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आलीशान गुजराती  शादियों का नया धाम

'डेस्टिनेशन वेडिंग’ के बड़े बाजार में गुजरात भी सेहरा बांधना चाहता है. लेकिन शराब पर रोक इसमें बड़ा रोड़ा है

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राजकोट के खिरसारा पैलेस में एक शादी  समारोह का दृश्य
अपडेटेड 26 अप्रैल , 2026

गुजरात में दुनिया पर नजर रखने वाली कंपनियों के बोर्डरूम हैं, चमचमाते हाइवे हैं, लॉयन सफारी हैं और तीर्थयात्रा के सर्किट भी. और यहां का खाना भी लाजवाब होता है—मतलब यहां के व्यंजन तो बहुत ही लजीज होते हैं. अब, गुजरात में सरकार ने नई पहल की है, जिसका नाम है 'वेड इन गुजरात’ (गुजरात में शादी कीजिए).

जाहिर तौर पर इसका मकसद डेस्टिनेशन वेडिंग के बढ़ते आकर्षण का फायदा उठाना है. लेकिन इसका एक और उद्देश्य यह भी है कि यहां के जो लोग अपने राज्य से बाहर जाकर शादियां करना पसंद करते हैं, उस चलन को कम किया जाए. 

पर्यटन सचिव कुलदीप आर्य कहते हैं, इस पहल का इरादा एक ऐसा आकर्षक माहौल बनाना है, जो दुनिया-भर में घूमने-फिरने के शौकीन गुजरातियों को लुभा सके और बाहर के लोगों को भी ला सके. वे कहते हैं, ''यह हमारे लिए पर्यटन का विशिष्ट क्षेत्र है.

फिलहाल, गुजरात में शादियां करना उतना लोकप्रिय नहीं. यहां तक कि स्थानीय लोगों में भी यही रुझान है और वे अपनी डेस्टिनेशन वेडिंग राज्य से बाहर जाकर करते हैं. हम इस चलन को बदलना चाहते हैं. इसके अलावा, शादियों के भव्य और विशाल आयोजनों से स्थानीय स्तर पर अर्थव्यवस्था को भी काफी फायदा होता है.’’

इस उद्योग से जुड़े सभी लोगों ने योजना का जोरदार स्वागत किया है. लेकिन इसमें सबसे बड़ी बाधा है राज्य की शराबबंदी की पुरानी नीति. इस घोषणा ने उस बहस को फिर से जिंदा कर दिया है जिसमें गंवाए गए मौकों और नीतिगत पाबंदियों के कारण इन्फ्रास्ट्रक्चर के बेतरतीब विस्तार पर सवाल उठाए जा रहे हैं. ये ऐसे मुद्दे हैं जो गुजरात के शादियों से जुड़े समूचे तामझाम का भविष्य तय कर सकते हैं.

इनसे होने वाली कमाई को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. भारत में होने वाली लगभग 30 फीसदी शादियां अब डेस्टिनेशन वेडिंग होती हैं. बाजार विश्लेषक ग्रैंड व्यू रिसर्च के अनुसार, 2025 में भारत में इस तरह के शादी-विवाह की अर्थव्यवस्था 1.73 लाख करोड़ रुपए थी और वर्ष 2033 तक इसके 14.8 फीसदी की सालाना वृद्धि दर से बढ़ते हुए 4.6 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच जाने की उम्मीद है.

डेस्टिनेशन वेडिंग का खर्च 30 लाख रुपए से लेकर 25 करोड़ रुपए तक हो सकता है—इसमें उपहार, गहने और शादी का सामान शामिल नहीं है. पर्यटन के क्षेत्र में बड़ा नाम होने के बावजूद फिलहाल गुजरात इस मामले में बहुत पीछे है. अपने समुद्री तटों के कारण गोवा और ऐतिहासिक महलों के लिए विख्यात राजस्थान इनमें सबसे आगे हैं. उनके बाद उत्तर प्रदेश, केरल और महाराष्ट्र हैं.

काम की शुरुआत
आर्य कहते हैं कि इस दिशा में पहला कदम है 10-15 जगहों की पहचान करना और उन्हें इस उद्योग की खास जरूरतों के हिसाब से तैयार करना. इसके लिए सलाहकारों की टीम बनाई जा रही है. जिन कुछ विशिष्ट जगहों को छांटा गया है, उनमें मध्य गुजरात में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, पोरबंदर के पास तटवर्ती शहर माधवपुर घेड़ (जिसे भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के विवाह की पौराणिक कथा से जोड़ा जाता है), सफेद कच्छ का रन और समुद्र किनारे तीर्थनगरी द्वारका-शिवराजपुर, अंबाजी और सोमनाथ शामिल हैं.

आर्य कहते हैं, ''हमारे पास गुजरात की अनूठी विरासत वाली इमारतें और महल हैं, जो राजस्थान से एकदम अलग हैं. यहां रहने-ठहरने की वैभवशाली सुविधा और इवेंट के लिए बुनियादी साधन-सुविधाएं पहले से ही मौजूद है. लेकिन अब जब हम अपनी सांस्कृतिक विरासत का फायदा उठाना चाहते हैं, तो हमारी योजना कुछ खास तरह के अनुभव तैयार करने और उन्हें समारोह आयोजकों और वेडिंग प्लानरों को मुहैया कराने की है.’’

 इन डेस्टिनेशन की मार्केटिंग का कॉन्सेप्ट श्रद्धा राणा को काफी पसंद आया है. वे हेरिटेज खिरसारा पैलेस की डायरेक्टर हैं और यह पैलेस राजकोट के बाहरी इलाके में बना 27 कमरों का पुराना महल है, जिसे फिर से नया रूप दिया गया है. वे कहती हैं, ''कोविड के बाद से आरामदेह डेस्टिनेशन शादियों का रिवाज बहुत बढ़ गया है.

एनआरआइ और भरपूर खर्च करने वाले स्थानीय लोगों से हमारे पास काफी इक्नवायरी आती है. लेकिन, गैर-गुजरातियों को यहां बुलाने में सबसे बड़ी बाधा शराबबंदी कानून है. अगर कोई ऐसी नीति बन जाए जिसमें डेस्टिनेशन वेडिंग्स में ग्रुप को इजाजत मिल जाए, तो हम इसका पूरा फायदा उठा सकते हैं.’’

यात्रा लेखक और हेरिटेज टूरिज्म एसोसिएशन ऑफ गुजरात के सलाहकार अनिल मूलचंदानी बताते हैं कि राज्य में 35-40 हेरिटेज होटल हैं और लगभग 30 और परिवार अपनी पुरानी धरोहरों को दुरुस्त करवाकर नया रूप देने की सोच रहे हैं. वे कहते हैं, ''एक डेस्टिनेशन वेडिंग में मेहमानों के लिए 150-200 कमरों की जरूरत होती है

 स्टाफ और सर्विस के लिए 100 और कमरे चाहिए. जो हेरिटेज भवन पहले से ही संसाधनों की दिक्कत का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह बहुत बड़ी चुनौती होगी... फिर भी, अगर सही नीतियां बनाई जाएं, तो यह परियोजना लंबे समय के विजन के तौर पर विकसित हो सकती है.’’ 

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