
डायन की पहचान, प्रचारित या षड‍्यंत्र करने पर झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार जैसे राज्यों में 3 महीने से लेकर अधिकतम 3 साल की सजा है. जबकि असम में सीधे आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है. लेकिन मुख्य अभियुक्त यानी ओझाओं पर कार्रवाई न के बराबर होती है.

छुटनी देवी कहती हैं, ''पुलिस कई बार पहल करती है लेकिन सजा नहीं दिलवा पाती क्योंकि कोई उस ओझा के खिलाफ गवाही देने के लिए तैयार नहीं होता.’’ अंधविश्वास के विश्वास में आदिवासी, गैर-आदिवासी, हिंदू-मुस्लिम सब शामिल हैं. हजारीबाग के डीआइजी अंजनी कुमार झा कहते हैं, ''ये घटनाएं उन इलाकों में होती हैं जहां विकास नहीं हुआ है. लोग इलाज भी कथित ओझा से कराते हैं जो पीढ़ियों से यही काम कर रहा है. इसके अलावा जमीन हड़पने का पैटर्न तो है ही.’’

बहरहाल, अजय जायसवाल के दावों के मुताबिक राज्य में 64,000 से ज्यादा महिलाएं जो डायन घोषित किए जाने के बाद रोज प्रताडि़त हो रही हैं, उन्हें बचाने के लिए तत्काल स्पेशल कोर्ट के गठन की जरूरत है.

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